ओलंपियन अरविंद सिंह सिंगल स्कल्स में प्रतिस्पर्धा करने के लिए क्यों हुए मजबूर ?

25 वर्षीय ने रविवार को पटाया में एशियाई रोइंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। 

लेखक दिनेश चंद शर्मा
फोटो क्रेडिट SAI Media/Twitter

सिंगल स्कल्स में अपने पहले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में भारत के *अरविंद सिंह (Arvind Singh) *ने स्वर्ण पदक जीता। ओलंपियन ने रविवार को थाईलैंड के पटाया में *एशियाई रोइंग चैंपियनशिप (Asian Rowing Championships) *में लाइटवेट पुरुष एकल स्कल्स में स्वर्ण पदक जीतने के लिए 7.55.942 मिनट का समय लिया।

हालांकि, 25 वर्षीय की हाल ही की सफलता में विकल्पों की कमी की भी भूमिका थी।

सिंह ने अर्जुन लाल जाट (Arjun Lal Jat) *के साथ *टोक्यो 2020 में लाइटवेट पुरुष युगल स्कल्स में भाग लेकर अपना ओलंपिक पदार्पण किया था। लेकिन, जब ओलंपिक के बाद लगभग 45 दिनों के ब्रेक के बाद रोवर्स राष्ट्रीय शिविर में वापस आए, तो उनके साथी ने थोड़ा सा वजन बढ़ा लिया था।  

न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने सिंह के हवाले से कहा, "डबल स्कल्स के लिए, हम दोनों का वजन लगभग 70 किलो होना चाहिए, लेकिन अर्जुन ने ब्रेक के दौरान वजन बढ़ा लिया।"

"मैं सिंगल स्कल्स में भी हाथ आजमाना चाहता था। इसलिए, मैंने इसे एक चुनौती के रूप में लिया और पुणे में कड़ी मेहनत की।"

2016 में ही इस खेल को अपनाने वाले उत्तरप्रदेश के बुलंदशहर निवासी रोवर ने महाद्वीपीय इवेंट की तैयारी के लिए पुणे में अपने ट्रेनिंग बेस आर्मी रोइंग नोड में प्रशिक्षण लिया। रेयॉन्ग में रॉयल थाई नेवी रोइंग सेंटर में अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वियों से काफी आगे जाकर फिनिश लाइन पार करने के साथ ही यह प्रयास रंग ला रहा था। उज्बेकिस्तान के सोबिरजोन सफारोलीयेव (Sobirjon Safaroliyev) ने 7.58.397 मिनट के समय के साथ रजत पदक जीता, जबकि चीन के वीचुन चेन (Weichun Chen) ने 8.10.043 मिनट के समय के साथ कांस्य पदक जीता।

सिंह ने कहा, "परिस्थिति हवादार थी, इसलिए मैंने सामान्य से अधिक समय लिया। लेकिन, अंत में मैं स्वर्ण पदक जीतने में सफल रहा।"

यह एशियाई रोइंग चैंपियनशिप में भारत के लिए सबसे सफल संस्करणों में से एक था। क्योंकि, इसमें देश ने कुल छह पदक जीते थे। भारत की ओर से इस आयोजन के लिए छह श्रेणियों में 16 रोवर्स का दल भेजा था।

रोइंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष राजलक्ष्मी सिंह देव (Rajlaxmi Singh Deo) ने कहा, "हमें यह भी यकीन नहीं था कि कोविड की वजह से रोवर इवेंट में प्रतिस्पर्धा कर पाएंगे या नहीं।"

“पुरुषों की टीम प्रतियोगिता शुरू होने से ठीक 48 घंटे पहले वहां पहुंची। इसलिए, हमें जिन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, उसे देखते हुए, यह वास्तव में हमारे लिए एक सफल और यादगार अभियान था।”

ओलंपिक जाएं। यह सब पायें।

मुफ्त लाइव खेल आयोजन | सीरीज़ के लिए असीमित एक्सेस | ओलंपिक के बेमिसाल समाचार और हाइलाइट्स