छत्रसाल में तैयार, सुशील और योगेश्वर से प्रेरित रवि कुमार दहिया के लिए टोक्यो 2020 का पदक कड़ी मेहनत का इनाम 

ओलंपिक पदक विजेता सुशील कुमार और रवि कुमार दहिया नई दिल्ली के प्रसिद्ध छत्रसाल स्टेडियम में तैयार हुए हैं। 

लेखक दिनेश चंद शर्मा
फोटो क्रेडिट 2021 Getty Images

भारत में पहलवानों के आध्यात्मिक घर छत्रसाल अखाड़े से टोक्यो 2020 के रजत पदक विजेता रवि कुमार दहिया (Ravi Kumar Dahiya) को खेल में आने के बाद काफी प्रेरणा मिली।

इसने उन्हें ओलंपिक में रजत पदक जीतने वाले दूसरे भारतीय पहलवान बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उनके बचपन के कोच और द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता सतपाल सिंह (Satpal Singh), ओलंपिक पदक विजेता सुशील कुमार (Sushil Kumar) और योगेश्वर दत्त (Yogeshwar Dutt) के पीछे की ताकत ने न केवल उनकी तकनीक को परिपूर्ण किया, बल्कि उनमें जीतने की मानसिकता भी पैदा की।

दहिया ने Olympics.com को बताया, "जब मैं अपने गुरु (महाबली सतपाल सिंह) से मिला, तब मैं छोटा बच्चा था। मैं 11-12 साल की उम्र में मेरी प्रतिभा कच्ची थी। मैं सभी को प्रशिक्षण करते देखता था।"

उन्होंने कहा, "मेरे कोच मुझसे कहते थे कि 'सुशील (कुमार) ने एक पदक जीता है', मेरे मन में भी कुछ ऐसा ही करने का था।"

सुशील कुमार और योगेश्वर दत्त भी दहिया के लिए हीरो हैं, जिन्होंने उन्हें देश के लिए गौरवान्वित करते हुए रैंकों के माध्यम से ऊपर उठते हुए देखा है। उसने, उनके करियर से बहुत कुछ सीखा।

टोक्यो 2020 में रजत पदक के साथ रवि कुमार दहिया।
फोटो क्रेडिट 2021 Getty Images

दहिया ने कहा, "सुशील कुमार ने 2008 और 2012 के ओलंपिक में देश के लिए पदक लाकर भारत में पहलवानों के लिए रास्ता खोला था। हमने उन्हें अपनी आंखों के सामने एक दिग्गज पहलवान बनते देखा है। उन्हें अपना पहला पदक (ओलंपिक में) जीतते देखा है। उन्होंने मेरी उपलब्धि में एक बड़ी भूमिका निभाई।"

उन्होंने कहा, "सुशील कुमार और योगेश्वर दत्त ने वास्तव में मुझे बहुत प्रेरित किया है, इतनी चोटों और प्रतिस्पर्धा के बावजूद, उन्होंने कुश्ती में महान ऊंचाइयों को हासिल किया और विभिन्न प्रतियोगिताओं में देश के लिए पदक हासिल किए।"

गौरतलब है कि सुशील कुमार ने कुछ महीने पहले दहिया को ओलंपिक पदक विजेता के रूप में चुना था और 57 किग्रा भार वर्ग के पहलवान उनकी उम्मीदों पर खरे उतरे।

23 वर्षीय को ओलंपियन अशोक कुमार गर्ग (Ashok Kumar Garg) और रोहतास सिंह दहिया (Rohtas Singh Dahiya) ने भी टोक्यो 2020 में गए भारतीय दल में सबसे पूर्ण पहलवान माना था। लेकिन, नाहरी के पहलवान इस तरह की तारीफों से प्रभावित नहीं हुए हैं और सुधार जारी रखना चाहते हैं।

"मुझे लगता है कि एक पहलवान के रूप में, जब तक हम खेलते हैं, हमें सीखते रहना चाहिए। मुझे लगता है कि ऐसे विशिष्ट क्षेत्र हैं, जहां मुझे काम करने और सुधार करने की आवश्यकता है। मेरा उद्देश्य अपने पूरे करियर में सीखते रहना है।"

पहले से ही अपने खाते में ओलंपिक रजत पदक के साथ वह पेरिस 2024 ओलंपिक में एक बेहतर तरीके से जाना चाहते हैं।

उन्होंने कहा, "मुकाबला (टोक्यो 2020 में) अब खत्म हो गया है। लेकिन, मैं अब अगले ओलंपिक में बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश करूंगा। रजत जीतने के बाद, बस एक चीज बाकी है, मैं कोशिश करूंगा और इसे अपने अगले ओलंपिक में स्वर्ण पदक में बदलूंगा।"

अगर, वह ऐसा कर पाते हैं, तो वह कई ओलंपिक में पदक जीतने वाले अपने नायक सुशील कुमार की बराबरी कर लेंगे।