उत्तराखंड के गाँव से ओलंपिक मंच तक: क्रॉस कंट्री स्कीयर Jagdish Rawat की अद्भुत कहानी

क्रॉस कंट्री स्कीइंग में भारत के लिए शीतकालीन ओलंपिक खेलों में भाग लेने वाले Jagdish Rawat ने वह कर दिखाया जो बहुत कम खिलाड़ियों ने भारतीय खेल इतिहास में किया है। उनकी कहानी olympics.com पर पढ़िए। 

शीतकालीन ओलंपिक खेलों में क्रॉस कंट्री स्कीइंग एक ऐसा खेल है जिसमे भारत की ओर से बहुत कम खिलाड़ियों ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व किया है। इस बात में अगर आप आर्थिक सहयोग अथवा खेल प्रोत्साहन की कमी को जोड़ दें तो Jagdish Rawat की सफलता अद्भुत होने के साथ कुछ स्तरों पर अविश्वसनीय भी है।

Jagdish Rawat

परिवार और सेना से प्रेम

उत्तराखंड के चमोली जिले में जन्मे और बड़े हुए Jagdish Rawat एक मध्यम वर्ग के परिवार में बड़े हुए और अपने भाइयों अथवा बहनों के साथ बचपन में वह खेलते रहते थे लेकिन उन्हें असली प्रेम सेना से था।

Rawat ने olympics.com से बात करते हुए बताया, "मैं एक मध्यम वर्ग के परिवार से आता हूँ और मेरे परिवार में माता पिता के साथ दो भाई और बहन थी। मुझे बचपन से ही फ़ौज में भर्ती होने की आशा थी और जैसे ही मुझे अवसर मिला, मैंने अपना नाम दे दिया। मुझे सेना में जाने के लिए मेरे भाई ने प्रेरित किया। मैं फ़ौज में 16-17 वर्ष की आयु में भर्ती हो गया था।"

एक युवा Rawat जब सेना में थे तब उन्हें कोई अंदेशा नहीं था कि उनके जीवन में स्कीइंग आने वाली थी और उनका जीवन एक नया मोड़ लेने वाला था। उन्होंने गुलमर्ग में स्थित हाई अल्टीट्यूड इंस्टिट्यूट में खेलना शुरू किया और वहां उनका परिचय स्कीइंग से हुआ।

Jagdish Rawat

स्कीइंग से लगाव और खेल जीवन में शुरुआत

भारत में कई युवा शीतकालीन खेलों के बारे में जानते भी नहीं हैं लेकिन अगर आप सेना का भाग हैं और किसी बर्फ वाले राज्य में स्थित हों तो इसके अवसर बढ़ जाते हैं और Rawat के साथ भी ऐसा ही हुआ।     

उन्होंने कहा, "जब मैंने फ़ौज में सेवा करनी शुरू की तो मुझे स्कीइंग के बारे में कुछ भी नहीं पता था लेकिन मेरा जीवन पूरी तरह बदलने वाला था और मुझे इस चीज़ का कोई अनुमान नहीं था।"

प्रशिक्षण के लिए सीखा हुआ एक खेल Rawat का जीवन बन गया और वह एक शीतकालीन खिलाड़ी बन गए।

"शारीरिक क्षमता के आधार पर मेरा चयन किया गया और जब हम गुलमर्ग में स्थित इंस्टिट्यूट में पहुंचे तो हमें अल्पाइन, नार्डिक और स्नोबोर्ड में से एक खेलने का अवसर मिला। मेरी सहनशक्ति के कारण मैंने नार्डिक चुना और मेरी लंबाई के चलते मैंने क्रॉस कंट्री खेलना शुरू किया।"

Jagdish Rawat

अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं और ओलंपिक खेलों में चयन

धीरे ही सही लेकिन Jagadish Rawat की क्षमता सबको दिखने लगी और उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं में अपना स्थान पक्का करना शुरू कर दिया। यूरोप और एशिया में उन्होंने कई प्रतियोगिताओं में भाग लिया और विश्व चैंपियनशिप में भी अपना स्थान पक्का किया।

अपने शुरुआत के दिनों के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, "साल 2010 से मेरा स्कीइंग सफर शुरू हुआ और धीरे धीरे मैंने कई प्रतियोगिताओं में भाग लिया और 2013 में विश्व चैंपियनशिप में अपना स्थान पक्का किया। इटली में आयोजित हुई विश्व चैंपियनशिप मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण और बड़ा अनुभव था। अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ियों को देख मुझे तकनीकी चीज़ें भी समझ आयीं और मैंने जब बड़े सितारों को देखा तो मुझे ख़ुशी हुई।"

विश्व चैंपियनशिप में भाग लेना उनके लिए एक जीवन परिवर्तन करने वाला क्षण था लेकिन Rawat को पता नहीं था कि उनकी मेहनत का सबसे बड़ा फल अभी उन्हें मिलना बाकी था। क्रॉस कंट्री स्कीइंग में लगातार परिश्रम करने वाले इस युवा को अपने कोच और दोस्तों का सहयोग मिलता रहा और वह आगे बढ़ते रहे।

"हर साल मैं मेहनत करता रहा और ओलंपिक खेलों में जब मैंने अपना स्थान पक्का किया तो मुझे विश्वास ही नहीं हुआ। मेरे दोस्त बहुत खुश हुए लेकिन उन्हें भी पहले बिलकुल विश्वास नहीं हुआ की मैं शीतकालीन ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करने जा रहा हूँ।"

Jagdish Rawat

2018 ओलंपिक खेल और भविष्य से आशा

साल 2014 में भारत का प्रतिनिधित्व सोची शीतकालीन ओलंपिक खेलों में कर चुके Nadeem Iqbal ने Rawat के जीवन में एक बहुत बड़ी भूमिका निभाई है।   शीतकालीन ओलंपिक खेल प्योंगचांग 2018 में भाग लेने के चुने जाने के बाद भी Rawat का दक्षिण कोरिया जाना खतरे में पड़ गया था क्योंकि कोच का नाम सुनिश्चित न होने के कारण औपचारिकता बची थी। अंत में Iqbal का नाम दिया गया और Rawat ने 2018 प्योंगचांग खेलों में भाग लिया जो उनके जीवन का सबसे अद्भुत क्षण था। 

पुरुष फ्रीस्टाइल 15 किमी फ्री वर्ग में भाग लेने वाले Rawat 99वें स्थान पर आये लेकिन उनका ओलंपिक खेलों में भाग लेना ही बहुत बड़ी बात था। एक शीतकालीन खिलाड़ी के दृष्टिकोण से वह भारत के भविष्य को लेकर बहुत सकारात्मक सोच रखते हैं।

उन्होंने कहा, "ओलंपिक खेलों में भाग लेने के बाद मुझे ऐसा लगा कि भारत के अन्य खिलाड़ी भी क्वालीफाई कर सकते हैं। अगर भारतीय खिलाड़ियों को सहयोग मिले और अभ्यास करने के लिए सहायता करि जाये तो हमारे अंदर वह क्षमता है जो यूरोप या अन्य किसी भी क्षेत्र के खिलाड़ियों में आपको नज़र आती है।"

बीजिंग 2022 खेलों में भारत की ओर से शायद क्रॉस कंट्री स्कीइंग में कोई खिलाड़ी भाग न ले पाए लेकिन Jagdish Rawat जैसे खिलाड़ियों की कहानी और सफलता पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्त्रोत है।

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