उवे हॉन: भाला फेंक का 'सर्वकालिक रिकॉर्डधारक', जो नहीं जीत सका ओलंपिक स्वर्ण पदक!

जर्मन भाला फेंक खिलाड़ी उवे हॉन 100 मीटर से अधिक का थ्रो करने वाले एकमात्र एथलीट हैं। उन्होंने टोक्यो ओलंपिक चैंपियन नीरज चोपड़ा को भी कोचिंग दी है।

लेखक शिखा राजपूत
फोटो क्रेडिट Getty Images

जैवलिन में कई भाला फेंक एथलीट का नाम अक्सर चर्चा में रहता है, लेकिन एक ऐसे जैवलिन खिलाड़ी भी हैं, जिनका नाम इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा है, बल्कि उनके रिकॉर्ड को आज तक कोई भेद नहीं पाया।

6'6" की लंबाई के साथ जर्मन खिलाड़ी उवे हॉन एक प्रभावशाली जैवलिन थ्रोअर है, जिनके कद ने कभी भी उनके जैवलिन थ्रो खेल में कोई रोड़ा नहीं डाला, बल्कि यह लंबाई उनके लिए वरदान साबित हुई।

उवे हॉन ने कभी ओलंपिक या वर्ल्ड चैंपियनशिप में पदक नहीं जीता। न ही उनके नाम कोई आधिकारिक वर्ल्ड रिकॉर्ड है। लेकिन इस खेल में उन्होंने अपना जो शानदार प्रभुत्व कायम किया है वह काबिले तारीफ है। उन्होंने अपने छोटे लेकिन शानदार करियर और फिर एक कोच के रूप में खेल पर काफी प्रभाव डाला, जो उन्हें महान खिलाड़ी साबित करता है।

इसके अलावा उवे हॉन अभी तक एकमात्र जैवलिन थ्रो करने वाले खिलाड़ी बने हुए हैं जिन्होंने 100 मीटर से अधिक का थ्रो किया है।

यहां जानें कैसे उवे हॉन जैवलिन के सुपरस्टार बने।

उवे हॉन कहां से हैं?

उवे हॉन का जन्म 16 जुलाई, 1962 को पूर्वी जर्मनी के न्यूरुपिन शहर में हुआ था।

उवे हॉन ने बचपन में ही जैवलिन खेलना शुरू कर दिया था और फिर एक दिन घर पर 1972 की ओलंपिक डॉक्यूमेंट्री देखते हुए उनका जीवन बदल गया।

हिंदू में छपी एक खबर के मुताबिक उवे हॉन ने कहा था, "जब मैं 14 साल का था, मैंने 1972 के ओलंपिक चैंपियन क्लॉस वोल्फर्मन पर एक डॉक्यूमेंट्री देखी थी और इसे देखने के बाद मैंने पहली बार 100 मीटर थ्रो के बारे में सोचा था।"

म्यूनिख में 1972 के ग्रीष्मकालीन खेल में पश्चिम जर्मनी के क्लॉस वोल्फर्मन ने 90.48 मीटर के ओलंपिक रिकॉर्ड थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीता। एक साल बाद वोल्फर्मन ने 94.08 मीटर थ्रो के साथ वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज किया।

इसके बाद वोल्फर्मन के दोनों रिकॉर्ड हंगरी के मिक्लोस नेमेथ ने 1976 के मॉन्ट्रियल और क्यूबेक ग्रीष्मकालीन खेल में 94.58 मीटर थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीतकर तोड़ दिए।

उवे हॉन के पदक और सर्वकालिक रिकॉर्ड

साल 1980 में उवे हॉन ने जर्मनी के पॉट्सडैम में एक मीट में इंटरनेशनल डेब्यू किया और उन्होंने स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

अगले साल उवे हॉन ने 1981 में नीदरलैंड के यूट्रेक्ट में यूरोपीय जूनियर चैंपियनशिप में 86.56 मीटर के थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीता, जो उस समय का एक जूनियर रिकॉर्ड था।

