ओलंपिक में व्यक्तिगत रजत पदक जीतने वाले दूसरे भारतीय पहलवान बने Ravi Kumar Dahiya

23 वर्षीय पहलवान ने यह उपलब्धि हासिल कर रचा इतिहास

टोक्यो 2020 में गुरुवार को 57 किग्रा भार वर्ग में पुरुषों की फ्रीस्टाइल कुश्ती में रजत पदक जीतने के बाद भारतीय पहलवान Ravi Kumar Dahiya का नाम हमेशा के लिए इतिहास के सुनहरे पन्नों में दर्ज हो गया है। Sushil Kumar भारत के पहले पहलवान थे जिन्होंने लंदन 2012 में पुरुषों की फ्रीस्टाइल कुश्ती 66 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीता था।

इतना ही नहीं, Ravi Kumar Dahiya ओलंपिक खेलों में पदक जीतने वाले सबसे कम उम्र के भारतीय पहलवान हैं। वह वर्तमान में 23 साल और सात महीने के हैं। इससे पहले Sakshi Malik ने 23 साल और 11 महीने की उम्र में रियो 2016 में कांस्य पदक जीतकर यह रिकॉर्ड बनाया था।

वह व्यक्तिगत स्पर्धा में ओलंपिक में रजत पदक जीतने वाले सातवें भारतीय हैं।

Dahiya को फाइनल में ROC के Zavur Uguev के खिलाफ 7-4 से हार का सामना करना पड़ा। ऐसे में वह पोडियम पर दूसरे स्थान पर रहे।

इससे पहले बुधवार को Dahiya ने तीन मुकाबले जीते जीतकर अपना रजत पदक तो पक्का कर लिया था। उन्होंने तकनीकी श्रेष्ठता से कोलंबिया के Oscar Tigreros के खिलाफ 13-2 से शानदार जीत हासिल की थी। इसके बाद एक और शानदार प्रदर्शन हुआ और उन्होंने बुल्गारिया के Georgi Vangelov को 14-2 से शिकस्त दी। इस मुकाबले में भी उन्हें तकनीकी श्रेष्ठता से जीत हासिल हुई थी।

हालांकि, सेमीफाइनल में कजाकिस्तान के Nurislam Sanayev के खिलाफ आने के साथ ही उनका चलना वास्तव में कठिन हो गया। बाउट में कजाकिस्तान के पहलवान ने 9-2 से बढ़त बना ली और ऐसा लग रहा था कि Dahiya खेल से बाहर हो जाएंगे और फाइनल में बर्थ बुक करने का मौका गंवा देंगे।

घड़ी में दो मिनट से भी कम समय के बावजूद Dahiya ने हार नहीं मानी और एक शानदार उलटफेर कर दिया। उन्होंने पांच अंक जीते और प्रतिद्वंद्वी की लय को बिगाड़ दिया। इसके बाद उन्होंने Sanayev पर दबाव बनाया और फाइनल में जगह बनाने के लिए 'फॉल' से जीत हासिल की।

Sushil Kumar, Yogeshwar Dutt और Sakshi Malik अन्य भारतीय हैं जिन्होंने ओलंपिक में पदक जीता है।

Sushil Kumar एकमात्र ऐसे पहलवान हैं, जिन्होंने बीजिंग 2008 और लंदन 2012 में लगातार पदक जीते हैं।