कैनु/कयाक फ्लैटवाटर
  • ओलंपिक डेब्यू
    बर्लिन 1936
  • सर्वाधिक स्वर्ण पदक
    Birgit Fischer-Schmidt (GER)
और अधिक जानकारी

कैनु/कयाक फ्लैटवाटर स्पॉटलाइट

Olympic Channel

पिछले इवेंट्स को खोजिए और उनका आनंद लीजिए, ओलंपिक चैनल पर कैनु/कयाक फ्लैटवाटर से जुड़े ओरिजिनल फिल्म और सीरीज देखिए

हिस्ट्री ऑफ

कैनु/कयाक फ्लैटवाटर

कनोई स्प्रिंट में दो तरफ की क्राफ्ट का इस्तेमाल किया जाता है: कायक और केनोई। कायक का ग्रीनलैंड की जनता से प्रेरित हो कर बनाया गया है और कहां जाता है कि शिकार, फिशिंग और परिवहन के लिए इस्तेमाल में लाया जाता था। इतना ही नहीं बल्कि केनोई का इस्तेमाल पूरी दुनिया ही परिवहन, ट्रेड और युद्ध के लिए करती थी। इन दोनों को ही पहली बार 19वीं सदी के मध्यम में खेल में तब्दील किया गया। कनोई स्प्रिंट शुरुआत से ही एक परंपरागत रेस के तौर पर रही है।

इतिहास और जन्म

एस्किमो में“कायक” शब्द का मतलब है “मैन बोट”। इसे सबसे पहले नॉर्थ अमरीका, ग्रीनलैंड और सर्बिया ने परिवहन और फिशिंग के लिए अपनाया था। वहीं केनोई का प्रयोग बड़े स्तर पर होने लगा। नेटिव अमरीकी ट्राइब से लेकर पोलीनेशियंस भी केनोई का इस्तेमाल इसी काम के लिए किया करते थे। केनोई स्प्रिंट आसान है, जो पहले रेस ख़त्म करता है वह जीत जाता है।

केनोई/कायक का अंतर

केनोई की बनावट अलग-अलग होती है यह उसके कार्य पर निर्भर करता है। इसकी बनावट में यह भी अहम होता है कि इसे बनाया कौन से राज्य में जा रहा है। वहीं कायक को इस तरीके से बनाया जाता है कि उसमे बर्फ का पानी न घुस सके। इन्हें जानवरों की खाल और लकड़ी से बनाया जाता है और ज़्यादातर इसमें एक समय पर एक ही आदमी सवार होता है। कायक एक बंद बोट की तरह होती है जिसमें एथलीट बैठ कर पैडल मारता है। वहीं केनोई ऊपर से खिली हुई होती है और इसमें सिंगल ब्लेड पैडल लगते हैं।