क्वीन एलिजाबेथ II: जानिए ब्रिटेन में सबसे लंबे समय तक राज करने वाली महारानी का खेलों से क्या था कनेक्शन

ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ II का 96 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने करीब सात दशक तक ब्रिटेन पर शासन किया। इस दौरान खेलों के प्रति उनके अद्भुत प्रेम को कई मौकों पर देखा गया।

लेखक रौशन प्रकाश वर्मा
फोटो क्रेडिट 2013 Getty Images

ब्रिटेन में सबसे लंबे समय तक राज करने वाली महारानी एलिजाबेथ II का गुरुवार, 8 सितंबर 2022 को 96 वर्ष की उम्र में स्कॉटलैंड के बालमोरल कैसल में निधन हो गया। महारानी ने 1952 में गद्दी संभालने के बाद से 70 साल तक ब्रिटेन पर शासन किया। 

उनके इस शासनकाल के दौरान पूरी दुनिया ने खेलों के प्रति उनका प्रेम देखा। 67 चैंपियंस लीग मैच, 70 एफए कप, 20 ओलंपिक खेल, 17 विश्व कप समेत कई आयोजनों में एलिजाबेथ II की मौजूदगी ने खेल और उसके इतिहास को बदलकर रख दिया।

क्वीन एलिजाबेथ II के स्पोर्ट कनेक्शन का इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि वह अपने बचपन में परिवार के साथ फुटबॉल मैच में गोलकीपर की भूमिका निभाया करती थीं। महारानी के निधन के बाद पूरे खेल जगत ने न सिर्फ अपनी शोक-संवेदना जाहिर की बल्कि इंग्लैंड समेत दुनिया भर में उनके सम्मान में कई मैचों को स्थगित भी कर दिया गया। इसी क्रम में इंग्लैंड और साउथ अफ्रीका के बीच हुआ टेस्ट मैच भी एक दिन के लिए टाल दिया गया था।

क्वीन एलिजाबेथ II को खेल जगत के दिग्गजों ने दी श्रद्धांजलि

ब्रिटेन की महारानी के निधन के बाद पूरी दुनिया में शोक की लहर है। गूगल इंडिया ने अपने लोगो को बेरंग कर दिया है तो वहीं भारत सरकार ने एक दिन के राजकीय शोक (11 सितंबर) के तहत अपने राष्ट्रध्वज को झुका दिया। दुनिया के अन्य देशों में भी महारानी के निधन पर गहरी शोक-संवेदना व्यक्त की जा रही है। 

इसी क्रम में खेल जगत के दिग्गजों ने भी क्वीन एलिजाबेथ II के निधन पर शोक जाहिर किया। क्वीन एलिजाबेथ द्वितीय खासकर फुटबॉल से काफी प्रेम करती थीं। 

अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) के अध्यक्ष थॉमस बाक ने कहा, "खेल और ओलंपिक आंदोलन ने एक बड़ा समर्थक खो दिया है। महामहिम ओलंपिक खेलों के दो संस्करण की घोषणा करने वाली एकमात्र राज्य प्रमुख थीं और वे लंदन 1948 ओलंपिक खेलों में खुद भी मौजूद थीं। ब्रिटिश ओलंपिक संघ की संरक्षक के रूप में उन्होंने ओलंपिक समुदाय को अमूल्य सलाह और सहायता की थी।"

इंग्लैंड के पूर्व कप्तान डेविड बेकहम ने कहा, “महारानी ने अपने देश की गरिमा और स्नेह के साथ सेवा की।"

मैनचेस्टर यूनाइटेड और पुर्तगाल के फॉरवर्ड खिलाड़ी क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने कहा, "यह उस देश के लिए एक अपूरणीय क्षति है जिसे मैंने घर कहना सीखा है।" 

ब्राजील के दिग्गज फुटबॉलर पेले ने कहा: "मैं क्वीन एलिजाबेथ II का उस वक्त से बहुत बड़ा प्रशंसक रहा हूं, जब मैंने उन्हें पहली बार 1968 में व्यक्तिगत रूप से देखा था। उस समय वह फुटबॉल के लिए हमारे प्यार को देखने के लिए ब्राजील आई थीं और उन्होंने माराकाना के खचाखच भरे स्टेडियम में फुटबॉल के जादू का अनुभव किया। उन्होंने कई पीढियों पर अपनी छाप छोड़ी है।"

