थॉमस कप के सेमीफाइनल में पहुंचने का भारत के पास सबसे अच्छा मौका हो सकता है- अपर्णा पोपाट 

भारतीय ओलंपियन का मानना है कि भारत में पुरुष बैडमिंटन को बढ़ावा देने के लिए थॉमस कप के सेमीफाइनल में जगह बनाने की जरूरत है। 

लेखक दिनेश चंद शर्मा
फोटो क्रेडिट Badmintonphoto | Courtesy of BWF

भारतीय टीम गुरुवार को डेनमार्क के आरहूस में थॉमस कप (Thomas Cup) के क्वार्टर फाइनल में चीन से भिड़ने के बाद एक सफलता की दहलीज पर होगी। भारत पुरुषों की प्रमुख बैडमिंटन प्रतियोगिता में कभी भी अंतिम आठ से आगे नहीं बढ़ा है और भारतीय ओलंपियन अपर्णा पोपट (Aparna Popat) का मानना है कि इस सीमा को पार करने के लिए भारत के पास सबसे अच्छा अवसर हो सकता है। 

सिडनी 2000 और एथेंस 2004 में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली पोपट ने कहा, "अगर कोई मौका है, तो वह कल (चीन के खिलाफ) है।" 

भारतीय टीम थॉमस कप के इस संस्करण में अब तक एक भी मैच नहीं हारी है। उन्होंने शुरुआती मैच में नीदरलैंड्स को 5-0 से हराया और 2010 के बाद पहली बार थॉमस कप के क्वार्टर फाइनल में प्रवेश करने के लिए मंगलवार को इतने ही अंतर से ताहिती को हराया। हालांकि, भारत ने इससे पहले पुरुष टीम प्रतियोगिता में संघर्ष किया है, लेकिन वे गुरुवार को नए रूप वाली चीनी टीम के खिलाफ अपनी उपेक्षा को पसंदीदा के रूप में बदल सकता है। 

पोपट ने कहा, “वास्तव में यह इस बात पर निर्भर करता है कि खिलाड़ी इसे किस तरह देख रहे हैं। मुझे उम्मीद है कि गुरुवार के मुकाबले में जाने से पहले उन्होंने इन नए खिलाड़ियों को पर्याप्त रूप से देखा होगा और वे इस अवसर का उपयोग करेंगे। मुझे उम्मीद है कि ऐसा होगा, क्योंकि पुरुषों के बैडमिंटन (भारत में) को इस बढ़ावे की जरूरत है।"

पूर्व भारतीय बैडमिंटन स्टार अपर्णा पोपट 

भले ही भारत में बैडमिंटन ने पिछले एक दशक में अच्छी छलांग लगाई है, लेकिन बड़ी उपलब्धियां महिला खिलाड़ियों ने हासिल की है। विशेष रूप से दो खिलाड़ियों साइना नेहवाल (Saina Nehwal) और पीवी सिंधु (PV Sindhu)। जहां नेहवाल लंदन 2012 में कांस्य पदक जीतकर ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनीं, वहीं सिंधु दो ओलंपिक पदक (रियो 2016 में रजत और टोक्यो 2020 में कांस्य) जीतने वाली एकमात्र भारतीय महिला एथलीट बनीं। 

जबकि, भारतीय पुरुष खिलाड़ी विशेष रूप से किदांबी श्रीकांत (Kidambi Srikanth) ने भी कड़ी मेहनत कर चमक बिखेरी है, वे काफी हद तक नेहवाल और सिंधु नक्शेकदम पर चले हैं। श्रीकांत टोक्यो 2020 के लिए क्वालीफाई करने में विफल रहे, जबकि बी साई प्रणीत (B Sai Praneeth) टोक्यो में अपने ओलंपिक पदार्पण पर अपने दोनों ग्रुप मैच हार गए। भारत के प्रमुख पुरुष खिलाड़ी चीन को हराकर और भारत को थॉमस कप में अपने पहले सेमीफाइनल में पहुंचाकर आत्मविश्वास हासिल करने की उम्मीद करेंगे। 

महिला टीम प्रतियोगिता उबेर कप (Uber Cup) में देश का अभियान बुधवार को खत्म हो गया, क्योंकि टीम क्वार्टर फाइनल में थाईलैंड से 5-0 से हार गई थी।

यह देखते हुए कि सिंधु ने इस आयोजन में भाग नहीं लिया और नेहवाल को चोट के कारण जल्दी बाहर होना पड़ा, यह एक युवा भारतीय टीम का एक विश्वसनीय परिणाम था। 

43 वर्षीय ने कहा, "इससे उन्हें बहुत आत्मविश्वास मिलेगा, क्योंकि उन्होंने इसे अपनी योग्यता के आधार पर किया है। टीम में शायद ही कोई सीनियर था।”  

“अगर यह एक व्यक्तिगत ओपन टूर्नामेंट होता, तो आप एक हार के बाद सप्ताह के बाकी दिनों में बाहर बैठे रहते। लेकिन, यहां ऐसा नहीं है और इस तरह का टूर्नामेंट खेलने वाले जूनियर्स के लिए यही सबसे बड़ा फायदा है। जब आप युवा होते हैं और आप एक टीम में खेलते हैं, तो आप बहुत कुछ सीखते हैं। आपके साथ ऐसे लोग और खिलाड़ी हैं, जिनका एक ही लक्ष्य है।" 

भारत ने बुधवार को एकल मैचों में मालविका बंसोड़ (20), अदिति भट्ट (18) और तसनीम मीर (16) को मैदान में उतारा। भले ही युवा भारत के लिए एक भी अंक नहीं जीत सके, लेकिन इससे उन्हें बहुत अनुभव मिलेगा। 

पोपट ने निष्कर्ष निकालते हुए कहा, "उन्होंने सबसे सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों से मुकाबला नहीं किया है। लेकिन, उन्होंने अपने से कहीं अधिक अनुभव वाले अच्छे खिलाड़ियों को खेला है। उन्होंने जो खेल खेला उसे देखते हुए, मुझे लगता है कि वे गति और फिटनेस के मामले में उनसे मुकाबला करने में सक्षम थे। वे डरते नहीं हैं।"