टोक्यो 2020: नीरज चोपड़ा ने की दिग्गज जान जेलेजनी की बराबरी, 21 साल बाद क्वालीफिकेशन और फाइनल में शीर्ष पर रहने वाले पहले जेवलिन थ्रोअर बने  

चेक गणराज्य के दिग्गज जेवलिन थ्रो में वर्तमान विश्व रिकॉर्ड धारक हैं। 

लेखक दिनेश चंद शर्मा
फोटो क्रेडिट 2021 Getty Images

नीरज चोपड़ा (Neeraj Chopra) ने टोक्यो 2020 ओलंपिक में पुरुषों की जेवलिन थ्रो स्पर्धा में 87.58 मीटर के सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया।

यह उनके लिए एक यादगार ओलंपिक पदार्पण रहा। क्योंकि, वह नॉर्मन प्रिचर्ड (Norman Pritchard) के बाद एथलेटिक्स में पदक जीतने वाले एथलीट बने। प्रिचर्ड ने 1900 में पुरुषों की 200 मीटर और 200 मीटर हर्डल में रजत पदक जीता था।

अपने पहले प्रयास में उन्होंने 87 मीटर के निशान को पार किया, जो उन्हें स्वर्ण जीतने के लिए काफी अच्छा था। जबकि, जैकब वाडलेज (Jakub Vadlejch) 86.67 मीटर के अपने सीजन के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ दूसरे स्थान पर रहे। हालांकि, नीरज ने क्वालीफाइंग इवेंट से ही धमाका कर दिया था। क्योंकि, अपने पहले ही थ्रो में उन्होंने 86.65 मीटर की दूरी तय कर पहला स्थान हासिल किया। जर्मनी के जोहान्स वेटर (Johannes Vetter) 85.64 मीटर के साथ दूसरे स्थान पर रहे।

इसने नीरज को ओलंपिक में जेवलिन थ्रो में क्वालीफायर और फाइनल शीर्ष पर रहने वाले दिग्गज जान जेलेजनी (Jan Zelezny) के बाद पहला एथलीट बना दिया। सिडनी 2000 ओलंपिक में चेक गणराज्य के इस एथलीट ने 89.39 मीटर थ्रो किया और क्वालीफायर में ग्रुप B में पहले स्थान पर रहे। उन्होंने फाइनल में भी अपनी अच्छी फॉर्म जारी रखते हुए 90.17 मीटर जेवलिन थ्रो कर एक नया ओलंपिक रिकॉर्ड बनाया। हालांकि, यह पहली बार नहीं था, जब जेलेजनी ने यह उपलब्धि हासिल की हो। उन्होंने, इससे पहले बार्सिलोना 1992 और अटलांटा 1996 में भी ऐसा किया था।

जेलेजनी 98.48 मीटर के थ्रो के साथ वर्तमान विश्व रिकॉर्ड धारक हैं, जो उन्होंने 1996 में हासिल किया था।

आइए कुछ अन्य उदाहरणों पर नजर डालते हैं, जहां एक एथलीट ने क्वालीफायर में शीर्ष स्थान हासिल किया और फिर स्वर्ण पदक जीता।

टैपिओ कोरजस (Tapio Korjus) (फिनलैंड)

सियोल 1988 में कोरजस क्वालिफायर के ग्रुप B में 81.42 मीटर के थ्रो के साथ शीर्ष पर पहुंचे। फाइनल में उन्होंने अपने अंतिम प्रयास में 84.28 मीटर थ्रो करके स्वर्ण पदक जीता और जेलेजनी (84.12 मीटर) को हराया।

क्लाउस वोल्फर्मन (Klaus Wolfermann) (जर्मनी)

म्यूनिख 1972 में घरेलू समर्थकों के सामने उन्होंने क्वालीफायर में 86.22 मीटर थ्रो किया। फाइनल में उन्होंने अपने पांचवें प्रयास में 90.48 मीटर थ्रो किया। सोवियत संघ के जेनिस लुसिस (Janis Lusis) 90.46 मीटर तक पहुंच गए और वोल्फर्मन ने बहुत कम अंतर से स्वर्ण पदक जीता।

एरिक लुंडक्विस्ट (Erik Lundqvist) (स्वीडन)

एम्स्टर्डम 1928 में लुंडक्विस्ट ने क्वालिफिकेशन राउंड में 66.60 मीटर थ्रो का एक नया ओलंपिक रिकॉर्ड बनाया। ओलंपिक के उस संस्करण में छह एथलीटों ने फाइनल के लिए क्वालीफाई किया और क्वालीफिकेशन स्कोर पर खत्म किया। अंतिम राउंड के अंतिम तीन थ्रो में कोई भी उस निशान को पार नहीं कर सका और इसलिए स्वीडिश थ्रोअर ने स्वर्ण पदक जीता।

एरिक लेमिंग (Eric Lemming) (स्वीडन)

1912 में एरिक लेमिंग ने क्वालीफायर में 57.42 मीटर थ्रो कर एक नया ओलंपिक रिकॉर्ड बनाया। हालांकि, फाइनल में उन्होंने उस स्कोर को बेहतर बनाया और स्वर्ण जीतने के लिए 60.64 मीटर का नया रिकॉर्ड कायम किया।