कौन हैं भारतीय स्टार ड्रैग-फ्लिकर गुरजीत कौर? जानिए, उनके बारे में पांच प्रमुख बातें 

कौर टोक्यो 2020 में भारत की महिला हॉकी टीम के लिए संयुक्त शीर्ष स्कोरर थीं। 

लेखक दिनेश चंद शर्मा
फोटो क्रेडिट 2021 Getty Images

भारतीय महिला हॉकी टीम की डिफेंडर ड्रैग-फ्लिकर गुरजीत कौर (Gurjit Kaur) टोक्यो 2020 में उन सितारों में से एक थीं, जिन्होंने पहली बार ओलंपिक सेमीफाइनल में पहुंचने में अपनी टीम की मदद करने के लिए चार गोल किए। वह फॉरवर्ड वंदना कटारिया (Vandana Katariya) के साथ भारतीय टीम के लिए संयुक्त शीर्ष स्कोरर रहीं।

यह गुरजीत का गोल था, जिसने भारत को क्वार्टर फाइनल में ऑस्ट्रेलिया पर 1-0 से जीत दिलाने में मदद की। उसने अर्जेंटीना (2-1) के खिलाफ सेमीफाइनल मुकाबले में मिली हार में भी उन्होंने स्कोर किया और कांस्य पदक मैच में ग्रेट ब्रिटेन के खिलाफ उन्होंने दो गोल किए, जिसमें भारत ने 4-3 से हार का सामना करना पड़ा।

आइए, जानते हैं भारतीय महिला हॉकी टीम की सबसे महत्वपूर्ण खिलाड़ियों में से एक के बारे में।

टोक्यो 2020 में कांस्य पदक के लिए खेले गए प्ले-ऑफ में ग्रेट ब्रिटेन के खिलाफ 4-3 की हार में भारत की ओर से दूसरा गोल करने के बाद जश्न मनाती गुरजीत कौर।
फोटो क्रेडिट Getty Images

सामान्य पृष्ठभूमि से शुरूआत

गुरजीत का जन्म एक किसान परिवार में हुआ था। इसके बावजूद उनके माता-पिता सतनाम सिंह (Satnam Singh) और हरजिंदर कौर (Harjinder Kaur) अपनी बेटियों को शिक्षा दिलाना चाहते थे। इतना ही नहीं अमृतसर जिले के मिआदी कलां गांव में एक सरकारी स्कूल होने के बावजूद उनके माता-पिता ने अजनाला के एक निजी स्कूल में उनका दाखिला कराया।

उनके पिता उन्हें साइकिल पर स्कूल ले जाते थे, जो कि 13 किमी दूर था और कक्षाएं समाप्त होने तक प्रतीक्षा करते थे। हालांकि, कुछ रिश्तेदारों के सुझावों के बाद उनके माता-पिता ने दोनों बहनों को एक बोर्डिंग स्कूल में दाखिला दिलाने का फैसला किया।

हॉकी से पहली मुलाकात

पंजाब में लड़कियों के लिए सबसे पुरानी हॉकी नर्सरी में से एक कैरों के बोर्डिंग स्कूल में गुरजीत और उसकी बहन प्रदीप ने इस खेल को अपनाया। शुरू में यह एक शौक था, लेकिन फिर दोनों ने इसे अवसर के रूप में माना।

प्रदीप (Pradeep) ने द ट्रिब्यून को बताया, “जैसे ही हमने हॉकी में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, हम सरकारी विंग में आ गए। मुफ्त शिक्षा और आहार की व्यवस्था ने हमारे माता-पिता की एक बड़ी मुसीबत हल कर दी।”

तब प्रदीप राष्ट्रीय स्तर की हॉकी खिलाड़ी बन गई, जबकि गुरजीत अपने सपनों का पीछा करने में आगे बढ़ती रही।

भारतीय टीम से बुलावा और ख्याति में बढ़ोतरी

गुरजीत को 2014 में सीनियर राष्ट्रीय शिविर के लिए पहला बुलावा आया। हालांकि, 2017 में उन्हें भारतीय महिला हॉकी टीम में एक स्थायी स्थान मिल गया और जल्द ही उन्होंने एक छाप छोड़ी। 2017 के एशिया कप में वह आठ गोल करके सुर्खियों में आ गईं और महाद्वीपीय आयोजन में सर्वोच्च गोल करने वाली खिलाड़ी बन गईं।

बदली हॉकी स्टिक

2018 में डच कोच शोर्ड मारिन (Sjoerd Marijne) ने स्थायी तौर पर भारत की महिला टीम के कोच के रूप में पदभार संभाला था। तब डचमैन ने पेनल्टी कार्नर पर गुरजीत की समस्या को सुलझाने में मदद की थी।

गुरजीत ने द ट्रिब्यून को बताया, “पहले मैं जिस स्टिक का इस्तेमाल करती थी, वह हल्की होने के कारण, उससे मुझे पर्याप्त ताकत नहीं मिलती थी। इसलिए, जब हम हॉलैंड गए, तो मारिन ने मुझे एक अलग स्टिक के साथ ड्रैग-फ्लिकिंग का प्रयास करने के लिए कहा। यह बहुत बेहतर थी, इससे मुझे ज्यादा ताकत मिली। इस बदलाव ने मेरी मदद की है।”

तकनीक में बदलाव

पूर्व डच खिलाड़ी टून सीपमैन (Toon Siepman) के मार्गदर्शन में गुरजीत दुनिया के बेहतरीन ड्रैग-फ्लिकर में से एक के रूप में उभरीं। सीपमैन ने रियो 2016 तक बेल्जियम की राष्ट्रीय टीम के साथ पेनल्टी कार्नर कोच के रूप में काम किया था, उन्होंने गोल के लिए अपनी भूख में सुधार करने के लिए अपनी बुनियादी बातों पर काम किया।

गुरजीत ने द ट्रिब्यून को बताया, "सीपमैन के साथ मैंने अपने शरीर को कैसे मोड़ना है और ड्रैग-फ्लिकिंग प्रक्रिया के दौरान कैसे कदम बढ़ाना जैसी बुनियादी बातों को ठीक किया है।"

"ये मामूली बदलाव थे, लेकिन मुझे पहले कभी एहसास नहीं हुआ था कि मैं इसे गलत तरीके से कर रही थी। उन्होंने मुझसे कहा कि 'बस ये छोटे-छोटे बदलाव करें और आप दुनिया के सर्वश्रेष्ठ ड्रैग-फ्लिकर बन सकते हैं'। जब भी मैं ड्रैग-फ्लिकिंग पर काम करती हूं, तो मैं इसे ध्यान में रखती हूं।”