कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 एथलेटिक्स: लॉन्ग जंप में मुरली श्रीशंकर ने जीता ऐतिहासिक रजत पदक

यह कॉमनवेल्थ गेम्स में पुरुषों की लॉन्ग जंप में भारत का पहला रजत पदक था। इससे पहले सुरेश बाबू ने एडमोंटन 1978 में कांस्य पदक जीता था।

लेखक सतीश त्रिपाठी
फोटो क्रेडिट Getty Images

भारत के मुरली श्रीशंकर ने गुरुवार को ब्रिटेन के बर्मिंघम में हो रहे राष्ट्रमंडल खेल 2022 में पुरुषों की लॉन्ग जंप में रजत पदक जीता।

8.36 मीटर का राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाने वाले 23 वर्षीय मुरली श्रीशंकर ने भारत के लिए पदक जीतने के लिए अलेक्जेंडर स्टेडियम में अपने छह प्रयासों में 8.08 मीटर की सर्वश्रेष्ठ जंप लगाई।

बहामास के स्वर्ण पदक विजेता लकान नायरन ने भी उतनी ही दूरी तय की, लेकिन पोडियम पर शीर्ष स्थान पर कब्जा किया। क्योंकि उनकी 7.98 मीटर की दूसरी सर्वश्रेष्ठ जंप श्रीशंकर की 7.84 मीटर से अधिक थी। दक्षिण अफ्रीका के जोवन वैन वुरेन ने 8.06 मीटर के साथ कांस्य पदक जीता।

इसी के साथ श्रीशंकर मुरली कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में लॉन्ग जंप इवेंट में भारत के लिए सिल्वर मेडल जीतने वाले भारत के पहले पुरुष एथलीट बन गए हैं। इससे पहले अंजू बॉबी जॉर्ज और प्रज्यूषा मलाइखल वह महिला एथलीट हैं जो पदक जीत चुकी हैं। 

अंजू बॉबी ने 2002 कॉमनवेल्थ गेम्स में लॉन्ग जंप में ब्रॉन्ज जबकि प्रज्यूषा ने 2010 कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल जीता था। वहीं, पुरुषों में सुरेश बाबू ने 1978 कॉमनवेल्थ गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। यह लॉन्ग जंप में भारत के लिए प्रज्यूषा के बाद दूसरा सिल्वर मेडल है। 

इसके अलावा 400 मीटर राष्ट्रीय रिकॉर्ड धारक मोहम्मद अनस याहिया के छोटे भाई मोहम्मद अनीस याहिया 7.97 मीटर की जंप के साथ पांचवें स्थान पर रहे।

क्वालीफायर में 8.05 मीटर की जंप के साथ शीर्ष पर रहने वाले स्वर्ण पदक के पसंदीदा जंपर के रूप में अपनी पहचान बनाई। फाइनल में अपनी जगह बनाने के बाद मुरली श्रीशंकर ने खुद को साबित करने के लिए काफी संघर्ष किया। वह अपने पहले ही प्रयास में 7.60 मीटर जंप करने में कामयाब रहे।

टोक्यो ओलंपियन ने दूसरे और तीसरे प्रयास में 7.84 मीटर की दूरी तय की और शुरुआती तीन राउंड के बाद उन्हें छठे स्थान पर रखा गया। इसके बाद आखिरी चार जंपर बाहर हो गए। शेष आठ जंपर को तालिका में अपना स्थान हासिल करने के लिए तीन अतिरिक्त प्रयास मिले।

मोहम्मद अनीस याहिया भी कट-ऑफ राउंड के बाद 7.72 मीटर की जंप लगाकर शीर्ष आठ में पहुंचने में सफल रहे। यह उनका तीसरा प्रयास था।

इस जंप से मुरली श्रीशंकर को ऐसा लगा कि यह उन्हें चौथे प्रयास के साथ तालिका के शीर्ष स्थान पर ले जाएगी। लेकिन दुर्भाग्यवश भारतीय जंपर की इस जंप को खारिज कर दिया गया। क्योंकि उन्होंने टेक-ऑफ बोर्ड से एक सेमी आगे कदम रख दिया था।

मुरली श्रीशंकर अपनी पांचवीं जंप के लिए वापस आए और 8.08 मीटर का प्रयास किया। यह जंप लकान नायरन की जंप के समान थी।

लीडरबोर्ड पर उनके स्थान का फैसला करने के लिए उनके दूसरे सर्वश्रेष्ठ प्रयासों का आकंलन किया गया। भारतीय जंपर का आखिरी प्रयास फाउल था और उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा।

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