तीन साल बाद बजरंग पूनिया अपने रेसलिंग कोच शाको बेंटिनिडिस से होंगे अलग

साल 2018 के बाद से, जॉर्जियाई कोच शाको बेंटिनिडिस ने बजरंग पूनिया को विश्व चैंपियनशिप पदक और टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक सहित कई खिताब जीतने में मदद की।

लेखक सतीश त्रिपाठी
फोटो क्रेडिट Getty Images

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, टोक्यो ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता बजरंग पूनिया ने इंडिविज़ुअल रेसलिंग कोच एमजारियोस शाको बेंटिनिडिस के साथ अपने तीन साल के लंबे सफर को समाप्त करने का फैसला किया है।

बता दें कि बजरंग पूनिया का अपने जॉर्जियाई कोच से अलग होने का यह फैसला भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) का पेरिस 2024 को ध्यान में रखते हुए एक नए विदेशी कोच के साथ काम करने को लेकर लिया गया है। डब्ल्यूएफआई की शाको बेंटिनिडिस की जगह एक यूक्रेनी कोच के साथ उनकी बातचीत चल रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक महासंघ टोक्यो ओलंपिक के रजत पदक विजेता रवि कुमार दहिया के लिए भी एक नए कोच पर विचार कर रही है, जो रूसी कोच कमल मलिकोव के नेतृत्व में प्रशिक्षण ले रहा था।

तीन बार के ओलंपियन शाको बेंटिनिडिस ने 2018 में बजरंग पूनिया के साथ काम करना शुरू किया था। इस दौरान उन्होंने विश्व और एशियाई चैंपियनशिप में पदक जीतने वाले भारतीय पहलवान के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

दोनों का आखिरी बड़ा अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट टोक्यो 2020 था, जहां बजरंग पूनिया ने पुरुषों के 65 किग्रा फ्रीस्टाइल वर्ग में कांस्य पदक जीता था। 

बेंटिनिडिस अक्सर यह कहते थे कि बजरंग पूनिया के साथ उनका रिश्ता 'पिता और पुत्र' जैसा है। डब्ल्यूएफआई ने पूनिया के लिए अगले साल होने वाले अंतरराष्ट्रीय कैलेंडर को ध्यान में रखते हुए नए विदेशी कोच नियुक्त करने का फैसला किया है। इस दौरान कैलेंडर में राष्ट्रमंडल खेल, एशियाई खेल और विश्व कुश्ती चैंपियनशिप शामिल होंगे।

वहीं, लिगामेंट की चोट से उबर रहे बजरंग पूनिया टोक्यो ओलंपिक के बाद से प्रतिस्पर्धी कार्रवाई से बाहर हैं। फिलहाल भारतीय पहलवान अपनी ट्रेनिंग पर वापस आ गया है, लेकिन अगले साल तक प्रतिस्पर्धा करने की संभावना कम है।

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