डेविस कप हार के बाद भारत के कप्तान रोहित राजपाल ने कहा, 'युवा खिलाड़ी पर्याप्त जोर नहीं लगा रहे' 

भारत शनिवार को डेविस कप वर्ल्ड ग्रुप I के मुकाबले में फिनलैंड से 1-3 से हार गया।  

लेखक दिनेश चंद शर्मा
फोटो क्रेडिट Getty Images

डेविस कप वर्ल्ड ग्रुप I के मुकाबले में शनिवार को फिनलैंड के खिलाफ भारत की 1-3 की हार ने देश में टेनिस की स्थिति को बयां कर दिया है। दिन की शुरुआत 0-2 से करने के बाद रोहन बोपन्ना (Rohan Bopanna) और रामकुमार रामनाथन (Ramkumar Ramanathan) की भारतीय जोड़ी हेनरी कोंटिनेन (Henri Kontinen) और हैरी हेलियोवारा (Harri Heliovaara) से 6-7 (2), 6-7 (2) से हार का सामना करना पड़ा। 

प्रजनेश गुणेश्वरन (Prajnesh Gunneswaran) ने भारतीय टीम के लिए इकलौती जीत दर्ज की। उन्होंने चौथे मैच में पैट्रिक निकलास-सालमिनेन (Patrik Niklas-Salminen) को 6-3, 7-5 से हराया। 

यह देखते हुए कि भारत घर से दूर खेल रहा था, ऐसी परिस्थितियों में जो उनके लिए पूरी तरह से अनुकूल नहीं थी, लिहाजा यह एक कठिन टाई था। लेकिन, फिनलैंड के खिलाफ एक भी लाइव सेट जीतने में टीम की अक्षमता चिंता का कारण है। 

भारत के गैर खिलाड़ी कप्तान रोहित राजपाल (Rohit Rajpal) ने कहा, “हमें ड्रॉइंग बोर्ड में वापस जाना होगा। मैं रोहन (41 वर्षीय) से बात कर रहा था। वह बता रहे थे कि युवा खिलाड़ी आगे बढ़ने के लिए जोर नहीं लगा रहे हैं। हमें आगे ऐसे युवाओं का बड़ा समूह तलाशने की जरूरत है, जो उनके पीछे हैं, उन्हें फिर से इकट्ठा करना है और वापस आना है। हमें बेहतर खिलाड़ी, बेहतर रणनीति की जरूरत है।" 

कुछ खिलाड़ियों के उपलब्ध नहीं होने से कप्तान के कार्य में कोई मदद नहीं मिली। युकी भांबरी (Yuki Bhambri) घुटने की सर्जरी के बाद फिर से बाहर हो गए और सुमित नागल (Sumit Nagal) चोट की चिंताओं के कारण टाई से बाहर हो गए।

भले ही भारत ने पारंपरिक रूप से युगल में अच्छा प्रदर्शन किया हो, लेकिन डेविस कप में उसने केवल एक अंक हासिल किया है। इसके बाद टीमों को चार एकल मैचों में से कम से कम दो में जीत हासिल करने की जरूरत है। लेकिन, भारतीय खिलाड़ियों में से कोई भी विजय अमृतराज (Vijay Amritraj), कृष्णन (रामनाथन और रमेश) या लिएंडर पेस जैसे नामों की विरासत को आगे बढ़ाने में सक्षम नहीं है और प्रीमियर पुरुष टीम प्रतियोगिता उनकी पहुंच से बाहर है। 

भारत के नंबर 1 युगल खिलाड़ी बोपन्ना ने कहा, "छह साल हो गए हैं, जहां एक भारतीय ने डेविस कप में अपने से ऊपर की रैंक के खिलाड़ी को हराया है (सोमदेव देववर्मन ने 2015 में चेक गणराज्य के जिरी वेस्ली को हराया था)। हमें वह बदलाव करने की जरूरत है। हमें भारत में एक अच्छा ढांचा बनाने की जरूरत है।" 