इसके बाद उन्होंने ग्रीस के एथेंस में 1982 की यूरोपीय चैंपियनशिप में 91.34 मीटर थ्रो का थ्रो किया और सीनियर यूरोपीय चैंपियन बने। हॉन तब सिर्फ 22 साल के थे और वह हेलसिंकी में आयोजित 1983 विश्व चैंपियनशिप में हिस्सा लेने के साथ पदक के प्रबल एक दावेदार थे, लेकिन किसी वजह से वह प्रतिस्पर्धा नहीं कर सके और इसी के साथ उनका पूरा सीजन खत्म हो गया।

जब 14 साल के उवे हॉन ने 100 मीटर के निशान को पार करने का खुद से वादा किया था, उसके ठीक आठ साल बाद यह सुनहरा अवसर आया। और जर्मन जैवलिन स्टार ने आखिरकार अपने सपने को साकार किया।

20 जुलाई, 1984 को बर्लिन में फ्रेडरिक-लुडविग-जॉन-स्पोर्टपार्क मल्टीपर्पज स्पोर्ट कॉम्पेलक्स में उवे हॉन ने ओलंपिक डे एथलेटिक्स प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक अपने नाम करने के साथ 104.80 मीटर का थ्रो किया। इस थ्रो ने एक साल पहले यूएसए के टॉम पेट्रानॉफ द्वारा बनाए गए 99.72 मीटर के मौजूदा विश्व रिकॉर्ड को तोड़ दिया। 

यह इतिहास के पन्नों पर पहला और इकलौता मौका था जब किसी एथलीट ने भाला फेंक में 100 मीटर का आंकड़ा पार किया। "जस्ट इनसाइड द स्टेडियम" हॉन के इस शानदार थ्रो के बाद कमेंटेटर ने इसको कुछ इस तरह से शब्दों में व्यक्त किया।

जैवलिन के नए विनिर्देशों और खेल नियमों में बदलाव की वजह से रिकॉर्ड बुक को फिर से स्थापित करने से पहले यह रिकॉर्ड 1986 तक विश्व रिकॉर्ड के रूप में कायम रहा। एक ओलंपिक चैंपियन चेक एथलीट जॉन जेलेजनी ने जर्मनी में आयोजित एक एथलेटिक्स मीट के दौरान 1996 में 98.48 मीटर के थ्रो के साथ पुरुषों की भाला फेंक में मौजूदा विश्व रिकॉर्ड दर्ज किया।

हालांकि हॉन के थ्रो ने अपने आधिकारिक विश्व रिकॉर्ड होने का दर्जा खो दिया। लेकिन उनके 104.80 मीटर थ्रो को सर्वश्रेष्ठ रिकॉर्ड माना गया और इसे भाला फेंक में 'सर्वकालिक रिकॉर्ड' के रूप में जाना जाता है।

हालांकि, इस बात का अंदाजा किसी को भी नहीं था कि बर्लिन में उवे हॉन के सबसे शानदार प्रदर्शन के बावजूद जल्द ही उनका करियर समाप्त होने वाला था।

1984 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक में उवे हॉन स्वर्ण पदक जीतने के लिए पूरी तरह तैयार थे, लेकिन उन्हें इस मौके से वंचित कर दिया गया। क्योंकि पूर्वी जर्मनी ने राजनीतिक कारणों से ग्रीष्मकालीन खेल के संस्करण से अपना नाम वापस ले लिया था।

"मुझे गलती के बिना ओलंपिक से चूकना पड़ा।" इसका पछतावा उवे हॉन को अभी भी है।

फिनलैंड के आर्टो हार्कोनेन ने लॉस एंजिल्स में 86.76 मीटर के प्रयास के साथ स्वर्ण पदक जीता। दिलचस्प बात यह है कि उवे हॉन ने उस साल नौ इवेंट जीते और उनका हर विजयी थ्रो 90 मीटर से अधिक का रहा।

हॉन 1985 में बेहतरीन फॉर्म में थे, उन्होंने कैनबरा में 1985 IAAF वर्ल्ड कप सहित स्वर्ण पदकों की लाइन लगा दी। दुर्भाग्य से यह एक एथलीट के रूप में उनका आखिरी सीजन था, क्योंकि बार-बार होने वाली चोटों और असफल सर्जरी ने उनके करियर को छोटा कर दिया था।

जर्मनी के अग्रणी खिलाड़ी को 24 साल की कम उम्र में ही मजबूरन रिटायर होना पड़ा था। हालांकि, लोगों का मानना उनका सर्वश्रेष्ठ खेल आना अभी बाकी था। 

