जानिए नीरज चोपड़ा के कोच कौन हैं?

जर्मन दिग्गज उवे हॉन टोक्यो ओलंपिक जेवलिन थ्रो स्वर्ण पदक विजेता के कोचों में से एक हैं।
लेखक विवेक कुमार सिंह

नीरज चोपड़ा (Neeraj Chopra) ने टोक्यो 2020 एथलेटिक्स में भारत का पहला व्यक्तिगत ओलंपिक स्वर्ण पदक जीता, ओलंपिक स्टेडियम में हुए जेवलिन थ्रो फाइनल में 87.58 मीटर की दूरी पर भाला भेंका।

हरियाणा से ताल्लुक रखने वाले नीरज चोपड़ा को कई कोचों ने पोडियम तक पहुंचाने में अपनी भूमिका निभाई है, जबकि उनके हेड कोच दिग्गज उवे हॉन (Uwe Hohn) हैं। हॉन के साथ क्लाउस बार्टोनिट्ज़, गैरी कैल्वर्ट, वर्नर डेनियल, काशीनाथ नाइक, नसीम अहमद और जयवीर सिंह नीरज को ट्रेनिंग देते हैं।

जयवीर नीरज चोपड़ा के बचपन के कोच हैं, जिनकी देख-रेख में ही हरियाणा के पानीपत जिले के खंडरा गांव के लड़के ने सबसे पहले जेवलिन थ्रो करना सीखा।

2011 में नीरज हरियाणा के पंचकुला में ताऊ देवी लाल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स गए, जहां उन्होंने कोच नसीम अहमद से ट्रेनिंग ली। नीरज वहां अपने सीनियर्स की ट्रेनिंग को देखते और उनसे टिप्स लेते थे। अहमद ने उन्हें अपनी आंतरिक-शक्ति (स्टेमिना) और ताकत (स्ट्रेंथ) को बढ़ाने के लिए लंबी दूरी के धावकों के साथ ट्रेनिंग दी।

कोच अहमद ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया, "चूंकि वो क्रॉस लेग के साथ थ्रो करते थे और आखिरी स्टेप (स्ट्राइड) बड़ा लेते थे, जिससे उन्हें स्मूथ थ्रो के लिए आवश्यक गति मिल जाती थी।" "दो स्ट्राइड से थ्रो करने से लेकर तीन स्ट्राइड और पांच स्ट्राइड तक, हम हर दिन एक पूरे रन-अप की ओर बढ़ने की कोशिश करते थे और इससे उन्हें लैंडिंग तकनीक में महारत हासिल करने में मदद मिली।"

नीरज चोपड़ा ने पोलैंड में 2016 विश्व अंडर-20 चैंपियनशिप में 86.48 मीटर थ्रो के साथ जूनियर विश्व रिकॉर्ड बनाया और स्वर्ण पदक जीता।

काशीनाथ नाइक एसिस्ट कोच और मुख्य कोच गैरी कैल्वर्ट उस समय नीरज चोपड़ा के साथ काम कर रहे थे। ऑस्ट्रेलियाई गैरी कैल्वर्ट ने चीन की नेशनल जेवलिन कोच के रूप में काम किया था, 2018 में बीजिंग में दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया था।

2010 राष्ट्रमंडल खेलों के जेवलिन थ्रो में कांस्य पदक जीतने वाले काशीनाथ नाइक नीरज को एक बेहतरीन जूनियर एथलीट के रूप में याद करते हैं, जो (नीरज चोपड़ा) उस समय दुबले-पतले होने के बावजूद बहुत तेज़ी के साथ थ्रो करते थे।

नीरज चोपड़ा ने बाद में 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले जर्मन कोच वर्नर डेनियल से ट्रेनिंग ली, जहां उन्होंने स्वर्ण पदक जीता।

उवे हॉन हैं नीरज चोपड़ा के वर्तमान कोच

एशियन गेम्स के स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा के सबसे प्रसिद्ध कोच जर्मन उवे हॉन हैं, जो इतिहास में 100 मीटर से अधिक की दूरी पर भाला फेंकने वाले एकमात्र एथलीट हैं।

1984 में, हॉन ने बर्लिन में 104.8 मीटर थ्रो रिकॉर्ड दर्ज कराया था। इस नए भाले के डिजाइन को बाद में 1986 में सबने अपनाया, इस भाले को पकड़ने की जगह बीच से थोड़ी आगे बनाई गई थी, जिससे लगता था कि स्टेडियमों में उपलब्ध स्थान भी कम पड़ जाएंगे और उन्हें इस तरह बनाया गया था कि वो जमीन पर गिरे तो खड़े रहें गिरे नहीं। उवे हॉन का अविश्वसनीय थ्रो तब से एक विश्व रिकॉर्ड बना हुआ है।

ईस्ट जर्मनी के नेरुप्पिन में जन्मे उवे हॉन ने 1982 की यूरोपीय चैंपियनशिप और 1985 के IAAF विश्व कप में भाला फेंककर स्वर्ण पदक जीता था। ईस्ट जर्मनी ने लॉस एंजेलिस ग्रीष्मकालीन खेलों का बहिष्कार किया, जिसकी वजह से हॉन 1984 के ओलंपिक में भाग लेने से चूक गए।

हॉन ने चीन के झाओ किंगगैंग (Zhao Qinggang) को भी कोचिंग दी है, जिन्होंने 2014 एशियन गेम्स में भाला फेंककर स्वर्ण पदक जीता था।

2018 और 2019 में उवे हॉन ने नीरज चोपड़ा की थ्रोइंग तकनीक में और सुधार किया, जो जर्मन कोच को स्वभाविक लगा।

हॉन ने ये भी कहा था कि भारतीय खेल प्राधिकरण और भारतीय एथलेटिक्स महासंघ COVID-19 महामारी के दौरान भारतीय एथलीटों को विदेशी कैंप्स या प्रतियोगिताओं में भेजने के लिए और अधिक प्रयास कर सकते थे। उन्होंने ये भी कहा था कि एथलीटों के लिए सही आहार भी एक मुद्दा रहा था।

हॉन के अलावा, बायोमैकेनिक्स विशेषज्ञ क्लाउस बार्टोनिट्ज़ ने भी टोक्यो ओलंपिक के दौरान नीरज चोपड़ा के साथ काम किया था।

टोक्यो में नीरज चोपड़ा की जीत के बाद क्लॉस बार्टोनिट्ज़ ने कहा, "मैं बहुत खुशी महसूस कर रहा हूं। नीरज के लिए खुशी है कि उन्हें पदक मिला, वो कांस्य नहीं था, वो रजत भी नहीं था, बल्कि वो स्वर्ण पदक था और वो दुनिया के सर्वश्रेष्ठ जेवलिन थ्रोअर बन गए।"