पार्क ताए-सांग: वो पूर्व कोरियाई शटलर जो पीवी सिंधु के मिशन ओलंपिक में है उनका हमसफर

पार्क ताए-संग का खेल करियर भले ही बहुत खास नहीं रहा हो, लेकिन बैडमिंटन कोर्ट पर पीवी सिंधु की तरफ बैठने वाले इस पूर्व खिलाड़ी ने बतौर कोच काफी शोहरत हासिल की है।

लेखक रौशन प्रकाश वर्मा
फोटो क्रेडिट 2022 Getty Images

टोक्यो ओलंपिक में जब पीवी सिंधु ने कांस्य पदक जीता था, तो वहां एक अन्य शख्स भी था जो उनसे कहीं ज्यादा उत्साहित और खुश था। उनका नाम है - पार्क ताए-सांग

दक्षिण कोरिया के पूर्व बैडमिंटन खिलाड़ी साल 2019 से पीवी सिंधु के कोच रहे हैं और प्रत्येक टूर्नामेंट के दौरान भारतीय बैडमिंटन की दिग्गज के कोर्ट के पास हमेशा मौजूद रहते हैं।

हालांकि, वे अब सबसे ज्यादा विश्व चैंपियन खिलाड़ी के कोच होने की हैसियत से मशहूर हैं। लेकिन, आपको बता दें कि पार्क ताए-सांग खुद भी एक पूर्व बैडमिंटन खिलाड़ी हैं, जिन्होंने अपने करियर में कई उल्लेखनीय सफलताएं हासिल की हैं।

पार्क ताए-सांग, एक बैडमिंटन खिलाड़ी

पार्क ताए-सांग का जन्म 20 जून, 1979 को बुसान में हुआ था और उन्होंने साल 1997 में 18 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन में अपना डेब्यू किया था। 

वे दक्षिण कोरिया की राष्ट्रीय बैडमिंटन टीम का एक नियमित हिस्सा थे और उन्होंने इसी टीम के साथ खेलते हुए साल 1999 के सुदीरमन कप में अपना पहला पदक (कांस्य) जीता था। 

पार्क ताए-सांग ने उस अभियान में केवल एक मैच खेला, जिसमें वह ग्रुप स्टेज के मैच में दिग्गज खिलाड़ी डेन पीटर गाडे से हार गए थे। दक्षिण कोरियाई टीम को सेमीफाइनल में प्रतियोगिता के चैंपियन चीन से हार का सामना करने के बाद कांस्य पदक से ही संतोष करना पड़ा था। 

इसके कुछ महीने बाद, पार्क ताए-सांग ने अपने चार मैचों में से दो में जीत हासिल करते हुए दक्षिण कोरिया को साल 1999 के बैडमिंटन एशिया कप में एक और कांस्य पदक दिलाया।

2002 के एशियाई खेलों में, पार्क ताए-सांग स्वर्ण पदक जीतने वाली दक्षिण कोरिया की पुरुष टीम का हिस्सा थे। हालांकि वह टूर्नामेंट में नहीं खेले थे।

पार्क ताए-सांग की सर्वश्रेष्ठ व्यक्तिगत उपलब्धि 2004 की एशियाई चैंपियनशिप में आई। दक्षिण कोरियाई शटलर ने अनुवर मुसाफिरोव, शोजी सातो, यू चेन और यंग सू जांग को हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई थी।

इसके बाद वह अंतिम चार में रजत पदक विजेता इंडोनेशिया के सोनी ड्वी कुनकोरो से हार गए और उन्हें कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा। 

पार्क ताए-सांग एक ओलंपियन भी हैं। उन्होंने 2004 एथेंस ओलंपिक में दक्षिण कोरिया के लिए पुरुष एकल स्पर्धा में हिस्सा लिया था। इस प्रतियोगिता में उन्होंने भारत के अभिन्न श्याम गुप्ता और विश्व चैंपियनशिप के रजत पदक विजेता बाओ चुनलाई को हराकर क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया था।

हालांकि, सोनी ड्वी कुनकोरो एक बार फिर से पार्क ताए-सांग के लिए बड़ी चुनौती बनकर सामने आए और उन्हें क्वार्टर फाइनल में हार झेलनी पड़ी। सोनी ड्वी कुनकोरो ने 2004 के ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था।

पार्क ताए-सांग साल 2007 के सुदीरमन कप में शिरकत करने वाली दक्षिण कोरिया टीम का हिस्सा थे जिसने कांस्य पदक हासिल किया था। हालांकि, यहां भी उन्हें एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने तीन साल तक और खेलने के बाद साल 2010 में 31 साल की उम्र में खेल से संन्यास ले लिया। 