उवे हॉन 1986 में पहली बार पीठ की चोट के कारण सर्जरी के लिए गए और जब उन्हें होश आया तो वह दाहिने पैर से लंगड़ा रहे थे। यह परेशानी और बढ़ गई जब डॉक्टरों ने फॉलो-अप सर्जरी से इसे सही करने की कोशिश की।

समय से पहले करियर को खत्म होने से बचाने के साथ उवे हॉन को खुद को अपंग होने से बचाने के लिए 1991 में एक और सर्जरी करानी पड़ी। जिसमें उनकी पीठ में ट्रांसप्लांट करने के लिए उनके बाएं पैर से नर्व टिस्सू निकालने की जोखिम भरी सर्जरी शामिल थी।

हालांकि इससे उवे हॉन अपने पैरों पर खड़े हो गए, लेकिन सर्जरी के बाद जर्मन अपने बाएं पैर से लंगड़ाकर चलते हैं। 

एक कोच के रूप में उवे हॉन

भले ही हॉन का खेल करियर समय से पहले समाप्त हो गया, लेकिन जर्मन खिलाड़ी ने उस खेल से जुड़े रहने का एक बेहतरीन तरीका तलाश लिया और उन्होंने युवा भाला फेंक एथलीटों को कोचिंग देनी शुरू कर दी।

1999 में एक पेशेवर कोच के रूप में शुरुआत करने के बाद हॉन ने कई विश्व स्तरीय एथलीटों को संवारा है, जिसमें एशियाई खेल चैंपियन चीन के झाओ किंगगैंग और एक राष्ट्रमंडल चैंपियन ऑस्ट्रेलिया के जारोड बैनिस्टर शामिल हैं।

लेकिन, उवे हॉन के सबसे मशहूर शागिर्दो में टोक्यो 2020 ओलंपिक चैंपियन भारतीय स्टार नीरज चोपड़ा का नाम शामिल है।

2017 में हॉन भारत के जैवलिन थ्रो के हेड कोच के रूप में नियुक्त हुए। इसके बाद उन्होंने नीरज चोपड़ा और अन्य भारतीय जैवलिन थ्रोअर खिलाड़ियों को ट्रेनिंग देनी शुरू की। उन्होंने 2018 में एशियाई खेल और राष्ट्रमंडल खेल के स्वर्ण पदक के लिए नीरज चोपड़ा का मार्गदर्शन किया। कुछ समय बाद वह नीरज चोपड़ा के साथ खेल में अच्छा करते हुए आगे बढ़े। बेशक उन्होंने टोक्यो 2020 में भारत के लिए एक ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीतने के लिए नीरज को अच्छी तरह से तैयार किया।

1983 में शादी रचाने वाले उवे हॉन दो बच्चों के पिता हैं। हॉन 2021 में भारत के जैवलिन थ्रो कोच के पद से हट गए थे।

उवे हॉन की उपलब्धियां

  •  100 मीटर (104.80 मीटर) का थ्रो करने वाले पहले और एकमात्र जैवलिन थ्रोअर

  •  रिकॉर्ड बुक्स को फिर से स्थापित करने से पहले 1986 तक मेंस जैवलिन थ्रो के वर्ल्ड रिकॉर्ड धारक रहे 

  • 1984 में बर्लिन में एथलेटिक्स प्रतियोगिता के ओलंपिक डे के मौके पर उन्होंने 104.80 मीटर का थ्रो किया जो जैवलिन थ्रो में अब तक किसी भी भाला फेंक खिलाड़ी के द्वारा किया गया सर्वश्रेष्ठ रिकॉर्ड है। उनके इस रिकॉर्ड को कोई अब तक तोड़ नहीं सका है।

  •  यूरोपीय जूनियर चैंपियनशिप 1981 में स्वर्ण पदक जीता

  • 1982 की यूरोपीय चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता

  •  IAAF वर्ल्ड कप 1985 में स्वर्ण पदक जीता

  • टोक्यो 2020 ओलंपिक पुरुष भाला फेंक चैंपियन भारत के नीरज चोपड़ा के कोच रहे

ओलंपिक जाएं। यह सब पायें।

मुफ्त लाइव खेल आयोजन | सीरीज़ के लिए असीमित एक्सेस | ओलंपिक के बेमिसाल समाचार और हाइलाइट्स