भारत के सर्वश्रेष्ठ मुक्केबाज: सुपरमॉम से लेकर, उस आर्मी क्लब की कहानी, जिसने भारतीय बॉक्सिंग को ऊंचाइयों तक पहुंचाया

मैरी कॉम, अमित पंघल, और विजेंदर सिंह जैसे मुक्केबाजों ने अपने शानदार प्रदर्शन से ओलंपिक और कई अंतर्राष्ट्रीय इवेंट में पदक जीत कर भारत को उंचाइयों तक पहुंचाया है।

लेखक रौशन कुमार
फोटो क्रेडिट AFP

भारत में बॉक्सिंग का उत्थान 21वीं सदी में हुआ और यह किसी चमत्कार से कम नहीं है।

मैरी कॉम और विजेंदर सिंह से लेकर अमित पंघल और लवलीना बोरगोहेन तक, भारत में पिछले कुछ सालों में लगातार बेहतरीन मुक्केबाज देखे गए हैं।

भारत का बॉक्सिंग की दुनिया में पावरहाउस बनने तक का सफर आसान नहीं रहा है।

भारत में बॉक्सिंग का जन्म प्राचिन काल में ही हुआ था लेकिन खेल के रूप में इसे साल 1925 में बॉम्बे प्रेसीडेंसी एमेच्योर बॉक्सिंग फेडरेशन के गठन के बाद जाना जाने लगा।

इसके बाद भारत ने बॉक्सिंग में जरूर कुछ जीत हासिल की थी लेकिन साल 2000 के बाद से भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार जीत हासिल की और अपनी पहचान बनाई।

कुछ ऐसे मुख्य स्रोत थे जिन्होंने भारत में खेल के विकास को गति दी और रैंकों के माध्यम से इसे ऊपर उठाने में मदद की।

इनमें से पहली भारतीय सेना थी।

डबल एशियन गेम्स के गोल्ड मेडलिस्ट हवा सिंह से लेकर वर्ल्ड नंबर 1 अमित पंघल तक, भारतीय सेना देश में बॉक्सिंग टैलेंट को आगे बढ़ाने में सबसे आगे रही है। बॉयज आर्मी प्रोजेक्ट एक शानदार सफलता रही है।

दरअसल, टोक्यो 2020 ओलंपिक में एक तिहाई भारतीय मुक्केबाज भारतीय सेना के थे।

हरियाणा में स्थित भिवानी बॉक्सिंग क्लब एक और ऐसा मुख्य केंद्र है जहां से लगातार विश्व चैंपियन और ओलंपिक पदक विजेताओं ने भारत का प्रतिनिधित्व किया है।

यहां हम उन सर्वश्रेष्ठ भारतीय मुक्केबाजों के बारे में जानेंगे,जिन्होंने देश को गौरवान्वित किया है।

मैरी कॉम

24 नवंबर 1982 को मणिपुर के छोटे से गांव कंगथेई में जन्मी एमसी मैरी कॉम भारत की अब तक की सबसे सफल मुक्केबाज हैं। वह कम भार वाले डिवीजन जैसे पिनवेट, फ्लाईवेट और लाइट फ्लाईवेट में प्रतिस्पर्धा करती हैं।

मैरी कॉम ने रिकॉर्ड छह बार एमेच्योर विश्व चैंपियनशिप अपने नाम किया है। उन्होंने इस टूर्नामेंट में कुल आठ बार हिस्सा लिया है और प्रत्येक बार मैरी कॉम ने पदक हासिल किया है। वह लंदन 2012 में कांस्य पदक जीतकर ओलंपिक में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला मुक्केबाज भी हैं।

मैरी कॉम तीन बेटे और एक गोद ली हुई बेटी की मां भी हैं। उन्होंने कई एशियन चैंपियनशिप के साथ-साथ एशियन और कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक हासिल किए हैं।

विजेंदर सिंह

हरियाणा में भिवानी जिला के कालुवास गांव के रहने वाले इस मुक्केबाज का जन्म 29 अक्टूबर 1985 में हुआ था।

