चुनौतियों से लड़कर, चोटों को सहकर, विश्व चैंपियन बनीं निकहत जरीन

निकहत जरीन बॉक्सिंग वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने वाली पांचवीं भारतीय महिला हैं।

लेखक विवेक कुमार सिंह
फोटो क्रेडिट Boxing Federation of India

“उन्होंने मुझे इतनी बुरी तरह से कैसे हरा दिया? मैं अगली बार इसका जवाब दूंगी।”

ये बात भारतीय बॉक्सर निकहत जरीन ने 12 साल की उम्र में कही थी, जब पहली बार वो मुक्केबाजी करने उतरी तो उन्हें काफी चोट आई। आंखों के नीचे काला घेरा बन गया था और नाक से खून बह रहा था।

इस मुकाबले के बाद चोटिल निकहत को देखकर उनकी मां की आंखों में आंसू आ गए थे, लेकिन निकहत ने पहले दिन मिली हार को कभी हल्के में नहीं लिया।

हो सकता है, उनके उसी रवैये ने उन्हें 20 मई, 2022 को तुर्की के इस्तांबुल में आयोजित महिला मुक्केबाजी विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने में मदद की।

निकहत जरीन, मैरी कॉम, सरिता देवी, जेनी आरएल और लेख केसी सहित उन भारतीय मुक्केबाजों की एक विशेष सूची में शामिल हो गई हैं, जो विश्व चैंपियन बनी हैं।

तेलंगाना के निजामाबाद से दुनिया के शीर्ष तक का उनका सफर चुनौतियों और बाधाओं से भरा हुआ रहा है। लेकिन उन्होंने इतिहास में अपना नाम दर्ज करने के लिए बहुत मुकाबले लड़े हैं।

निकहत जरीन कौन हैं?

14 जून 1996 को तेलंगाना के निजामाबाद में जन्मी निकहत जरीन का पालन-पोषण एक रूढ़िवादी मुस्लिम परिवार में हुआ। उनके पिता मोहम्मद जमील अहमद और मां परवीन सुल्ताना ने ही उनका पालन-पोषण किया था।

अपनी तीन और बहनों में निकहत सबसे शरारती थीं और पड़ोस के बच्चों के साथ झगड़ा करने के बाद पेड़ पर चढ़ जाती थीं।

उनके पिता अपनी युवावस्था में एक खिलाड़ी थे, जो निकहत की ऊर्जा को सही जगह इस्तेमाल करना चाहते थे और उन्होंने अपनी बेटी को दौड़ने के लिए ट्रेनिंग देना शुरू कर दिया।

शॉर्ट स्प्रिंट में शानदार प्रदर्शन के बावजूद, बॉक्सिंग ने निकहत का ध्यान अपनी ओर खींचा।

निकहत ने Olympics.com को बताया, "एक बार जब हम स्टेडियम में थे, तो मैंने देखा कि बॉक्सिंग के अलावा सभी खेलों में लड़कियां भाग ले रही थीं।"

“मैंने अपने पापा से पूछा कि बॉक्सिंग में कोई लड़की प्रतिस्पर्धा क्यों नहीं कर रही है। 'बॉक्सिंग बस लड़के ही करते हैं क्या?' (क्या बॉक्सिंग सिर्फ लड़कों के लिए है?) "उन्होंने कहा नहीं। लेकिन वो बॉक्सिंग नहीं करती हैं, क्योंकि लोगों को लगता है कि लड़कियां घर पर रहने और घर का काम करने के लिए होती हैं।”

निकहत जरीन ने कभी भी लड़कियों को लड़कों से कम नहीं समझा और बॉक्सिंग रिंग के लिए उन्होंने ट्रैक को छोड़ने का फैसला किया। "मेरे लिए लड़कियां हमेशा लड़कों के समान थीं, और वे हमेशा उतनी ही मजबूत थीं।"

हालांकि उनकी मां, परवीन, इस फैसले से बहुत खुश नहीं थी, बल्कि इस बात से चिंतित थीं कि निकहत से कौन शादी करेगा। निकहत के पिता का समर्थन उनके मुक्केबाजी करियर को शुरू करने के लिए काफी था।

युवा मुक्केबाज ने शुरुआती वर्षों में लड़कों के साथ मुकाबला किया क्योंकि वह स्थानीय जिम में बॉक्सिंग करने वाली अकेली लड़की थीं।

निकहत ने बताया कि, "उन्होंने कभी भी मेरे साथ अलग व्यवहार नहीं किया या मुझे कभी हल्के में नहीं लिया।"

अपने पिता के साथ एक साल के ट्रेनिंग के बाद निकहत को 2009 में द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता, IV राव की देखरेख में ट्रेनिंग के लिए भेजा गया था। इसका परिणाम भी जल्द ही सामने आया।

निकहत जरीन ने सब-जूनियर नेशनल का खिताब जीता और इसके बाद 2011 में जूनियर और यूथ वर्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने 2013 में यूथ वर्ल्ड चैंपियनशिप में एक और रजत पदक जीता और जल्द ही सीनियर सर्किट के लिए अपनी राह को मजबूत किया। 

