रवि कुमार दहिया दुनिया के सर्वश्रेष्ठ पहलवानों की टक्कर के पहलवान: अशोक कुमार गर्ग 

दहिया ने टोक्यो 2020 में पुरुषों की फ्रीस्टाइल 57 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीता। 

लेखक दिनेश चंद शर्मा
फोटो क्रेडिट KirenRijiju/Twitter

शानदार भारतीय पहलवान रवि कुमार दहिया (Ravi Kumar Dahiya) ने गुरुवार को टोक्यो 2020 में पुरुष फ्रीस्टाइल 57 किग्रा वर्ग के फाइनल में रूस के दो बार के विश्व चैंपियन जवुर यूगेव (Zaur Uguev) से 4-7 से हारने के बाद रजत पदक जीता।

ओलंपिक में अपनी पहली उपस्थिति में उनकी उल्लेखनीय उपलब्धि पर कुश्ती बिरादरी से उन्हें प्रशंसा मिली है। इसके साथ ही बार्सिलोना 1992 के ओलंपियन अशोक कुमार गर्ग (Ashok Kumar Garg) ने उन्हें 'विश्व स्तरीय पहलवान' बताया है।

गर्ग ने Olympics.com को बताया, "रवि कुमार दहिया दुनिया के किसी भी पहलवान की टक्कर के हैं। उन्होंने विश्व चैंपियनशिप और एशिया स्तर पर भी अच्छा प्रदर्शन किया है। हम उनसे (आने वाले आयोजनों में) सोने की उम्मीद कर सकते हैं। वह दुनिया के किसी भी पहलवान से कम नहीं हैं।"

"वह अगले ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतेंगे।"

1994 के राष्ट्रमंडल खेलों के रजत पदक विजेता (57 किग्रा) ने देखा कि बाउट के बीच में टाइम-आउट लेने की यूगेव की रणनीति ने उनके लिए फायदेमंद रही। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि बहुत कम भारतीय पहलवान रवि की तरह रूसी प्रतिद्वंद्वी से लड़ सकते हैं।

गर्ग ने कहा, "उनके प्रतिद्वंद्वी (जवुर यूगेव) ने बीच में 30-35 सेकंड के लिए आराम किया, जो उनके लिए काम कर गया। अगर, वह ऐसा नहीं करते, तो रवि जीत सकते थे। लेकिन, यह मेडिकल टाइम-आउट है और हम इसको लेकर कुछ नहीं सकते।"

टोक्यो 2020 में रजत पदक के साथ रवि कुमार दहिया।
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यूगेव ने अंतिम मुकाबले में शुरुआती बढ़त हासिल कर ली थी। मौजूदा विश्व चैंपियन ने 4-2 की बढ़त के साथ ब्रेक में प्रवेश किया। गर्ग का मानना है कि बाउट में उनका पलड़ा भारी था और जल्दी ही महत्वपूर्ण अंक हासिल कर डिफेंसिव होने में सक्षम थे।

गर्ग ने कहा, "उनके प्रतिद्वंद्वी ने पूरे मैच में रक्षात्मक खेल दिखाया। उन्होंने जल्दी अंक अर्जित किए और फिर रक्षात्मक हो गए। उन्होंने अपनी रणनीति और योजना का इस्तेमाल पूर्णता के लिए किया।"

सुशील कुमार (Sushil Kumar) द्वारा पहली बार लंदन 2012 ओलंपिक में उपलब्धि हासिल करने के बाद भारत के लिए कुश्ती में ओलंपिक में यह दूसरा रजत पदक था।