स्विस दिग्गज रोजर फेडरर ने कहा, “उनकी सादगी, स्नेह और कर्तव्यनिष्ठा इतिहास के पन्नों में हमेशा दर्ज रहेगी।" वहीं टेनिस के एक अन्य दिग्गज राफेल नडाल ने भी उनके निधन पर अपनी "गहरी संवेदना" व्यक्त की।

भारत में राजकीय शोक की घोषणा

क्वीन एलिजाबेथ द्वितीय के निधन पर भारत सरकार ने भी देश में 11 सितंबर को एकदिवसीय राजकीय शोक का ऐलान किया। सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया कि देश भर में उन सभी भवनों पर, जहां राष्ट्रीय ध्वज नियमित रूप से फहराया जाता है, वहां राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा और इस दिन कोई आधिकारिक मनोरंजन गतिविधि आयोजित नहीं होगी।

क्वीन एलिजाबेथ II और भारतीय क्रिकेट टीम की पहली जीत

ब्रिटिश हुकुमत के अंदर ही भारतीय क्रिकेट टीम ने इंटरनेशनल क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था। साल 1932 में भारत ने इंग्लैंड के खिलाफ अपना पहले टेस्ट मैच खेला था। 

हालांकि, उन्हें पहली इंटरनेशनल जीत साल 1952 में तब मिली जब क्वीन एलिजाबेथ II का शासन शुरू हुआ। दरअसल, 6 फरवरी 1952 को मद्रास में भारत और इंग्लैंड के बीच टेस्ट मैच शुरू हुआ। ब्रिटेन के महाराजा जॉर्ज षष्ठम का निधन भी इसी दिन हो गया था। ऐसे में अगले दिन का मैच नहीं हो पाया था। जॉर्ज षष्ठम का निधन होते ही ब्रिटेन में क्वीन एलिजाबेथ II का शासन शुरू हो गया। हालांकि, एलिजाबेथ II की ताजपोशी जून, 1952 में हुई थी।

मैच फिर से शुरू हुआ तो भारत ने मद्रास टेस्ट में पारी और 8 रनों से इंग्लैंड के खिलाफ जीत दर्ज की। इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 266 रन बनाए थे। जवाब में भारत ने अपनी पहली पारी में 457 रन बनाए। इंग्लैंड दूसरी पारी में सिर्फ 183 पर ऑलआउट हो गया। यह इंटरनेशनल टेस्ट क्रिकेट में भारत की पहली जीत थी जो एलिजाबेथ II के शासन में आने के बाद मिली थी। 

क्वीन एलिजाबेथ II के सत्ता में आने से लेकर उनके निधन तक हर मैच भारतीय टीम ने ब्रिटेन की महारानी के कार्यकाल में ही जीता है। इस बात से यह स्पष्ट है कि उनका कार्यकाल बतौर महारानी कितना लंबा रहा है। दिलचस्प बात ये है कि 8 सितंबर 2022 को जब उनका निधन हुआ तब भारत ने एशिया कप 2022 में अफगानिस्तान को मात दी।

इसके अलावा अपने लंबे कार्यकाल में क्वीन एलिजाबेथ II ने कई भारतीय क्रिकेटर्स से मुलाकात भी की है, जिसमें विराट कोहली समेत अन्य खिलाड़ियों का नाम शामिल है। इंग्लैंड में आयोजित क्रिकेट विश्व कप 2019 के दौरान बतौर भारतीय कप्तान विराट कोहली ने क्वीन एलिजाबेथ से मुलाकात की थी।

क्वीन एलिजाबेथ II का फुटबॉल कनेक्शन

एलिजाबेथ II को खेल प्रेम विरासत में उनके परिवार से ही मिली। ब्रिटिश शाही घराने के विशेषज्ञ रॉबर्ट जॉब्सन के अनुसार, महारानी अपने बचपन में बाल्मोरल में परिवार के अधिकांश फुटबॉल मैच में बतौर गोलकीपर खेलती थीं। उनका फुटबॉल से खास लगाव था। दिलचस्प बात ये भी है कि साल 1953 में जिस दिन क्वीन एलिजाबेथ II को क्राउन पहनाया गया था, उसी दिन एफए कप का फाइनल भी खेला गया था। 

