जानिए, होनहार भारतीय तीरंदाज कोमलिका बारी के जुड़े पांच रोचक तथ्य

बारी ने गुरुवार को यूथ वर्ल्ड चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचकर भारत के लिए पदक पक्का कर दिया है।

लेखक दिनेश चंद शर्मा
फोटो क्रेडिट 2019 Getty Images

कोमलिका बारी (Komalika Bari) ने महिलाओं की रिकर्व तीरंदाजी में भारत की सबसे होनहार युवा संभावनाओं में से एक के रूप में उभरकर सामने आई हैं। गुरुवार को उन्होंने व्रोकला में यूथ वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारत के लिए मेडल जीतकर अपनी प्रतिभा की एक और झलक दिखा दी।

मौजूदा अंडर—18 चैंपियन ने सेमीफाइनल में शुरुआती दो सेट में पिछड़ने के बाद ओलंपियन केसी कॉफहोल्ड (Casey Kaufhold) के खिलाफ 6-4 (28-27, 25-28, 28-26, 25-30, 29-25) शानदार वापसी करते हुए व्यक्तिगत स्पर्धा के फाइनल में प्रवेश किया।

बारी 15 अगस्त को फाइनल में स्पेन की एलिया कैनालेस (Elia Canales) से भिड़ेंगीं। लेकिन, उससे पहले आइए उनके बारे में थोड़ा और जानते हैं:

अपने चचेरे भाई और मां से प्रेरित होकर चुना खेल

बारी ने 12 साल की उम्र में पहली बार धनुष-बाण उठाया था। उन्होंने अपने चचेरे भाई के नक्शेकदम पर चलते हुए खेल को अपनाया और इस यात्रा में उनकी मां ने साथ दिया। उनकी मां, जो एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के रूप में काम करती हैं, उन्हें जब बिरसानगर में एक स्थानीय तीरंदाजी कोच के बारे में पता चला, तो वह उन्हें तुरंत उनके पास ले गईं, ताकि वह खेल पर पकड़ बना सके।

कोमलिका बारी
फोटो क्रेडिट worldarchery.sport

बांस के धनुष से शुरू की ट्रेनिंग

यह 2012 में बारी ने तीरंदाजी की बारीकियां सीखना शुरू किया, लेकिन शुरुआती चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उनका परिवार शुरुआती दिनों में उनके अभ्यास के लिए एक धनुष का खर्च उठाने में सक्षम नहीं था। लिहाजा, उन्होंने शुरुआत में बांस के धनुष के साथ प्रशिक्षण लिया।

18 किमी साइकिल चलाकर पहुंचतीं थीं अकादमी

अपना प्रशिक्षण शुरू करने के चार साल बाद बारी ने जमशेदपुर में टाटा तीरंदाजी अकादमी (TAA) में प्रवेश लिया और कोच धर्मेंद्र तिवारी और पूर्णिमा महतो के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण शुरू किया। यहां से दीपिका कुमारी (Deepika Kumari) और अतानु दास (Atanu Das) जैसे ओलंपियन तैयार हुए हैं।

लेकिन, भारत में प्रमुख तीरंदाजी अकादमी की यात्रा उनके लिए आसान नहीं थी। क्योंकि, उन्हें अपने बिरसानगर स्थित घर से अकादमी तक पहुंचने के लिए रोजाना 18 किमी साइकिल चलानी पड़ती थी।

TAA में कोच धर्मेंद्र तिवारी और पूर्णिमा महतो के मार्गदर्शन में उन्होंने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करना शुरू किया।

बारी ने स्पोर्टस्टार को बताया, "TAA में आने के बाद मैंने तीरंदाजी पर ध्यान केंद्रित किया। मैंने सर्वश्रेष्ठ तीरंदाजों के साथ काम करके बहुत कुछ सीखा। मुझे पता चला कि शांति, धैर्य और विभिन्न परिस्थितियों को कैसे संभालना है।"

रिकर्व कैडेट विश्व चैंपियन बनने वाली दूसरी भारतीय

TAA में प्रशिक्षण के तीन साल के भीतर बारी ने विश्व तीरंदाजी युवा और कैडेट चैम्पियनशिप 2019 में महिला कैडेट रिकर्व श्रेणी में स्वर्ण पदक हासिल किया।

बारी ने फाइनल में जापान की वाका सोनोडा (Waka Sonoda) को 7-3 से हराकर स्वर्ण पदक जीता। इसने उन्हें यह उपलब्धि हासिल करने वाली भारतीय तीरंदाज दीपिका कुमारी के बाद दूसरी भारतीय तीरंदाज बना दिया।

बहुत जल्द पहुंची सीनियर टीम में

निरंतर प्रगति के कारण वह सिर्फ 18 साल की उम्र में भारतीय सीनियर टीम में शामिल हो गई थीं। वह टोक्यो 2020 से पहले ओलंपिक टेस्ट स्पर्धाओं के लिए महिला कोर ग्रुप का भी हिस्सा थीं।

हालांकि, दीपिका कुमारी और अंकिता भकत के साथ बारी पेरिस में अंतिम ओलंपिक क्वालीफायर के अंतिम 16 के राउंड में कोलंबिया की तीरंदाज से बाहर होने के बाद टोक्यो 2020 के लिए महिला रिकर्व तीरंदाजी टीम स्पर्धा के लिए क्वालीफाई करने में विफल रही थीं।

लेकिन, इस असफलता ने उन्हें देश के प्रमुख तीरंदाजों में से एक के रूप में खुद को स्थापित करने से नहीं रोका।