Neeraj Chopra टोक्यो 2020 जेवलिन थ्रो में स्वर्ण जीतकर दिग्गजों की सूची में सबसे ऊपर पहुंचे

Chopra भारत के दुसरे व्यक्तिगत ओलंपिक चैंपियन हैं, और एथलेटिक्स में ओलंपिक पदक जीतने वाले दुसरे खिलाड़ी।

लगभग तीन सप्ताह पहले जब Neeraj Chopra ने स्वीडन के अपसला में अपने प्रशिक्षण स्थल से भारतीय मीडिया से वार्ता के लिए ऑनलाइन आए थे तो उन्हें पता था कि अधिकांश सवाल टोक्यो 2020 से ही जुड़े होंगे और वह भारत की सबसे बड़ी पदक उम्मीद होने के दबाव को किस तरह से संभालेंगे। 

इसी के साथ एक चिंता यह भी थी कि Milkha Singh और PT Usha जैसे दिग्गजों के होने के बावजूद स्वतंत्र भारत के एथलीटों ने ट्रैक और फील्ड में कभी भी पदक नहीं जीता था।

23 वर्षीय को यह याद दिलाने की जरूरत नहीं थी कि दांव कितना बड़ा था। उन्होंने पदक का कोई वादा नहीं किया, लेकिन उन्हें पूरा भरोसा था कि वह दबाव से निपट सकते हैं। उन्होंने 2018 राष्ट्रमंडल खेलों और फिर उसी वर्ष हुए एशियाई खेलों में भी दबाव को शानदार तरीके से संभाला था। हालांकि, वह ओलंपिक तना भव्य मंच पर नहीं था, लेकिन वह उम्मीदों पर खरा उतरने के तरीकों के बारे में थोड़ा बहुत जानते थे।

उनके बायोडाटा पर एक नज़र डालेंगे तो आपको पता चल जाएगा कि उनके यह खूबी कैसे थी।

Chopra ने उस समय धमाका किया जब उन्होंने पोलैंड के ब्यडगोस्ज़कज़ में विश्व जूनियर चैंपियनशिप में 86.48 मीटर के जूनियर रिकॉर्ड थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीता था। यह एक ऐसा प्रयास था जो उन्हें टोक्यो 2020 में कांस्य जीतने के लिए भी पर्याप्त था। तब से वह चार स्वर्ण जीत चुके हैं। उन्होंने 2016 दक्षिण एशियाई खेलों, 2017 एशियाई चैंपियनशिप, 2018 राष्ट्रमंडल खेलों और 2018 एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता था। उनका प्रत्येक स्वर्ण पदक बड़ी चीजों की ओर बढ़ता एक कदम है।

Chopra ने बुधवार को टोक्यो 2020 की जेवलिन थ्रो स्पर्धा के क्वालिफिकेशन राउंड में हिस्सा लेकर अपना ओलंपिक पदार्पण किया। भारतीय ने अपने पहले ही प्रयास में जेवलिन को 86.65 मीटर की दूरी पर पहुंचा दिया। यह दिन का सबसे अच्छा थ्रो। जिससे साफ हो गया कि उन पर कोई दबाव नहीं है।

इस बेहतरीन प्रयास के साथ उनके चौड़े कंधे इतिहास का बोझ उठाने और उसे दूर करने में पूरी तरह सक्षम दिख रहे थे।

इसके बाद शनिवार को फाइनल में भी ऐसा ही कुछ देखने को मिला।

Chopra ने अपने पहले ही प्रयास में 87.03 मीटर का थ्रो किया। दुनिया के नंबर 1 जोहान्स वेटर सहित एक के बाद एक एथलीट दौड़े और भाला फेंका, कोई भी Chopra के थ्रो की दूरी के आस-पास भी नहीं पहुंचा। स्वर्ण के लिए अपने दूसरे प्रयास में उन्होंने 87.58 मीटर की दूरी दर्ज करते हुए अपना पोडियम फिनिश निश्चित कर दिया। फाइनल में केवल Chopra ने ही अपने पहले प्रयास के बाद दूसरे में दूरी में सुधार किया, जबकि अन्य एथलीट ऐसा करने में विफल रहे। इससे उनके स्वर्ण हासिल करने में कोई बाधा नहीं आई।

इसके साथ ही Chopra देश के सबसे दिग्गज एथलीटों में शामिल हो गए। इसका कारण है कि वह ट्रैक और फील्ड इवेंट में पदक जीतने वाले पहले भारतीय बने हैं और ओलंपिक का व्यक्तिगत स्वर्ण जीतने वाले दूसरे भारतीय हैं। वह देशवासियों द्वारा उन पर जताए गए विश्वास पर पूरी तरह खरे उतरे हैं।