निकहत की आदर्श मैरी कॉम, जब बन गईं प्रतिद्वंद्वी

भारत में ज्यादातर युवा मुक्केबाजों के लिए मैरी कॉम एक आइडल हैं। मणिपुर की मूल निवासी के शानदार कारनामों में छह विश्व चैंपियनशिप स्वर्ण पदक, पांच एशियाई चैंपियनशिप खिताब और एक ओलंपिक कांस्य पदक भी शामिल है।

हालांकि अन्य युवा मुक्केबाजों के विपरीत, निकहत जरीन को मैरी कॉम के रूप में एक प्रतिद्वंद्वी मिली क्योंकि वे दोनों एक ही भार वर्ग - फ्लाईवेट (51 किग्रा) में लड़ रही थीं।

जूनियर विश्व चैंपियन होने के बावजूद, निकहत को भारतीय सीनियर टीम में जगह बनाने में मुश्किल हुई।

उन्होंने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए कहा, “51 किग्रा वर्ग में जगह बनाना बहुत मुश्किल था। मैरी कॉम और पिंकी जांगड़ा जैसे पहले से ही बड़े नाम इस भार वर्ग में थे। वे मुझसे बहुत सीनियर और अधिक अनुभवी थीं।”

निकहत ने पहली बार 2015 में 19 साल की उम्र में नेशनल कैंप में प्रवेश किया था। अपने भार वर्ग में कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण, निकहत को 2016 विश्व चैंपियनशिप के लिए नेशनल सेलेक्शन ट्रायल के लिए 54 किग्रा वर्ग में जाने की सलाह दी गई थी।

एक निडर निकहत ने ट्रायल जीता और अस्ताना में आयोजित हुए विश्व चैंपियनशिप के क्वार्टर-फाइनल में जगह बनाई।

“मैंने जिस तरह से प्रदर्शन किया उससे मैं खुश थी। लेकिन मैं अपने मूल भार वर्ग में प्रतिस्पर्धा नहीं करने को लेकर थोड़ी चिंतित थी। सभी ने मुझे इसके बारे में चिंता न करने के लिए कहा और बताया कि मुझे अभी लंबा रास्ता तय करना है।"

दो साल बाद, मैरी कॉम 2017 में एशियाई खिताब और 2018 में एक और विश्व खिताब जीतने के बाद भी भारत की पसंदीदा फ्लाइवेट मुक्केबाज थीं।

इसके अलावा, निकहत जरीन की समस्याएं तब और बढ़ गईं जब 2017 में उनके दाहिने कंधे में चोट लग गई, जिसकी वजह से उन्हें एक साल तक रिंग से बाहर रहना पड़ा।

रिंग में की शानदार वापसी

निकहत जरीन ने 2018 में बेलग्रेड विनर इंटरनेशनल चैंपियनशिप में रजत पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वापसी का डंका बजाया।

एक साल बाद निजामाबाद की इस बॉक्सर ने एशियाई चैंपियनशिप में कांस्य (बैंकॉक 2019) और स्ट्रैंडजा बॉक्सिंग टूर्नामेंट (सोफिया 2019) में स्वर्ण पदक जीता।

मैरी कॉम की ऐतिहासिक उपलब्धियों और शानदार फॉर्म की वजह से भारतीय मुक्केबाजी टीम में फ्लाईवेट वर्ग में एक स्थान के लिए निकहत जरीन ने राष्ट्रीय महासंघ से टोक्यो 2020 ओलंपिक क्वालीफाइंग इवेंट में प्रतिस्पर्धा करने के अवसर के लिए सेलेक्शन ट्रायल आयोजित करने का अनुरोध किया।

हालांकि निकहत मुकाबला हार गईं, लेकिन अपनी आदर्श मुक्केबाज से मिली हार ने उन्हें और अधिक मेहनत करने के लिए प्रेरित किया।

मैरी कॉम ने टोक्यो 2020 में राउंड 16 में हारने के बाद प्रतिस्पर्धा से बाहर होने का फैसला किया, जिससे तेलंगाना की युवा मुक्केबाज के लिए दरवाजा खुल गया।

इसके बाद निकहत जरीन ने 2021 में राष्ट्रीय चैंपियनशिप जीती और इसके बाद बोस्फोरस ओपन और स्ट्रैंड्जा मेमोरियल में जीत हासिल की।

बॉक्सिंग वर्ल्ड चैंपियन निकहत जरीन

भारतीय मुक्केबाज तुर्की के इस्तांबुल में आयोजित 2022 विश्व चैंपियनशिप के दौरान सर्वसम्मति से अपने सभी मुकाबलों में जीत हासिल कर रही थीं।

निकहत जरीन ने फ्लाईवेट फाइनल में थाईलैंड की टोक्यो ओलंपियन जुतामस जितपोंग को हराकर भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता।

"मैं ट्विटर पर ट्रेंड कर रही हूं?" निकहत जरीन ने अपनी जीत के बाद मीडिया से पूछा। "ट्विटर पर ट्रेंड करना मेरे सपनों में से एक था! अगर मैं सच में अभी ट्रेंड कर रही हूं तो मैं सच में खुश हूं,"

निकहत जरीन ने सच में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दुनिया को अपने बारे में बताया। मैरी कॉम के अलावा किसी अन्य भारतीय को महिला विश्व चैंपियन बने 16 साल और सात संस्करण हो चुके थे।

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