ब्रिस्बेन 2032 का लक्ष्य: टोक्यो में अच्छे प्रदर्शन के बाद भारत में कुश्ती को मिला जबरदस्त बढ़ावा

उत्तर प्रदेश सरकार ने भारत में कुश्ती को गोद लेकर इसके विकास पर 170 करोड़ रुपये के निवेश की उम्मीद जताई है। 

लेखक दिनेश चंद शर्मा
फोटो क्रेडिट 2021 Getty Images

कुश्ती भारत के लिए ओलंपिक में एक पदक जिताने वाली स्पर्धा रही है। देश के पहलवानों ने बीजिंग 2008 के बाद से हर ओलंपिक में कम से कम एक पदक जरूर जीता है। 

हाल ही में भारत ने टोक्यो 2020 के कुश्ती आयोजन में दो पदक जीते, जिसमें रवि कुमार दहिया (Ravi Kumar Dahiya) ने रजत और बजरंग पूनिया (Bajrang Punia) ने कांस्य पदक जीता। इन प्रदर्शनों से देश में कुश्ती की रूपरेखा को और आगे बढ़ने में मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। 

अब, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ब्रिस्बेन 2032 ओलंपिक तक इस खेल को अपनाने के बाद भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया है। कुश्ती के बुनियादी ढांचे के विकास में राज्य सरकार बड़े पैमाने पर निवेश करेगी और देश में पहलवानों के विकास का समर्थन करेगी।

WFI के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह (Brijbhushan Sharan Singh)ने PTI से कहा, "भारतीय कुश्ती को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने इस खेल को अपनाया है और उम्मीद है कि 2032 ओलंपिक तक बुनियादी ढांचे और पहलवानों को समर्थन देने के लिए 170 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।" 

महासंघ प्रमुख ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि इस प्रस्ताव से भारत में कैडेट स्तर के पहलवानों को फायदा होगा और भविष्य में और अधिक ओलंपिक चैंपियन तैयार करने के लिए जमीनी स्तर पर विकास होगा।

ताकुतो ओटोगुरो, हाजी अलीयेव, गडज़िमुराद रशीदोव और बजरंग पुनिया अपने टोक्यो 2020 पदक के साथ।
फोटो क्रेडिट NAOMI BAKER/GETTY IMAGES

"प्रायोजन केवल देश के शीर्ष पहलवानों तक सीमित नहीं होगा। बल्कि, कैडेट स्तर के पहलवानों को भी प्रायोजक मिलेगा और हम राष्ट्रीय चैंपियंस का भी समर्थन कर सकेंगे।" 

इस प्रस्ताव के बाद कैडेट और जूनियर पहलवानों को भी विदेशों में प्रदर्शन करने का मौका दिए जाने की उम्मीद है। महासंघ प्रमुख का मानना है कि यह भारत में कुश्ती को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। 

प्रमुख ने कहा, "अभी तक, केवल वरिष्ठ और शीर्ष स्तर के पहलवानों को ही व्यक्तिगत कोच और विदेशी कोचों का मार्गदर्शन मिलता है। लेकिन, अब हम अपने कैडेट और जूनियर पहलवानों को भी प्रशिक्षित करने में भारी निवेश कर सकते हैं।"  

उन्होंने कहा, "अब हम अपने कैडेट पहलवानों को प्रशिक्षण और प्रदर्शन के लिए विदेश भेज सकते हैं। हमें कुश्ती को अगले स्तर तक ले जाने की जरूरत है।" 

महासंघ प्रमुख भारत में ऐसा माहौल बनाने को लेकर भी आशान्वित हैं, जो देश के शीर्ष अंतरराष्ट्रीय पहलवानों के प्रशिक्षण को समायोजित कर सके। 

उन्होंने कहा, "मैं आपको बता दूं कि हमारे पास पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए भारत में अत्याधुनिक कुश्ती अकादमियां होंगी। निश्चित रूप से लखनऊ में एक अकादमी खुलेगी और हमें उम्मीद है कि नोएडा में एक और अकादमी विकसित की जाएगी, जहां हम अंतरराष्ट्रीय स्तर के पहलवानों को आमंत्रित करेंगे और उन्हें वहां ठहरने और प्रशिक्षण की सुविधा देंगे।"

ओलंपिक जाएं। यह सब पायें।

मुफ्त लाइव खेल आयोजन | सीरीज़ के लिए असीमित एक्सेस | ओलंपिक के बेमिसाल समाचार और हाइलाइट्स