विकास कृष्ण

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बॉक्सिंग

  • जन्म का साल
    1992

बायोग्राफी

विकास कृष्ण

भारतीय बॉक्सिंग के चमकते सितारों में से एक विकास कृष्ण यादव पिछले एक दशक में अपने देश के लिए लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वालों में से एक रहे हैं। विकास तीन बार के ओलंपियन और पूर्व विश्व चैंपियनशिप के कांस्य पदक विजेता है।

विकास कृष्ण यादव का ताल्लुक हरियाणा के हिसार से है, जहां के सिंगवा खास गांव में 10 फरवरी 1992 को उनका जन्म हुआ था। उनके पिता बिजली विभाग में सरकारी मुलाजिम थे, साल 1994 में उनके पिता का तबादला भिवानी जिले में हो गया, औऱ विकास अपने पिता के साथ भिवानी आ गए, जहां विकास की शुरूआती शिक्षा-दीक्षा हुई, और फिर यही से उनका बॉक्सर बनने का सपना जूनून में बदल गया।

सभी जानते है कि भिवानी को भारत का मिनी-क्यूबा कहा जाता है, क्योंकि यहां से निकले नए-नए बॉक्सर अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का मान बढ़ा चुके है, भिवानी को मुक्केबाजी विरासत और संस्कृति से मिली हुई है। विकास 10 साल की उम्र में ही भिवानी बॉक्सिंग क्लब में शामिल हो गए थे, और बाद में आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट में प्रशिक्षण के लिए पुणे चले गए।

29 साल के विकास कृष्ण साल 2010 से इंटरनेशनल बॉक्सिंग में धमाल मचा रहे हैं। उन्होंने बाकू में विश्व युवा चैंपियनशिप की लाइटवेट कैटगरी में स्वर्ण पदक और सिंगापुर में युवा ओलंपिक में उन्होंने कांस्य पदक जीता था।

ठीक उसी साल जब विकास की उम्र 18 साल थी, एक और खिताब उनका इंतजार कर रहा था, चीन के ग्वांगझू में खेले जा रहे 2010 एशियाई खेलों में उन्होंने स्वर्ण पदक जीता था, 60 किग्रा वर्ग में उनका यह पहला बड़ा सीनियर खिताब था।

इसके बाद बाकू में सीनियर विश्व चैंपियनशिप के वेल्टरवेट कैटेगरी में कांस्य पदक जीतने के बाद साल 2011 में हरियाणा के इस लड़के ने उभरते सितारे के रूप में अपनी स्थिति को मजबूत कर दिया।

विकास के लिए आगे काफी चुनौतियां थी, उनके सामने यूक्रेन के तारास शेलेस्ट्युक थे, जिन्होने आखिरी गोल्ड मेडल हासिल किया, वह भविष्य में 2012 लंदन ओलंपिक खेलो के कांस्य पदक विजेता रहे, इस बॉक्सर ने अंतरराष्ट्रीय बॉक्सिंग टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में भारतीय मुक्केबाज के आगे बढ़ने से रोक दिया था, हालाँकि, यह विकास कृष्ण को 2012 के लंदन ओलंपिक के लिए जगह दिलाने के लिए काफी था।

आपको बताना चाहेंगे कि विकास कृष्ण ने 5 अगस्त 2012 को 69 किग्रा में अपना ओलंपिक डेब्यू किया, और राउंड 16 में उन्होंने यूएसए के एरोल स्पेंस जूनियर का सामना किया। एक करीबी मुकाबले में विकास कृष्ण ने स्पेंस को 13-11 से चित्त कर दिया। हालांकि, अमेरिकी टीम ने रिजल्ट के खिलाफ अपील की और मैच अधिकारियों ने फाइट खत्म होने के पांच घंटे बाद स्पेंस के पक्ष में फैसला सुनाते हुए रिजल्ट 15-13 से उलट दिया।

लंदन ओलंपिक 2012 से बाहर होने के बाद विकास काफी टूट गए थे, इस दौरान विकास कृष्ण ने मुक्केबाजी से एक साल का ब्रेक लिया और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से अपनी शिक्षा पूरी करने के लिए अपना पूरा फोकस उसी तरफ लगा दिया।