यह 2 मई का समय था और ग्रेट ब्रिटेन में कुछ ऐसा हो रहा था जिसने अधिक से अधिक लोगों को टेलीविजन खरीदने के लिए प्रेरित किया। ब्रिटेन की नई महारानी ब्लैकपूल के कप्तान और इतिहास के महानतम खिलाडियों में से एक - स्टेनली मैथ्यूज को एक कप से सम्मानित कर रही थीं। इसके बाद, वेम्बले बॉक्स में महारानी की उपस्थिति नियमित हो गई जब तक कि इंग्लैंड ने 1966 में अपना एकमात्र विश्व कप नहीं जीत लिया। उस समय बॉबी मूर ने एलिजाबेथ II के हाथ से जूल्स रिमेट कप हासिल किया।

एलिजाबेथ के शासनकाल की एक और यादगार घटना के बारे में सोचकर प्रसिद्ध थ्री लायंस (इंग्लैंड की नेशनल फुटबॉल टीम) के कप्तान अक्सर हंसते थे। मूरे कहते हैं कि महारानी से कप लेते हुए "मैंने अपने हाथों को देखा... और वे गंदे थे!" मैंने महारानी के बेदाग सफेद दस्तानों के गंदे हो जाने के डर से अपने हाथ को जल्दबाजी में साफ किया था।

क्वीन एलिजाबेथ II की दो पसंदीदा टीमें

ब्रिटिश रॉयल हाउस से जुड़े व्यक्तियों के अनुसार, 1960 के दशक में एलिजाबेथ द्वितीय को वेस्ट हैम की टीम पसंद थी, ठीक उसी समय जब बॉबी मूरे कप्तान थे।

लेकिन बाद में, 2007 में, एफए कप जीतने के बाद बकिंघम पैलेस में उन्होंने आर्सेन वेंगर की टीम (आर्सेनल) के लिए बहुत सहानुभूति व्यक्त की थी। इसके बाद वहां मौजूद सेस्क फाब्रेगस ने कहा था कि महारानी आर्सेनल की जबरदस्त प्रशंसक हैं।

हालांकि, आर्सेनल की टीम के प्रति ब्रिटिश राजशाही का समर्थन उस समय से जुड़ा हुआ था जब वेंगर ने “इनविंसिबल” नाम की टीम का नेतृत्व करते हुए प्रीमियर लीग जीता था। इस जीत के बाद उन्हें आधिकारिक स्वागत के लिए प्रिंस चार्ल्स से मिलने के लिए आमंत्रित किया गया था।

घोड़ों के लिए उनका प्यार

फुटबॉल की दुनिया से अपने बेहतरीन लगाव के साथ ही महारानी को घोड़ों के प्रति भी काफी दिलचस्पी थी। एलिजाबेथ II ने अपने पूरे शासनकाल के दौरान अच्छी नस्ल के घोड़े खरीदे। उन्होंने इसका इस्तेमाल एप्सन डर्बी, द ओक्स, सेंट लीगर जैसी ब्रिटिश क्लासिक रेस जीतने के साथ-साथ रॉयल एस्कॉट में गोल्ड कप जीतने के लिए भी किया। 

महारानी एलिजाबेथ II ने घुड़सवारी के अपने जुनून को जीवन भर बरकरार रखा। उन्हें अक्सर घुड़सवारी करते हुए देखा जाता था।

क्वीन एलिजाबेथ II का अंतिम संस्कार

ब्रिटेन की दिवंगत महारानी एलिजाबेथ II का अंतिम संस्कार सुबह 11 बजे वेस्टमिंस्टर एब्बे में 19 सितंबर को होगा। इस बात की जानकारी बकिंघम पैलेस ने दी है। 

महारानी का अंतिम संस्कार साल 1965 में उनके पहले प्रधानमंत्री सर विंस्टन चर्चिल के बाद आयोजित होने वाला पहला राजकीय अंतिम संस्कार होगा। हालांकि, उनके पिता जॉर्ज VI ने अपनी सेवा के लिए विंडसर कैसल में सेंट जॉर्ज चैपल को चुना था। लेकिन, उनकी बेटी के शरीर को वेस्टमिंस्टर एब्बे ले जाया जाएगा, जहां उनकी शादी हुई थी और उन्हें महारानी का ताज पहनाया गया। इसके बाद विंडसर को शाही तिजोरी में रखा जाएगा।

ओलंपिक जाएं। यह सब पायें।

मुफ्त लाइव खेल आयोजन | सीरीज़ के लिए असीमित एक्सेस | ओलंपिक के बेमिसाल समाचार और हाइलाइट्स