BWF सर्किट की बात करें तो साल 2003 का कोरिया ओपन और साल 2010 का ऑस्ट्रेलियाई ओपन उनके लिए सबसे बेहतरीन पल थे जहां वे उपविजेता रहे थे। 

पार्क ताए-सांग: एक बैडमिंटन कोच

बैडमिंटन के प्रति उनके प्यार ने उन्हें खेल से अधिक समय के लिए दूर नहीं रहने दिया और जल्द ही उन्होंने अपने अनुभवों का फायदा उठाते हुए कोचिंग शुरु कर दी। 

पार्क ताए-सांग ने साल 2013 से 2018 तक पांच साल के लिए दक्षिण कोरिया की राष्ट्रीय टीम को कोचिंग दी। इसके बाद उन्हें साल 2019 में भारतीय टीम के कोच के रूप में नियुक्त किया गया।

शुरुआती दौर में पुरुष एकल कोच के रूप में कार्यरत पार्क ताए-सांग साल 2019 में विश्व चैंपियनशिप के बाद पीवी सिंधु के कोच बने क्योंकि भारतीय बैडमिंटन स्टार के पूर्व कोच किम जी ह्यून ने सिंधु के कोच की भूमिका को छोड़ दिया था। 

तब से अब तक, पीवी सिंधु और पार्क ताए-सांग की यह जोड़ी बेहद सफल रही है। 

दक्षिण कोरियाई कोच को अक्सर कोर्ट के बाहर से पीवी सिंधु का उत्साह बढ़ाते हुए देखा गया है। टोक्यो 2020 में सिंधु के कांस्य पदक जीतने के बाद पार्क के उत्साह का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था।

यह पीवी सिंधु के लिए दूसरा ऐतिहासिक ओलंपिक पदक था। इसके साथ ही वह व्यक्तिगत स्पर्धाओं में एक से अधिक ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला और दूसरी भारतीय एथलीट बन गईं। उन्होंने रियो 2016 में रजत पदक जीता था।

यह पहली बार था जब पार्क ताए-सांग ने किसी खिलाड़ी को अपने प्रशिक्षण के माध्यम से ओलंपिक पदक दिलाया था। इस वजह से यह उनके लिए एक यादगार इवेंट बन गया। 

पीवी सिंधु ने 2022 राष्ट्रमंडल खेल में भी स्वर्ण पदक जीता था, जो कि पार्क ताए-सांग के कोच बनने से पहले भारतीय शटलर के मेडल कैबिनेट में नहीं था।

कोरियाई कोच ने राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान कुछ हिंदी के शब्द भी सीखे जैसे,  'आराम से' (जो मोटे तौर पर 'शांत रहने' का पर्याय है)।

पार्क ताए-सांग ने कहा "टोक्यो के बाद से खेल के दौरान मैं सिर्फ ‘आराम से’ शब्द का इ्स्तेमाल करता हूं। सिंधु कभी-कभी जब लगातार अंक गंवाती हैं तो परेशान हो जाती हैं। खेल अभी खत्म नहीं होता है, लेकिन वह परेशान हो जाती हैं।"

"तो उस समय, मैंने हमेशा कहा है, 'सिंधु, आराम से खेलो, मैच अभी भी खत्म नहीं हुआ है। तुम कर सकती हो। प्रतिद्वंदी खिलाड़ी भी आपको अंक बनाने का मौका देगा। तुम इंतजार करो। परेशान मत हो।"

उन्होंने पीवी सिंधु के रक्षात्मक कौशल पर भी कड़ी मेहनत की है, जो टोक्यो 2020 में साफ तौर पर देखा गया था। 

एक साथ इतनी सफलता हासिल करने के बाद, पार्क ताए-सांग और पीवी सिंधु के लिए अगला लक्ष्य पेरिस 2024 में ओलंपिक स्वर्ण हासिल करना है। 

दोनों की जोड़ी का अगर यह सपना सच में तब्दील होता है तो उस पल की खुशियों और उत्साह की केवल कल्पना ही की जा सकती है।

पार्क ताए-सांग के पदक और उनकी उपलब्धियां

इवेंट संस्करण पदक
सुदीरमन कप कोपेनहेगन 1999 मिश्रित टीम कांस्य
बैडमिंटन एशिया कप हो ची मिन्ह 1999 पुरुष टीम कांस्य
एशियाई खेल बुसान 2002 पुरुष टीम स्वर्ण
एशियाई चैंपियनशिप कुआलालंपुर 2004 पुरुष एकल कांस्य
सुदीरमन कप ग्लासगो 2007 मिश्रित टीम कांस्य

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