मेहमान भारतीय टीम की शुरुआत सबसे खराब रही। क्योंकि, उनके नंबर एक खिलाड़ी गुणेश्वरन को दुनिया के 419वें नंबर के खिलाड़ी ओटो वर्तानेन (Otto Virtanen) से 3-6, 6-7 (1) से हार का सामना करना पड़ा। 20 वर्षीय वर्तानेन अपना दूसरा कप टाई खेल रहे थे। जबकि भारत फ़िनलैंड के नंबर 1 और दुनिया में 74वें स्थान पर काबिज एमिल रुसुवुओरी (Emil Ruusuvuori) को लक्ष्य मान कर चल रहा था, जिसे हराना बहुत मुश्किल होता था। रुसुवुओरी ने शुक्रवार को दूसरे एकल में रामकुमार को 6-4, 7-5 से हराकर मेजबान टीम को 2-0 से बढ़त दिलाई। 

राजपाल ने कहा, “हमने पहले मैच में लय गंवा दी।” 

"हम उम्मीद कर रहे थे कि पहले एक जीत हासिल करें और इसे आगे बढ़ाया जाए। अगर हम इसे जीत लेते, तो एक अलग परिदृश्य होता, लेकिन इसने हमें पीछे कर दिया। हमें उम्मीद नहीं थी कि ओटो इस तरह खेलेंगे। उनके दोनों खिलाड़ियों ने शानदार टेनिस खेला और जीत के हकदार थे। पहले मैच के दूसरे में हमारे पास मौके थे। अगर मुझे मौका मिलता, तो मैं पहले मैच में राम के साथ खेलता, वह ओटो को परेशान करता।" 

भारत ने शनिवार को युगल विशेषज्ञ दिविज शरण के बजाय रामकुमार को युगल रबर के लिए बोपन्ना के साथ खेलने उतारा। 

"पहले दो मैचों के बाद कोर्ट सर्विस के लिए ज्यादा कुछ नहीं कर रहा था। गेंद इन कोर्टों पर तभी चलती है, जब आप फ्लैट मारते हैं। हमने सोचा था कि राम के पास दिविज की तुलना में एक फ्लैट सर्विस है। इन कोर्ट पर स्पिन थोड़ी-थोड़ी उठती है। हमने सोचा कि कोर्ट पर अच्छा परिणाम हासिल करने के लिए एक बड़ी और फ्लैट सर्विस होना बेहतर होगा।” 

हालांकि, रणनीति में बदलाव से टीम की किस्मत में कोई बदलाव नहीं आया।

बोपन्ना ने कहा, "0-2 से पीछे होने से फर्क पड़ा। हम यह सोचकर खेल रहे हैं कि हमें इसे जीतना है। अगर, हम टाई में बने रहना चाहते हैं, तो कोई दूसरा विकल्प नहीं है। यह पहली बार है, जब राम मेरे साथ कप टाई खेल रहे थे। वह बहुत अच्छा खेले। हमारे पास पहले सेट में मौके थे, दूसरे सेट में सफलता का मौका था। टाईब्रेक में उनकी बेहतर टीम थी।” 

पिछले साल डेविस कप प्रारूप में बदलाव किया गया था और प्रतियोगिता क्षेत्रीय समूह से दूर हो गई थी। टीम को अब अपने ही ग्रुप में दुनिया में किसी के भी खिलाफ खेलने के लिए तैयार किया जा सकता है। भारत अब तक एशिया ओशिनिया ग्रुप I पर हावी था और पिछले सात वर्षों से वर्ल्ड ग्रुप प्लेऑफ़ में खेला था। 

लेकिन डेविस कप फ़ाइनल के लिए उनका रास्ता कठिन हो गया, क्योंकि अब उनके ग्रुप I में अधिक प्रतिस्पर्धी टीमों से भिड़ने की अधिक संभावना है और किसी भी तरह का प्रभाव डालने के लिए उन्हें अपने खेल में सुधार करना होगा। भारतीय टीम अब अस्तित्व के लिए संघर्ष करेगी। क्योंकि, वे अगले साल ग्रुप 1 प्लेऑफ में प्रतिस्पर्धा करेंगी।

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