आक्रामक, अद्भुत और आखिरकार!! 41 साल बाद भारत को मिला ओलंपिक हॉकी पदक

TOKYO, JAPAN - AUGUST 05: Simranjeet Singh of Team India celebrates scoring their fifth goal with teammates during the Men's Bronze medal match between Germany and India on day thirteen of the Tokyo 2020 Olympic Games at Oi Hockey Stadium on August 05, 2021 in Tokyo, Japan. (Photo by Alexander Hassenstein/Getty Images)
TOKYO, JAPAN - AUGUST 05: Simranjeet Singh of Team India celebrates scoring their fifth goal with teammates during the Men's Bronze medal match between Germany and India on day thirteen of the Tokyo 2020 Olympic Games at Oi Hockey Stadium on August 05, 2021 in Tokyo, Japan. (Photo by Alexander Hassenstein/Getty Images)

साल 1980 मास्को खेलों के बाद भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने जीता पहला पदक, कांस्य मुकाबले में जर्मनी को 5-4 से हराया। 

टोक्यो 2020 ओलंपिक खेलों में भारतीय हॉकी टीम ने वह कर दिखाया जो पिछले चार दशकों में नहीं हुआ था। भारत ने जर्मनी को कांस्य मुकाबले में एक अद्भुत वापसी करते हुए पराजित किया और 41 साल बाद पदक अपने नाम किया। एक बेहद मुश्किल मैच में उन्होंने 3-1 से पिछड़ने के बाद ऐसी वापसी की है जो आने वाले कई सालों तक याद रखी जाएगी।

सेमिफाइनल में विश्व चैंपियन बेल्जियम से हारने के बाद भारतीय टीम के पास पदक जीतने का अवसर था लेकिन जर्मनी की टीम उनके रूप में एक बहुत बड़ी चुनौती थी।

भारत ने इस मुकाबले में भी एक आक्रामक टीम उतारी जिसमे Mandeep Singh, Hardik Singh, Manpreet Singh और Shamsher Singh ने आक्रामक पंक्ति का नेतृत्व किया।

पहले क्वार्टर में भारत के ऊपर जर्मनी ने बहुत दबाव बनाया और मैच के दुसरे मिनट में ही जर्मनी को Timur Oruz ने बढ़त दिलाते हुए स्कोर 1-0 कर दिया। उसके बाद भारत ने जब आक्रामक रुख अपनाया तो जर्मनी ने काउंटर अटैक अथवा लम्बे पास की सहायता से अपनी बढ़त को दुगना करने का प्रयास किया लेकिन गोल में चट्टान की तरह खड़े Sreejesh ने कई मुख्य बचाव किये और स्कोर को 2-0 होने से रोक लिया।

दुसरे क्वार्टर की शुरुआत में भारत के कोच Graham Reid ने अपनी टीम से थोड़ा अधिक आक्रामक रुख अपनाने को कहा और इसका लाभ तब हुआ जब 17वें मिनट में Simranjeet Singh ने एक शानदार गोल दाग कर मैच को बराबर कर दिया।

स्कोर बराबर होने के बाद दोनों टीमें निरंतर आक्रामक खेल दिखाने का प्रयास कर रही थी और जर्मनी के Ruhr को संभालना भारत के लिए कठिन होता जा रहा था। भारत की रक्षा पंक्ति जर्मनी के मिडफील्डरों को रोकने में असमर्थ दिखी और मैच के 25वें मिनट में Niklas Wellen ने जर्मनी के लिए शानदार गोल मारते हुए 2-1 कर दिया।

भारत की मुश्किलें तब बढ़ी जब Benedikt Furk ने एक और गोल दाग का 3-1 से जर्मनी को आगे कर दिया। पेनल्टी कार्नर इन ओलंपिक खेलों में भारत की मज़बूती रहा है और अगले कुछ मिनटों में इसी कारण से भारत ने अपना आक्रमण जारी रखा और Hardik अथवा Harmanpreet ने तीन मिनट में दो गोल दाग कर मैच 3-3 से बराबर कर दिया।

पहले हाफ में छह गोल पड़ने के बाद दोनों टीमों ने अपना रुख थोड़ा बदला और जर्मनी ने बॉल अपने पास रखने का ज़्यादा प्रयास किया। तीसरे क्वार्टर के पहले ही मिनट में जर्मनी ने डी में Mandeep को गिराया और भारत को पेनल्टी स्ट्रोक मिल गया। भारत के Rupinder Pal Singh ने कोई गलती नहीं की और एक अद्भुत उलटफेर के बाद भारत 4-3 से आगे हो गया।

बढ़त लेने के बाद भारतीय खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ गया और उन्होंने प्रहार जारी रखे जिसका परिणाम यह हुआ की भारत ने Simranjeet की सहायता से पांचवा गोल दाग कर 5-3 से बढ़त ले ली।

स्टेडियम में न केवल तापमान ज़्यादा था लेकिन मैच के करीबी होने के कारण दोनों टीमों के बीच गरमा गर्मी बढ़ रही थी। जर्मनी ने चौथे क्वार्टर में Windfeder की सहायता से भारत की बढ़त को एक गोल कर दिया।

भारत और पदक के बीच केवल चार मिनट थे और Graham Reid की टीम ने इसे अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण चार मिनट समझ कर खेला और अंत में मुकाबला 5-4 से जीत लिया।