विजेंदर सिंह भारत के पहले पुरुष बॉक्सर हैं जिन्होंने दुनिया भर में अपना परचम लहराया। वह मिडिलवेट भार वर्ग में प्रतिस्पर्धा करते हैं।

विजेंदर सिंह ओलंपिक पदक जीतने वाले पहले भारतीय मुक्केबाज हैं। इन्होंने 2008 बीजिंग ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था। उन्होंने एथेंस 2004 में अपना ओलंपिक डेब्यू किया था और उन्होंने साल 2012 के लंदन ओलंपिक में भी अपनी दावेदारी पेश की थी।

विजेंदर सिंह विश्व चैंपियनशिप पदक जीतने वाले पहले पुरुष भारतीय मुक्केबाज भी हैं। इन्होंने साल 2009 में 75 किग्रा वर्ग में कांस्य पदक जीता था।

विजेंदर ने साल 2015 में पेशेवर बॉक्सिंग को चुना और वहां भी उन्होंने अपना लोहा मनवाया। उन्होंने 12 जीत और सिर्फ एक हार के साथ एक प्रभावशाली रिकॉर्ड बनाया है।

लवलीना बोरगोहेन

टोक्यो ओलंपिक 2020 के वेलटर वेट डिवीजन में कांस्य पदक जीत कर लवलीना बोरगोहेन सुर्खियों में आईं। भारतीय बॉक्सर द्वारा जीता गया यह अब तक का तीसरा पदक है।

लवलीना असम की गोलाघाट जिले की रहने वाली हैं। 2 अक्टूबर 1997 में जन्म लेने वाली लवलीना बॉक्सिंग को अपना पेशा बनाने से पहले वह एक मुआय थाई (एक अलग तरह की मुक्केबाज) का अभ्यास करती थीं।

साल 2018 और 2019 में विश्व चैंपियनशिप में बैक-टू-बैक कांस्य पदक जीतने के बाद से लवलीना ने बॉक्सिंग में तेजी से कदम बढ़ाए हैं और अपने  रैंक में काफी इजाफा किया है।

दो बार की एशियन चैंपियनशिप पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन वर्तमान में असम पुलिस में पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) के रूप में कार्यरत है।

अमित पंघल

अमित पंघल का जन्म 16 अक्टूबर 1995 में हरियाणा के रोहतक के मैना गांव में हुआ था।

पांच फीट दो इंच वाला यह मुक्केबाज फ्लाईवेट और लाइट फ्लाईवेट वर्ग में अपनी दावेदारी पेश करता है। इस छोटे कद के मुक्केबाज ने साल 2017 में अपने पहले राष्ट्रीय चैंपियशिप मे स्वर्ण पदक अपने नाम किया था और बाद में वह विश्व चैंपियशिप में रजत पदक जीतने वाले पहले भारतीय बॉक्सर बने।

अमित पंघल ने टोक्यो 2020 में 52 किग्रा भार वर्ग में विश्व नंबर 1 के रूप में भारत का प्रतिनिधित्व किया लेकिन अपने शुरुआती मुकाबले के बाद वह आगे नहीं बढ़ सके। हालांकि, यह मुक्केबाज अभी भी युवा है और उसमें देश के लिए कई और पदक लाने की क्षमता है।

अमित पंघल वर्तमान में भारतीय सेना में जूनियर कमीशंड ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं।

लैशराम सरिता देवी

लैशराम सरिता देवी भारत के नॉर्थ ईस्ट से एक और मुक्केबाज हैं जिन्होंने विश्व स्तर पर अपना नाम बनाया है।

सरिता देवी  का जन्म 1 मार्च 1982 के मणिपुर के थौबल जिले में हुआ। वह बॉक्सिंग रिंग में कदम रखने से पहले कुंग-फू का अभ्यास करती थीं।

सरिता देवी 2000 के दशक में अपने प्रभावशाली प्रदर्शन से काफी सुर्खियों में रहीं। उन्होंने साल 2006 में विश्व चैंपियन और साल 2003 और 2012 के बीच पांच बार एशियन चैंपियन का खिताब अपने नाम किया।

