जानिए आकाश आराध्य ने कैसे कोलकाता के एक एम्यूजमेंट पार्क से आइस स्केटिंग का सफर तय किया

भारतीय शॉर्ट ट्रैक आइस स्केटर आकाश आराध्य 2017 एशियन विंटर गेम्स में भारत के लिए ध्वजवाहक भी रहे थे।

लेखक रौशन कुमार
फोटो क्रेडिट Getty Images

विंटर गेम्स को लेकर भारत में खास उत्साह देखने को नहीं मिल रहा है, लेकिन पिछले एक दशक से चीजें धीरे-धीरे बदल रही हैं।

भारत में कुछ खिलाड़ियों ने विंटर गेम्स में दलचस्पी दिखाई है और इसे पेशेवर तौर पर खेलने का इरादा बनाया। वहीं, शॉर्ट ट्रैक आइस स्केटर आकाश आराध्य उनमें से एक हैं।  

कर्नाटक के मैसूर में जन्मे आकाश ने अपने करियर की शुरुआत एक रोलर-स्केटर के रुप में किया था, लेकिन बाद में उन्होंने आइस स्केटिंग की ओर अपना रुख किया। उनकी यह यात्रा काफी दिलचस्प रही है।

आकाश ने Olympics.com से बात करते हुए कहा, “मेरे माता-पिता चाहते थे कि मैं किसी भी खेल को हॉबी के तौर पर खेलूं।”

उन्होंने आगे कहा, “जब मैं तीन वर्ष का था, हम लोग एक स्केटिंग रिंक को पार कर रहे थे तब मैंने कई बच्चों को स्केटिंग गियर पहने देखा, जिससे मैं काफी उत्साहित हो गया। यह बात साल 1995-96 की है और तब रोलर स्केटिंग नई चीज थी। तब से यह शुरु हुआ।”

आकाश के लिए यह खेल एक हॉबी के रुप में शुरु हुआ, लेकिन माता-पिता के सहयोग से उनकी दिलचस्पी बढ़ती गई और पेशेवर रूप से उनका पसंदीदा खेल बन  गया। आकाश ने कहा, “मेरा पहला लक्ष्य था राष्ट्रीय स्तर पर खेलने का और मेडल जीतने का।” इसके बाद आकाश का लक्ष्य बढ़ता गया और वह लगातार आगे बढ़ते रहे।

आकाश ने आगे कहा, “मैनें सोचा कि कम से कम एक बार भारत का प्रतिनिधित्व करूं, लेकिन मैनें जितनी बार इस खेल को खेला, मेरे लिए इस खेल को लेकर नज़रिया बिल्कुल साफ हो गया कि मुझे इस खेल में क्या हासिल करना है।”

बदलाव का समय

मैसूर स्केटर को रोलर स्केटिंग में उनकी उपलब्धियों के लिए कर्नाटक सरकार ने एकलव्य पुरस्कार से सम्मानित किया।

हालांकि, आकाश को साल 2006 में कोलकाता की एक एम्यूजमेंट पार्क की यात्रा ने उन्हें नया रास्ता दिखा दिया।

आकाश ने कहा, “उस जगह का नाम क्लाउन टाउन था, जहां एक छोटा आइस स्केटिंग रिंक था, तब मेरे पास आइस स्केटिंग के लिए ढंग की स्केटिंग ब्लेड भी नहीं थी। लेकिन, हमने जुगाड़ लगाई और मैं रिंक के अंदर चला गया। वह थोड़ा अजीब लगा।”

“तब मैं कुछ खास इनलाइन स्केटर नहीं था और मैं पूरी तरह से अपने खेल में अच्छा नही था लेकिन इस खेल को खेलने में मैनें दिलचस्पी दिखाई। एक बार जब आप आइस पर कदम रखते हैं तो आप फिसलने की उम्मीद करते हैं, लेकिन एक बार जब आप वास्तव में फिसलते हैं तो एक अलग अनुभव होता है। तब आप अलग ढंग से चलना शुरू करते हैं और ऐसा लगता है कि आप वहां तैर रहे हैं। मैंने इसके कुछ ही समय बाद कोलकाता में आइस स्केटिंग में राष्ट्रीय स्तर पर ब्रॉन्ज मेडल जीता।”

एक अलग भावना के साथ, आकाश ने पूरे समय के लिए आइस स्केटिंग को अपना पेशा बना लिया और उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय स्केटिंग संघ (ISU), विश्व चैंपियनशिप और विश्व कप जैसे टूर्नामेंट में भारत का प्रतिनिधित्व किया।

