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कौन हैं पैरालंपिक में एशियाई रिकॉर्ड बनाने वाले हाई-जम्पर निषाद कुमार ? जानिए, उनके बारे में सब कुछ   

आठ साल की उम्र में निषाद दुर्घटना का शिकार हो गए थे।  

3 मिनट द्वारा दिनेश चंद शर्मा
Nishad Kumar
(फोटो क्रेडिट Paralympic Committee of India)

निषाद कुमार (Nishad Kumar) ने रविवार को टोक्यो 2020 पैरालंपिक में 2.06 मीटर की जंप लगाकर पुरुषों की हाई जंप T47 स्पर्धा में रजत पदक जीता। इस जंप के साथ उन्होंने एक नया एशियाई रिकॉर्ड भी बनाया। हालांकि, वो अमेरिका के रोडरिक टाउनसेंड-रॉबर्ट्स (Roderick Townsend-Roberts) के 2.15 मीटर जंप के नए विश्व रिकॉर्ड के साथ शीर्ष पर रहने के कारण स्वर्ण पदक जीतने से चूक गए।

कुमार और डलास वाइज (Dallas Wise) दोनों ने 2.06 मीटर की जंप लगाई, लेकिन भारतीय ने अपने पहले प्रयास में 2.02 मीटर का आंकड़ा पार कर लिया था, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी ने दो जंप लगाई थी, कुमार को रजत से सम्मानित किया गया था।

निषाद ने कहा, "मुझे पता था कि दोनों अमेरिकी हाई जंपर्स 2.02 मीटर के निशान से प्रतिस्पर्धा करना शुरू करेंगे। क्योंकि, हमें पहले से बताना होगा कि हम कौन से निशान को लक्ष्य ले रहे हैं। मुझे यकीन नहीं था कि मैं पदक जीतूंगा, लेकिन अच्छा प्रदर्शन करने की पूरी उम्मीद थी।”

T47 श्रेणी एकतरफा ऊपरी अंग से विहीन वाले एथलीटों के लिए है, जिसमें कंधे, कोहनी और कलाई सही से काम नहीं करती है।

कुमार हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के बदायूं गांव के रहने वाले हैं। उनका परिवार खेती से जुड़ा है और बहुत छोटी उम्र से ही उनका रुझान खेती में था। हालांकि, छह साल की उम्र में उनका हाथ चारा काटने वाली मशीन में फंस गया और हाथ को काटना पड़ा।

निषाद कुमार ने एथलेटिक्स को कैसे चुना? 

आठ साल की उम्र से वह सरस्वती विद्या मंदिर, कटोहर खुर्द में कोच रमेश के अधीन विभिन्न एथलेटिक्स स्पर्धाओं में सक्रिय रूप से भाग लेने लगे। उन्होंने हाई जंप के अलावा 200 मीटर और 400 मीटर जैसी स्प्रिंट स्पर्धाओं में भाग लेकर शुरुआत की। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने अपने करियर में पहले सामान्य श्रेणियों में भाग लिया था। उन्होंने पटियाला में 2013 के राष्ट्रीय स्कूल खेलों में सब-जूनियर वर्ग में हाई जंप में रजत पदक भी जीता था।

यह 2017 में उन्होंने पैरा श्रेणी में प्रतिस्पर्धा करना शुरू किया और ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा (Neeraj Chopra) के कोच नसीम अहमद (Naseem Ahamed) और विक्रम चौधरी (Vikram Chaudhary) के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण शुरू किया। पेशेवर मदद मिलने के बाद उन्होंने जंप और सीमा से सुधार किया। उन्होंने पंचकूला में राष्ट्रीय पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 1.83 मीटर की जंप लगाकर रजत पदक जीता।

अहमद ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “जब वह ट्रेनिंग के लिए आए, तो हम उनकी लंबाई और जिस तरह से उसने इसका फायदा उठाया, उससे प्रभावित हुए। उन्होंने टीवी पर फॉस्बरी फ्लॉप तकनीक की मूल बातें सीखी थीं, लेकिन हमें उन्हें सुधारने में काफी मेहनत करनी पड़ी। उन्होंने सामान्य वर्ग में 1.40-1.55 मीटर की जंप लगाई थी और हमने उसे पिट बॉक्स और हाई जंप क्षेत्र के पास खड़े जंप लगाने के अलावा एक बोर्ड पर लंबवत जंप पर मेहनत की थी।"

शरीर के संतुलन और तकनीक के तालमेल के बाद वह सप्ताह में चार दिन 50-60 जंप लगाते हैं। टोक्यो जाने से पहले वह कोच सत्यनारायण के अधीन प्रशिक्षण लेने के लिए बेंगलुरु गए, जो कि मरियप्पन थंगावेलु (Mariyappan Thangavelu) के प्रशिक्षक भी हैं।

ये हैं निषाद कुमार की उपलब्धियां  

1. 2019 विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में कांस्य पदक।

2. फ़ैज़ा वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री में स्वर्ण पदक।

3. टोक्यो पैरालंपिक में रजत पदक।

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