उन्होंने एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स में भी पदक जीते।

अखिल कुमार

दो बार के ओलंपियन अखिल कुमार ने भिवानी की युवा पीढ़ी को प्रेरित करने में अहम भूमिका निभाई है।

भिवानी बॉक्सिंग क्लब के सदस्य अखिल कुमार का जन्म 27 मार्च 1981 को उत्तर प्रदेश के फैजाबाद में हुआ था। उन्होंने 1990 के दशक के अंत में अपने अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी करियर की शुरुआत की और बैंटमवेट डिवीजन के बेहतरीन मुक्केबाजों में से एक थे।

अखिल कुमार ने साल 2006 के कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीता और उसके अगले ही साल एशियन चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता। उन्होंने साल 2017 में पेशेवर मुक्केबाजी में जाने से पहले एथेंस ओलंपिक 2004 और बीजिंग 2008 में भी भाग लिया।

शिवा थापा

असम के मुक्केबाज शिवा थापा ने अखिल कुमार के बाद बैंटमवेट डिवीजन की कमान संभाली।

शिवा थापा का जन्म 8 दिसंबर 1993 में हुआ। असम का यह मुक्केबाज कम उम्र से ही अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाने लगा और उन्होंने साल 2010 में आयोजित यूथ ओलंपिक 54 किग्रा भार वर्ग में रजत पदक हासिल किया।

शिवा थापा ने लंदन 2012 में 18 साल की उम्र में रिंग में प्रवेश किया और ओलंपिक में प्रतिस्पर्धा करने वाले सबसे कम उम्र के भारतीय मुक्केबाज भी बने।

ओलंपिक में पहले दौर में हार झेलने के बाद शिवा थापा ने एशियन चैंपियनशिप 2013 में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। आपको बता दें कि कॉन्टिनेंटल मीट में उन्होंने दो और रजत और कांस्य अपने नाम किए हैं।

शिवा थापा ने विश्व चैंपियनशिप 2015 में कांस्य पदक भी जीता था।

विकास कृष्ण

प्रसिद्ध भिवानी बॉक्सिंग क्लब के एक और मुक्केबाज विकास कृष्ण तीन बार के ओलंपियन हैं। उनका जन्म 10 फरवरी 1992 को हिसार के हरियाणा में हुआ था।

विकास कृष्ण ने पहली बार 2010 में लाइटवेट यूथ वर्ल्ड चैंपियन बनकर सुर्खियां बटोरीं और उसी साल यूथ ओलंपिक से कांस्य भी अपने नाम किया।

हरियाणा के मुक्केबाज ने उस वर्ष एशियन गेम्स में स्वर्ण भी जीता और इसके बाद साल 2011 में विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक पर कब्जा किया। विकास कृष्ण के पदक कैबिनेट में एशियन गेम्स, एशियन चैंपियनशिप और कॉमनवेल्थ गेम्स के पदक शामिल हैं।

उन्होंने लंदन 2012, रियो 2016 और टोक्यो 2020 में अपनी दावेदारी पेश की है।

हवा सिंह

भारतीय मुक्केबाजी के शुरुआती दिनों में हवा सिंह साल 1961 और 1972 के बीच लगातार 11 राष्ट्रीय पदक जीत कर सुर्खियों में आ गए थे।

हवा सिंह का जन्म 16 दिसंबर 1937 को हरियाणा के उमरवास में हुआ था। वह साल 1956 में सेना में शामिल हुए और अगले दशक में पूरे कॉन्टिनेंट में अपना बर्चस्व बनाए रखा।

हवा सिंह एशियन गेम्स में अपने खिताब को डेफेंड करने वाले एकमात्र भारतीय मुक्केबाज बने उन्होंने साल 1966 और 1970 में आयोजित हुए दो लगातार एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। रिटायर होने के बाद उन्होंने सबसे प्रभावशाली भिवानी बॉक्सिंग क्लब की स्थापना में अपनी भूमिका निभाई।

