मिल्खा सिंह

भारत IND

एथलेटिक्स

  • भाग लेना
    3
  • पहला प्रतिभागी
    मेलबर्न 1956
  • जन्म का साल
    1935
ओलंपिक रिजल्ट

बायोग्राफी

मिल्खा सिंह

दिवंगत मिल्खा सिंह, आजाद भारत के पहले स्पोर्टस स्टार, जिन्होंनेने अपनी गति और आगे बढ़ने के विश्वास के साथ करीब एक दशक से अधिक समय तक भारतीय ट्रैक एंड फील्ड पर राज किया। उन्होंने अपने जीवन में कई रिकॉर्डस बनाए और कई पदक हासिल किए।

मेलबर्न 1956 ओलंपिक हो या रोम 1960 ओलंपिक या फिर टोक्यो 1964 का ओलंपिक, मिल्खा सिंह ने हमेशा भारत का प्रतिनिधित्व किया। वे भारत के महानतम एथलीटों में से एक रहे हैं।

20 नवंबर 1929 को गोविंदपुरा ( जो कि अब पाक्सितान में है)  में एक सिख परिवार में जन्में मिल्खा सिंह का इस खेल से परिचय उसी वक्त हो गया था, जब वह विभाजन के वक्त भारत भाग आए थे और भारतीय सेना में शामिल हो गए।्

ये वह जगह थी जहां उन्होंने अपने दौड़ने की काबिलियत को और तेज किया। वहां उन्होने एक क्रॉस कंट्री रेस में हिस्सा लिया जहां उन्हें छठा स्थान मिला। जिसमें करीब 400 सैनिक भाग ले रहे थे। जिसके बाद उन्हें आगे की ट्रेनिंग के लिए चुना गया। जिसकी वजह से उनके करियर की पहली नींव पड़ी।

उनका पहला ओलंपिक मेलबर्न 1956 का था, जहां बिना किसी अनुभव के मिल्खा सिंह ने 200 मीटर और 400 मीटर हीट में हिस्सा लिया लेकिन कुछ खास नहीं कर पाए। लेकिन इस दौरान चैंपियन चार्ल्स जेनकिंस के साथ उनकी मुलाकात से उन्हें काफी प्रेरणा मिली।

दृढ़ निश्चय के साथ मिल्खा सिंह मेलबर्न से वापस आए, और उन्होने खुद को "चलती हुई मशीन" में बदल दिया।ं

इसके परिणामस्वरूप मिल्खा सिंह 1958 में स्वतंत्र भारत से राष्ट्रमंडल खेलों में पहला स्वर्ण पदक विजेता बन गए, वह एकमात्र भारतीय पुरुष थे, जिसने 56 साल तक व्यक्तिगत एथलेटिक्स राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीता था, इससे पहले कि 2014 में डिस्कस थ्रोअर विकास गौड़ा ने उनकी उपलब्धि को हासिल किया।

रोम 1960 के ओलंपिक के समय तक, मिल्खा सिंह को व्यापक रूप से 'द फ्लाइंग सिख' के रूप में जाना जाता था, और एक ओलंपिक पोडियम तक पहुंचने के लिए उन्हें दावेदार माना जाने लगा।्

400 मीटर में दौड़ते हुए, मिल्खा सिंह 200 मीटर के निशान तक आगे चल रहे थे, जब उन्होंने आराम करने का फैसला किया, और इस गलती ने दूसरों को उनसे आगे निकलने का मौका दे दिया। और रेस मे कई रिकॉर्ड टूटते दिखे। आखिरकर परिणाम घोषित करने के लिए एक फोटो फिनिश की जरूरत थी।

जहां संयुक्त राज्य अमेरिका के ओटिस डेविस ने जर्मनी के कार्ल कॉफमैन को एक सेकंड के सौवें हिस्से से रेस जीती थी, मिल्खा सिंह 45.73 के समय के साथ चौथे स्थान पर रहे थे - ये वो राष्ट्रीय रिकॉर्ड था, जो 40 वर्षों तक कायम था।

टोक्यो 1964 मिल्खा सिंह का आखिरी ओलंपिक था, उन्होंने संन्यास लेने से पहले 4x400 मीटर रिले में भारतीय टीम का नेतृत्व किया था।

सालों बाद, मिल्खा सिंह ने अपनी बेटी सोनिया सनवल्का की मदद से जुलाई 2013 में प्रकाशित अपनी आत्मकथा 'द रेस ऑफ माई लाइफ' में अपने अविश्वसनीय करियर की यादें साझा की।ा

जिसके बाद किताब को बाद में एक बायोपिक ''भाग मिल्खा भाग'' में बदल दिया गया, जिसे राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने निर्देशित किया था और अभिनेता फरहान अख्तर ने मिल्खा सिंह की भूमिका निभाई थी

तCOVID-19 महामारी के बाद जून 2021 में स्वास्थ्य बिगड़ने की वजह से महान स्प्रिंटर का निधन हो गया। लेकिन उनकी विरासत जीवित रहेगी और भविष्य के कई एथलीटों को प्रेरणा देगी।

ओलंपिक रिजल्ट

और
ओलंपिक रिजल्ट
परिणाम इवेंट खेल

टोक्यो 1964

#4 h1 r1/2
4 x 400 metres Relay
4 x 400 metres Relay Athletics
ओलंपिक रिजल्ट
परिणाम इवेंट खेल

रोम 1960

#4
400 metres
400 metres Athletics
ओलंपिक रिजल्ट
परिणाम इवेंट खेल

मेलबर्न 1956

#4 h2 r1/4
200 metres
200 metres Athletics
#4 h5 r1/4
400 metres
400 metres Athletics