शिक्षा पूरी करने के बाद विकास ने दक्षिण कोरिया के इंचियोन में 2014 एशियाई खेलों के मिडिलवेट कैटगरी (75 किग्रा) में कांस्य पदक हासिल किया और फिर से मुक्केबाजी में वापसी की। इस अर्जुन अवार्डी ने बैंकॉक में 2015 एशियाई चैंपियनशिप में रजत पदक के साथ अपनी जीत का सिलसिला जारी रखा।

जून 2016 में, उन्होंने बाकू में ओलंपिक क्वालीफायर में कांस्य जीतने के बाद 2016 रियो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया। रियो में विकास कृष्ण ने पहले दौर में अमेरिकी मुक्केबाज चार्ल्स कॉनवेल को पछाड़ दिया, और दूसरे दौर में तुर्की के ओंडर सिपाल को हराकर 75 किग्रा वर्ग के क्वार्टर फाइनल में अपनी जगह को पक्का किया।

यह भारतीय हालांकि, उज्बेकिस्तान के बेकटेमिर मेलिकुज़िएव से हार गए, रियो ओलंपिक में बेकटेमिर आखिरी रजत पदक विजेता थे।

रियो ओलंपिक में दिल टूटने के बाद, विकास कृष्ण ने ताशकंद 2017 एशियाई चैंपियनशिप में 75 किग्रा वर्ग में कांस्य पदक हासिल किया, और जीत की राह पर वापसी की, इसके बाद ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में 2018 राष्ट्रमंडल खेलों में उन्होंने स्वर्ण पदक जीता।

जैसे-जैसे विकास आगे बढ़ते रहे, यह भारतीय ओलंपिक को छोड़कर हर बड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक जीतकर अपनी झोली में डालता रहा। हालांकि, विकास कृष्ण के तीसरे ओलंपिक में खेलने पर मुहर लग चुकी है, वह 69 किग्रा वर्ग (वेल्टरवेट) में प्रतिस्पर्धा करेंगे। विकास ने मार्च 2020 में अम्मान के जॉर्डन में महाद्वीपीय क्वालीफायर में अपना टोक्यो ओलंपिक टिकट बुक किया था, वह विजेंदर सिंह के बाद तीन ग्रीष्मकालीन खेलों के लिए क्वालीफाई करने वाले केवल दूसरे भारतीय मुक्केबाज बन गए है।

उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए एक साक्षात्कार में बताया कि “मेरा लक्ष्य देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना है। मैं दुनिया को दिखाने जा रहा हूं कि कैसे बॉक्सिंग एक कला है और कैसे मैं लोगों को पंच मिस करने के लिए मजबूर करने जा रहा हूं और फिर उन्हें वापस मारूंगा”

2021 दुबई में आयोजित हुई एशियाई चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतने के बाद विकास कृष्ण अच्छे फॉर्म के साथ टोक्यो 2020 में जाएंगे।

हालांकि, बॉक्सर अमित पंघल और मैरी कॉम को टोक्यो में भारत की तरफ से पदक की उम्मीद के तौर पर देखा जा रहा है, वैसे विकास कृष्ण अपने अनुभव के धन के साथ बहुत पीछे नहीं रहेंगे।

साल 2020 के मार्च में अम्मान, जॉर्डन में महाद्वीपीय क्वालीफायर में 69 किग्रा वर्ग (वेल्टरवेट) में अपना टोक्यो 2020 बर्थ बुक करने पर विकास कृष्ण को तीसरी बार ओलंपिक में हिस्सा लेने का मौका मिला। इस प्रकार विकास तीन समर गेम्स के लिए क्वालीफाई करने वाले विजेंदर सिंह के बाद केवल दूसरे भारतीय मुक्केबाज बने। *

दुबई में 2021 एशियन चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतने के बाद, विकास कृष्ण अच्छे फॉर्म में टोक्यो 2020 में गए थे। लेकिन ओलंपिक के पहले राउंड में वह लोकल फेवरेट क्विंसी ओकाज़ावा से सर्वसम्मत निर्णय से हार गए। उनका ओलंपिक सफर खत्म होने के बाद में पता चला कि विकास टोक्यो में एक चोटिल कंधे के साथ रिंग में उतरे थे और इस दौरान उन्होंने तैयारी शिविर में भी हिस्सा लिया। जब वह भारत लौटे तो उन्होंने कंधे का ऑपरेशन करवाया।

बॉक्सिंग रिंग के बाहर विकास कृष्ण हरियाणा पुलिस में डीएसपी (डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस) के पद पर तैनात हैं।

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