डिंग्को सिंह

डिंग्को सिंह भारत का नाम दुनिया भर में चर्चा में लाने वाले पहले मुक्केबाजों में से एक थे। उनका जन्म 1 जनवरी 1979 को मणिपुर के सेकटा में हुआ था।

फेमस बॉयज सेना के सदस्य डिंग्को सिंह ने साल 1997 में अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया और उसी वर्ष बैंकॉक में आयोजित किंग्स कप पर कब्जा किया।

एक साल बाद उन्होंने साल 1998 के एशियन गेम्स के 54 किग्रा भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। यह पदक 16 वर्षों के खेलों में भारत का पहला बॉक्सिंग पदक था। इस स्वर्ण पदक ने ही मैरी कॉम को बॉक्सिंग के लिए प्रेरित किया था।

डिंग्को सिंह ने सिडनी 2000 ओलंपिक में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया था। 10 जून 2021 को लीवर कैंसर के कारण उनका निधन हो गया।

मुक्केबाज पदक
मैरी कॉम ओलंपिक - कांस्य (लंदन 2012)
विश्व चैंपियनशिप - स्वर्ण (2002, 2005, 2006, 2008, 2010, 2018), रजत (2001), कांस्य (2019)
एशियन गेम्स - स्वर्ण (2014), कांस्य (2010)
एशियन चैंपियनशिप - स्वर्ण (2003, 2005, 2010, 2012, 2017), रजत (2008, 2021)
कॉमनवेल्थ गेम्स - स्वर्ण (2018)
विजेंदर सिंह ओलंपिक - कांस्य (2008)
विश्व चैंपियनशिप - कांस्य (2009)
कॉमनवेल्थ गेम्स - रजत (2006, 2014), कांस्य (2010)
एशियन गेम्स - स्वर्ण (2010), कांस्य (2006)
एशियन चैंपियनशिप - रजत (2007), कांस्य (2009)
लवलीना बोरगोहेन ओलंपिक - कांस्य (टोक्यो 2020)
विश्व चैंपियनशिप - कांस्य (2017, 2018)
एशियन चैंपियनशिप - कांस्य (2017, 2021)
अमित पंघल विश्व चैंपियनशिप - रजत (2019)
एशियन गेम्स - स्वर्ण (2018)
कॉमनवेल्थ गेम्स - रजत (2018)
एशियन चैंपियनशिप - Gold (2019), रजत (2021), कांस्य (2017)
पूजा रानी एशियन चैंपियनशिप - स्वर्ण (2019, 2021), रजत (2012), कांस्य (2015)
एशियन गेम्स - कांस्य (2014)
विकाश कृष्ण विश्व चैंपियनशिप - कांस्य (2011)
एशियन गेम्स - स्वर्ण (2010), कांस्य (2014, 2018)
एशियन चैंपियनशिप - रजत (2015), कांस्य (2017, 2021)
कॉमनवेल्थ गेम्स - स्वर्ण (2018)
लैशराम सरिता देवी विश्व चैंपियनशिप - स्वर्ण (2006), कांस्य (2005, 2008)
एशियन चैंपियनशिप - स्वर्ण (2003, 2005, 2008, 2010, 2012), रजत (2001), कांस्य (2017, 2019)
एशियन गेम्स - कांस्य (2014)
कॉमनवेल्थ गेम्स - रजत (2014)
शिवा थापा विश्व चैंपियनशिप - कांस्य (2015)
एशियन चैंपियनशिप - स्वर्ण (2013), रजत (2017, 2021), कांस्य (2015, 2019)
मनोज कुमार कॉमनवेल्थ गेम्स - स्वर्ण (2010), कांस्य (2018)
एशियन चैंपियनशिप - कांस्य (2007, 2013)
अखिल कुमार कॉमनवेल्थ गेम्स - स्वर्ण (2006)
एशियन चैंपियनशिप - कांस्य (2007)
लेखा केसी विश्व चैंपियनशिप - स्वर्ण (2006)
एशियन चैंपियनशिप - स्वर्ण (2005), रजत (2008)
हवा सिंह एशियन गेम्स - स्वर्ण (1966, 1970)
डिंग्को सिंह एशियन गेम्स - स्वर्ण (1998)

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