कौन हैं टोक्यो पैरालंपिक सनसनी भाविना पटेल ?, जानिए उनके बारे में पांच बातें 

पटेल पैरालंपिक में पदक पक्का करने वाली पहली भारतीय टेबल टेनिस खिलाड़ी बन गई हैं। 

लेखक दिनेश चंद शर्मा
फोटो क्रेडिट Paralympic Committee of India

टेबल टेनिस खिलाड़ी भाविना पटेल (Bhavina Patel) ने चल रहे टोक्यो पैरालंपिक (Tokyo Paralympics) में भारत के लिए कई पहली बार की उपलब्धियां हासिल की हैं।

34 वर्षीय ने महिला सिंगल्स क्लास 4 क्वार्टर फाइनल में दुनिया की 5वें नंबर की सर्बिया की खिलाड़ी बोरिस्लावा पेरिच रांकोविच (Borislava Peric Rankovic) मात देकर पैरालंपिक में पदक हासिल करने वाली पहली भारतीय टेबल टेनिस खिलाड़ी बन गईं।

क्लास 4 की पैडलर ने दुनिया की नंबर 3 चीन की झांग मियाओ (Zhang Miao) को हराकर पैरालंपिक के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय टेबल टेनिस खिलाड़ी बन गईं।

गुजरात के मेहसाना जिले में जन्मी खिलाड़ी का अगला मुकाबला रविवार को फाइनल में चीन की यिंग झोउ (Ying Zhou) से होगा। लेकिन, ऐतिहासिक मुकाबले से पहले आइए, उनकी यात्रा के बारे में कुछ और जानें:

टोक्यो पैरालम्पिक्स में एक्शन में भाविना पटेल।
फोटो क्रेडिट Paralympic Committee of India

दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने बदल दी जिंदगी

एक साल की उम्र में, जब वह चलना सीख रही थीं, तब भाविना को एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना का सामना करना पड़ा। वह अजीब तरह से नीचे गिर गईं और इस घटना ने उनके कमर से नीचे के हिस्से को बेकार कर दिया।

टेबल टेनिस का चुनाव

हालांकि, यह दुर्घटना उनकी महत्वाकांक्षा और क्षमता के बीच रोड़ा नहीं बन सकी। 12 साल की उम्र में वह कंप्यूटर सीखने के लिए अहमदाबाद के वस्त्रापुर में ब्लाइंड पीपुल्स एसोसिएशन चली गईं। यहीं पर उनकी मुलाकात टेबल टेनिस खेलने वाले विकलांग बच्चों से हुई और उन्होंने अनायास ही इस खेल को अपनाने का फैसला कर लिया।

तब भाविना ने टेबल टेनिस सीखना शुरू किया और जल्दी से अवरोधों से बाहर निकल गईं। उन्होंने खेल में भाग लेने के पहले ही साल में एक प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता। गौरतलब है कि उन्होंने खेल के प्रति अपने लगाव को पढ़ाई के बीच नहीं आने दिया और संस्कृत में स्नातक की पढ़ाई पूरी की।

अभिभावकों का समर्थन

इसके बाद भाविना ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्पर्धाओं में दो दर्जन से अधिक पदक अर्जित किए। इस सफलता का श्रेय उनके माता-पिता को भी जाना चाहिए, जो उनके साथ मजबूती से डटे रहे। इतना ही नहीं मेहसाना के वडनगर तहसील के गांव में कटलरी की दुकान चलाने वाले उनके पिता हसमुख पटेल ने बेटी के पैरालंपिक के लिए ठीक से प्रशिक्षण दिलाने के लिए दुकान बंद करने का फैसला किया।

उनके पिता ने द न्यू इंडियन एक्सप्रेस को बताया, "मैंने दुकान बंद कर दी और अपनी पत्नी के साथ अहमदाबाद पहुंचा, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वह बड़े आयोजन के लिए ठीक से प्रशिक्षण ले। हम चाहते हैं कि वह प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित करे।"

अथक प्रयास और रोबोट-प्रशिक्षण

टोक्यो पैरालंपिक में सफलता हासिल करने के लिए भाविना को पिछले 13 वर्षों से कड़ी मेहनत करनी पड़ी थी। उनके कोच ललन दोशी Lalan Doshi 2008 से उनका मार्गदर्शन कर रहे हैं।

पैडलर ने कोविड-19 के कारण लागू हुए लॉकडाउन के दौरान अभ्यास करने के लिए एक टेबल टेनिस-रोबोट की भी मदद ली। उन्होंने 50 हजार रुपये की कीमत का एक सेकेंड हैंड रोबोट खरीदा, जिसने लॉकडाउन के दौरान घर पर रहने के दौरान घंटों तक अभ्यास करने में उनकी मदद की।

हालांकि, उन्हें भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) द्वारा स्थापित लक्ष्य ओलंपिक पोडियम योजना (TOPS) में शामिल किए जाने के बाद 2021 में 2.80 लाख रुपये का एक नया रोबोट दिया गया था।

कभी हार न मानने वाली भावना

उनके कोच दोशी का मानना है कि यह उनकी चुनौतियों के दौरान कभी हार न मानने वाली भावना है, जो उन्हें चैंपियन बनाती है। उन्होंने नियमित प्रशिक्षण के दौरान उनकी जीतने वाली मानसिकता को करीब से देखा था।

दोशी ने कहा, "भाविना ने हमेशा प्रतिस्पर्धा के हर चरण में उतार-चढ़ाव देखा है, लेकिन मैं उसके भीतर अदम्य फाइटर को जानता हूं। जब भी हमें कोई झटका लगा, तो हमने हर बुनियादी चीज पर काम किया। वह और मजबूत होकर वापस लौटी।"

उन्होंने कहा, "पिछले कुछ सालों में हमने उसकी सजगता, मानसिक समन्वय, फिजियो, भोजन की आदत, आराम चक्र, बॉडी क्लाक और अन्य हर पहलू पर काम किया है। ताकि, वह इस तरह की दबाव वाली परिस्थितियों में प्रदर्शन कर सके। और इसका परिणाम आप आज देख सकते हैं।"

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