कौन हैं भारतीय पुरुष मुक्केबाजी की बागडोर संभालने वाले सेना के नरेंद्र राणा?  

भारत के नए पुरुष बॉक्सिंग कोच, मनीष कौशिक, अमित पंघाल जैसे कुलीन एथलीटों के साथ कई सालों से जुड़े हुए हैं। 

लेखक दिनेश चंद शर्मा

बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (BFI) ने नरेंद्र राणा (Narender Rana) को नए पुरुष मुख्य कोच के रूप में नियुक्त किया है। भारतीय सेना के मेजर सूबेदार कई सालों से पुणे में आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट (ASI) में हैं, जहां उन्होंने भारत के लिए कई ओलंपियनों को प्रशिक्षित किया है।

टोक्यो 2020 में भारतीय पुरुष मुक्केबाजों के शानदार प्रदर्शन के बाद BFI ने तकनीकी टीम में बदलाव किया है और राणा की नियुक्ति उसी दिशा में एक कदम है।

वह पहले ही सेटअप में शामिल हो चुके हैं और सर्बिया में भारतीय दल के साथ थे, जब उन्होंने विश्व चैम्पियनशिप में भाग लिया था। वह एक सख्त अनुशासक हैं और एक टूर्नामेंट के दौरान अपने दल को सोशल मीडिया से दूर रखने की कोशिश करते हैं। वर्ल्ड चैंपियनशिप में मेडल मैच से पहले उन्होंने आकाश कुमार (Akash Kumar) का फोन ले लिया था।

राणा ने PTI से कहा, "मैंने क्वार्टर फाइनल के बाद उसका फोन ले लिया था, क्योंकि उस पर भारी संख्या में कॉल और मैसेज आ रहे थे। इतनी डिस्ट्रैक्शन में रेस्ट कहां से होता है, रिकवरी कब होती है? मुझे यह करना था।"

उन्होंने कहा, "आपके रिकवरी समय के बीच में सोशल मीडिया का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। यदि आप अपने बगल में एक फोन के साथ सो रहे हैं, तो इससे आप विचलित हो जाएंगे। मेरा मानना है कि गहन प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं के दौरान इसे टाला जाना चाहिए। यह विचलित करने वाला है।"

राणा का मानना है कि भारतीय मुक्केबाज ओलंपिक में दबाव नहीं झेल पाए और इसलिए उन्होंने खराब प्रदर्शन किया।

उन्होंने कहा, "कई बार दबाव के कारण नकारात्मक प्रदर्शन होता है और अमित पंघाल जैसे बॉक्सर के साथ ऐसा ही हुआ। वह दुनिया के नंबर एक थे। हर कोई उनके बारे में बात कर रहा था और आखिरकार इसका उन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा।"

"टोक्यो से वापस आने के बाद मैंने उनसे बात की और उन्होंने मुझसे कहा 'सर, बहुत प्रेशर था, नहीं ले पाया'। कोच के रूप में, यह मेरा काम होगा कि मैं बॉक्सर को ऐसी परिस्थितियों से बचाऊं और यह सुनिश्चित करूं कि उनका विश्वास बरकरार रहे, मूल रूप से असफलता के डर को खत्म करें।"

राणा स्वयं एक मुक्केबाज रहे हैं और राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उचित सफलता के साथ प्रतिस्पर्धा करते थे।

आइए, एक नजर डालते हैं नए मुख्य कोच पर:

नरेंद्र राणा ने अमित पंघाल को दिया था प्रशिक्षण।
फोटो क्रेडिट 2021 Getty Images

देर से उतरे बॉक्सिंग में

नरेंद्र राणा ने सेना में शामिल होने से पहले कभी भी बॉक्सिंग रिंग में कदम नहीं रखा था। उन्हें एक सिपाही के रूप में भर्ती किया गया था और उनकी पहली पोस्टिंग कानपुर में हुई थी। वरिष्ठ साथियों ने उन्हें मुक्केबाजी में हाथ आजमाने की सलाह दी।

उन्होंने Olympics.com को बताया, "1991 में मुझे बॉक्सिंग के बारे में बताया गया था। एमएल विश्वकर्मा साहब मेरे पहले कोच थे। मुझे इसका कोई पूर्व अनुभव नहीं था। लेकिन, जल्द ही मुझे खेल पसंद आने लग गया। मैंने सेना टूर्नामेंट और फिर अंतर-सेवा प्रतियोगिताओं को जीतना शुरू किया। 1995 में मैंने अपने पहले नेशनल में बॉक्सिंग की।"

एशियाई चैम्पियनशिप पदक विजेता

राणा ने राष्ट्रीय चैंपियनशिप में चार स्वर्ण पदक जीते थे। उन्होंने 1999 में दक्षिण एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता था। उसी साल उन्होंने 60 किग्रा भार वर्ग में लड़ते हुए एशियाई चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीता था।

2018 राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के स्वर्ण पदकों के पीछे का मार्गदर्शन

भारतीय पुरुष मुक्केबाजी दल ने 2018 राष्ट्रमंडल खेलों में आठ पदक जीते और उनमें से पांच को राणा ने पुणे के सेना खेल संस्थान में प्रशिक्षित किया। स्वर्ण पदक जीतने वाले गौरव सोलंकी (52 किग्रा) ने स्वर्ण पदक, अमित पंघाल (49 किग्रा) और मनीष कौशिक (60 किग्रा) ने रजत पदक जीता, जबकि मोहम्मद हुसामुद्दीन (56 किग्रा) और सतीश कुमार (+91 किग्रा) ने कांस्य पदक हासिल किया।

संजीत कुमार के पुनर्वास में निभाई अहम भूमिका

हैवीवेट वर्ग में स्पर्धा करने वाले संजीत कुमार (Sanjit Kumar) के बाएं बाइसेप्स की सर्जरी हुई और उन्हें एक विस्तृत रिकवरी प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। इस दौरान राणा चट्टान की तरह मुक्केबाज के साथ खड़े रहे। कोच ने उन्हें ठीक होने में मदद की और खेल से दूर रहने के दौरान उनके उत्साह को बढ़ाए रखने के लिए प्रेरित किया। जून में हुई एशियन चैंपियनशिप में संजीत ने उन्हें गोल्ड मेडल के रूप में प्रतिफल दिया था।

संजीत ने कहा, "मैंने अपने धीरज पर बहुत काम किया है। तीसरा राउंड हमेशा मेरे लिए एक कठिन चुनौती थी। लेकिन, राणा सर के साथ काम करने के बाद इसमें कुछ सुधार हुआ है।"

जवाबी हमला आगे बढ़ने का रास्ता

अपने खेल करियर के दौरान राणा को महान कोच गुरबख्श सिंह (Gurbax Singh) ने प्रशिक्षित किया था। वह अपने गुरु की प्लेबुक से एक या दो तरकीबें लागू करते हैं। वह अपने स्वयं के दर्शन के लिए प्रतिबद्ध रहते हैं। उनका मानना है कि पिछले कुछ सालों में मुक्केबाजी विकसित हुई है और यह "अब पावर-पंचिंग या हिट एंड रन के बारे में नहीं है।" उनका मानना है कि भारतीय मुक्केबाजों के लिए जवाबी हमला ही आगे का रास्ता है। उन्होंने कहा, "आपके पैर लय में चलने चाहिए, स्टाइल में घुमाना चाहिए। मारते जाने से बाउट नहीं जीतोगे, थोड़ा पर्फार्म करना पड़ेगा। काउंडर अटैक में अपने प्रतिद्वंद्वियों को पछाड़ें।"

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