भारत के लिए ध्वजवाहक

भारत में उचित प्रशिक्षण की कमी के कारण आकाश को देश के बाहर जाना पड़ा। वह अभ्यास के लिए कनाडा और जर्मनी गए और हाल में फ्रांस में फ्रेंच राष्ट्रीय टीम के साथ थे।

जापान में 2017 एशियन विंटर गेम्स में भारत का ध्वजवाहक होना आकाश के करियर का सर्वश्रेष्ठ पल रहा।

आकाश ने बात करते हुए आगे कहा, “एशियन गेम्स से कुछ महीने पहले मैं गंभीर रूप से बीमार पड़ गया था और मुझे घर लौटना पड़ा। मुझे अस्पताल में भर्ती होना पड़ा और ठीक होने में थोड़ा समय लगा। अपने प्रशिक्षण को फिर से शुरू करने के लिए कनाडा लौटने के बाद, मैं संघर्ष कर रहा था और तब एशियन गेम्स की तैयारी के लिए ज्यादा समय नहीं बचा था।”

"मुझे पता था कि मैं 2018 में विंटर ओलंपिक के लिए क्वालीफाई नहीं कर सकता था, लेकिन मैं वास्तव में एशियन गेम्स में भाग लेना चाहता था। मैंने धीरे-धीरे वापसी की। फिर अचानक, मुझे अपने फेडरेशन से एक ईमेल मिला, जिसमें कहा गया था कि हम आपको भारत का ध्वजवाहक बनाने जा रहे हैं। मुझे विश्वास ही नहीं हुआ। मुझे लगता है कि मैंने एक ही ईमेल को पांच बार पढ़ा था।”

“फिर वह दिन आया, जब मैंने अपने देश का झंडा अपने हाथ में लिया। वह पल मेरे लिए बहुत खास था। मैं बहुत नर्वस भी था, पूरा स्टेडियम दर्शकों से खचा खच भरा हुआ था और मैं देश के झंडे के साथ आगे बढ़ा और मेरे पीछे पूरी टीम थी मेरे करियर का वह सबसे खास लम्हा था।”

ध्वजवाहक समारोह के बाद हम शपथ ग्रहण समारोह की ओर बढ़े। मैं बीच में खड़ा था और मुझे यह अहसास हुआ कि वहां गोल्ड मेडल जीतने वालों की भरमार है और फिर मैंने अपने आपको कहा कि मैं जिस भी दौर से गुज़रा, चाहे वह कितना भी कठिन क्यों न रहा हो, अंत में यह एक अलग अनुभव है।”

आकाश की लंबे समय से चली आ रही एक और महत्वाकांक्षा शीतकालीन ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करने की थी। जबकि वह बीमार होने के चलते 2018 में प्योंगचांग खेलों में हिस्सा नहीं ले पाए थे, 2019 में रीढ़ की चोट और कोविड-19 महामारी, बीजिंग 2022 संस्करण में उनकी दावेदारी पेश करने में बधा बन गई।

क्या आकाश आराध्य संन्यास लेने कि सोच रहे हैं?

हालांकि 28 वर्षीय स्केटर ने यह संकेत दे दिया है कि अब वो ओलंपिक का हिस्सा नहीं होंगे। 

“मैं कभी नहीं कहूंगा कि कुछ भी असंभव  है क्योंकि 34-35 साल की उम्र में एथलीट ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीत रहे हैं। लेकिन मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से बहुत सी चीजें हैं जिन पर मुझे ध्यान देने की आवश्यकता है क्योंकि मैं अपने परिवार से बहुत लंबे समय से दूर हूं।”

आकाश ने कहा, "मैं माता पिता के साथ समय बिताना चाहता हूं, पिछले साढ़े पांच-छह वर्षों में मैं बहुत सी चीजों से दूर रहा हूं जिसे अब मैं करना चाहता हूं। मैं अपने परिवार के साथ पिछले दस वर्ष में सिर्फ तीन जन्मदिन और दिवाली मनाई है।”

हालांकि, आकाश को भरोसा है कि भारत के पास मशाल को आगे ले जाने के लिए बहुत प्रतिभा है, भले ही वह अगले ओलंपिक के लिए वापस न आए। 

उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि भारतीय खिलाड़ी चमत्कार कर सकते हैं। मेरा विश्वास कीजिए, भारत में हमारे पास प्रतिभा की कमी नहीं है। बेशक, इन सभी चीजों में पैसा एक बड़ी भूमिका निभाती है। लेकिन अगर आप सामने आते हैं, अगर आप लोगों से बात करते हैं, अगर आप प्रयास करते हैं, तो मुझे लगता है कि आप कुछ भी कर सकते हैं। ”

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