‘वंदना कटारिया एक असाधारण एथलीट हैं’ -वेन लोम्बार्ड   

कटारिया टोक्यो 2020 में चौथे स्थान पर रही भारत की महिला हॉकी टीम के लिए संयुक्त रूप से सर्वाधिक गोल करने वाली खिलाड़ी रहीं।   

लेखक दिनेश चंद शर्मा

वंदना कटारिया (Vandana Katariya) टोक्यो 2020 में भारत की महिला हॉकी टीम के लिए प्रमुख प्रदर्शन करने वालों में से एक थीं। स्टार फॉरवर्ड भारतीय टीम में ड्रैग फ्लिकर गुरजीत कौर (Gurjit Kaur) के साथ संयुक्त रूप से सर्वोच्च गोल स्कोरर थीं। उनके नाम पर चार गोल थे।

उन्होंने चार में से तीन गोल टोक्यो के ओई हॉकी स्टेडियम में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ क्वार्टर फाइनल मैच में हासिल किए, जिसमें वह ओलंपिक में हैट्रिक बनाने वाली पहली भारतीय महिला हॉकी खिलाड़ी बनीं। उन्होंने ग्रेट ब्रिटेन के खिलाफ कांस्य पदक मैच में एक और गोल किया था, लेकिन उस मैच में भारत को 3-4 से हार का सामना करना पड़ा था।

अपने शानदार प्रदर्शन के दम पर उत्तराखंड में जन्मी इस खिलाड़ी को अर्जुन पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था। हालांकि, उनका प्रदर्शन भारत की पूर्व महिला हॉकी टीम के वैज्ञानिक सलाहकार वेन लोम्बार्ड (Wayne Lombard) के लिए कोई आश्चर्य की बात नहीं थी, जिन्होंने 2017 के बाद से उनकी वृद्धि को करीब से देखा है।

लोम्बार्ड ने Olympics.com को बताया, "वंदना कटारिया की शारीरिक क्षमता अद्भुत है। वह अविश्वसनीय और एथलेटिक रूप से असाधारण है। वह एक असली एथलीट हैं। अक्सर हमें कोई ऐसा व्यक्ति नहीं मिलता है, जो साफ तौर पर एक एथलीट हो और समय के साथ फिट और मजबूत हो।"

"उसकी तरफ से, वह हमेशा अपना 100 प्रतिशत देने का प्रयास करती थी। वह एक ऐसी खिलाड़ी थी, जिसे मुझे थोड़ा पीछे करना पड़ा। वह हर समय अतिरिक्त दे सकती थी।"

भारतीय महिला हॉकी टीम के साथ वेन लोम्बार्ड
फोटो क्रेडिट Wayne Lombard/Twitter

हालांकि, 244 सप्ताह, 1568 दिन और 37,632 घंटे की अपनी यात्रा शुरू करने से पहले ही दक्षिण अफ्रीकी ने महसूस किया कि प्रत्येक खिलाड़ी को व्यक्तिगत रूप से समझना महत्वपूर्ण है। उनका मानना है कि एथलीटों का विश्वास अर्जित करने, विशेष रूप से एक नए वातावरण में उन्हें अपने प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्देश्य को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिली। 

उनके प्रशिक्षण कार्यक्रम ने भारत की महिला हॉकी टीम को पहली बार ओलंपिक में चौथा स्थान हासिल करने में मदद की। यह काफी हद तक उनकी चपलता और मौलिक फिटनेस में सुधार लाने पर केंद्रित थी। 

चाइना हॉकी में एथलेटिक प्रदर्शन के पूर्व प्रमुख ने कहा, "मैंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए बहुत सारे बदलाव किए हैं। लेकिन, फिर से एक नए माहौल में खिलाड़ियों का विश्वास हासिल करना महत्वपूर्ण था।" 

उन्होंने कहा, "चपलता एक ऐसा क्षेत्र था, जो महत्वपूर्ण था। लेकिन, यह एक ऐसा क्षेत्र भी था, जिसमें बहुत समय लगता था। एक चीज जो मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण है, जिस पर मैं ध्यान लगा सकता था, वह सामान्य और मौलिक फिटनेस थी। मुझे लगा कि यह निम्न स्तर पर थी और इसकी एक मजबूत नींव रखना चाहता था। इसके अलावा सामान्य गति या चपलता और बुनियादी स्तर की सहशक्ति भी महत्वपूर्ण थी। फिट और मजबूत होना, मांगों को पूरा करने में सक्षम होना महत्वपूर्ण था।"  

पर्दे के पीछे का प्रयास लोम्बार्ड के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हुआ, क्योंकि उन्होंने देखा कि प्रत्येक खिलाड़ी के पास अपने अभ्यास को समझने की एक अलग क्षमता थी। 

लोम्बार्ड ने कहा, "हर कोई एक ही तरह से ग्रहण नहीं कर सकता है। शुरू में, मेरे लिए प्रत्येक व्यक्ति को छांटना महत्वपूर्ण था। इसलिए, एक बार मुझे समझ में आ गया कि टीम कहां है और प्रत्येक खिलाड़ी आसान हो गया है।" 

उन्होंने आगे समझाया, "युवा एथलीट लगभग स्पंज की तरह थे, उनके शरीर सीखने और सभी प्रशिक्षणों के अनुकूल होने में सक्षम थे, क्योंकि वे अनुभवहीन थे। तब बीच में खिलाड़ी थे, जो ग्रहण कर सकते थे, लेकिन हमें यह सुनिश्चित करने के लिए सावधानीपूर्वक निगरानी करने की आवश्यकता थी कि वे ओवरट्रेनिंग या अंडरट्रेनिंग नहीं करें और फिर वे ऐसे एथलीट थे, जो लगभग 15-16 वर्षों से हैं, जिन्हें यह सुनिश्चित करने के लिए समायोजित करना पड़ा कि उनके शरीर अधिक मजबूत नहीं हैं।"  

2006 में डरबन में क्वाज़ुलु-नटाल विश्वविद्यालय से खेल विज्ञान में स्नातक की डिग्री शुरू करने के बाद लोम्बार्ड भारत की महिला हॉकी टीम को बेहतर बनाने के अपने असाधारण प्रयास के साथ अपने करियर में शिखर पर पहुंच गए और टीम को ऊंचाई पर पहुंचा कर छोड़ा!

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