आइस हॉकी: शीतकालीन खेलों में भारत की आशा

पूरे विश्व में खेले जाने वाले सबसे लोकप्रिय खेलों में से एक आइस हॉकी भारत में धीमी गति से ही सही लेकिन लोकप्रिय ज़रूर हो रहा है। 

फोटो क्रेडिट 2010 Getty Images

भारत में स्वतंत्रता के कई दशकों बाद तक हॉकी को राष्ट्रिय खेल माना जाता था और इसके पीछे का कारण ओलंपिक खेलों में भारतीय टीम की सफलता थी। हालांकि हॉकी भारत में दशकों से खेला जा रहा है, इस खेल का शीतकालीन रूप आइस हॉकी भी अब भारत में धीमी गति से लोकप्रियता की ओर बढ़ रहा है। भारत एक ट्रॉपिकल देश है और इसी कारण से पहाड़ी क्षेत्रों की कमी आइस हॉकी को प्रगति करने से रोकती है।

इस बात को ध्यान में रखते हुए आइस हॉकी ने जो प्रगति की है वह सराहनीय है और अगले साले शुरू होने वाले बीजिंग 2022 शीतकालीन ओलंपिक खेलों को भारत के कई युवा आइस हॉकी खिलाड़ी बहुत करीब से देखेंगे।

उत्तर भारत में आइस हॉकी केंद्र

यह कोई संयोग की बात नहीं है कि भारत में आइस हॉकी मुख्य रूप से उत्तर भाग में खेला जाता है और देश के सारे लोकप्रीय क्लब भी हिमाचल प्रदेश, लेह, देहरादून, लदाख, कश्मीर और कारगिल जैसे स्थानों में स्थित हैं। हालांकि भारत में कुछ आइस हॉकी क्लब बहुत दशक पहले स्थापित किये गए थे, 1990 का दशक भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण था जब लदाख शीतकालीन खेल क्लब और अन्य कई संस्थाओं की स्थापना हुई।

गुलमर्ग, लेह, शिमला और देहरादून भारत में ऐसे स्थान हैं जहां आइस हॉकी रिंक उपस्थित हैं और स्थानीय अथवा कुछ अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी यहां अभ्यास करते हैं। साल 2010 के बाद से इन सभी स्थानों पर राष्ट्रिय चैंपियनशिप का आयोजन भी किया गया है।

महिला और पुरुष राष्ट्रिय टीम, गहरी आशा और अनेक सपने

भारतीय सेना अथवा तिब्बत के बॉर्डर पर पहरा देने वाली आईटीबीपी के कई अफसर अथवा जवान आइस आइस हॉकी में भाग लेते हैं। साल 2021 में आयोजित हुई राष्ट्रिय चैंपियनशिप की विजेता आईटीबीपी ने लदाख को 5-1 से फाइनल में हरा कर ख़िताब हासिल किया था।

भारत की पुरुष और महिला आइस हॉकी टीम दोनों ही अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खेलती हैं और इंफ्रास्ट्रक्चर अथवा समर्थन की कमी का सामना करते हुए दोनों ने ही पिछले कुछ वर्षों में काफी प्रगति की है। पुरुष हॉकी टीम की बात करें तो चैलेंज कप एशिया जैसी अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उन्होंने अच्छा प्रदर्शन दिखाया है। भारतीय पुरुष आइस हॉकी टीम के इतिहास में Rigzin Norboo ने सबसे ज़्यादा गोल दागे हैं।

महिला आइस हॉकी टीम की कहानी किसी स्वप्न से कम नहीं है क्योंकि उनके पास समर्थन, धन और इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी होने के साथ मौसम की भी चुनौती है लेकिन फिर भी पिछले दशक में उन्होंने खेलने अथवा सफल होने का जज़्बा दिखाया है। इस महिला आइस हॉकी टीम के सारे सदस्य लदाख से हैं और सिर्फ शीतकालीन महीनों में अभ्यास करने के बाद भी वह अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मुकाबला कर रही हैं।

साल 2017 में भारतीय महिला टीम ने जब फिलीपींस को 4-3 से पराजित किया तो पूरे देश के लिए यह एक अद्भुत अथवा अचंभित करने वाला परिणाम था।

हालांकि भारतीय आइस हॉकी अभी ओलंपिक खेलों में अपनी जगह बनाने से बहुत दूर है, इन खिलाड़ियों और देश में इस खेल के प्रेमियों के जोश में कोई कमी नहीं है। अन्य शीतकालीन खेलों की तरह, आइस हॉकी भी भारत में सफलता पाने और लोकप्रिय होने की क्षमता रखता है और बीजिंग 2022 खेलों से पूरे देश को बहुत प्रेरणा मिलेगी।

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