'जेवलिन थ्रो ने मेरी जिंदगी बदल दी'- सुमित अंतिल 

अंतिल ने 2017 में पैरा स्पोर्ट को अपनाया और टोक्यो पैरालंपिक में स्वर्ण पदक जीतने के साथ तीन विश्व रिकॉर्ड बनाए। 

लेखक दिनेश चंद शर्मा
फोटो क्रेडिट Getty Images

अपने पहले पैरालंपिक खेलों में स्वर्ण पदक जीतने के करीब एक महीने बाद भी सुमित अंतिल (Sumit Antil) के पैर जमीन पर नहीं पड़ रहे। हरियाणा के 23 वर्षीय खिलाड़ी ने पहलवान के रूप में शुरुआत की थी और टोक्यो पैरालंपिक में भारत के ऐतिहासिक अभियान के पोस्टर बॉय बन गए। जिसमें देश ने 19 पदक जीते हैं, जो इससे पहले हुए सभी पैरालंपिक में पदकों की कुल संख्या से भी ज्यादा हैं। 

अंतिल ने Olympics.com को बताया, "मैंने टोक्यो में पदक जीता, लेकिन हमें जो स्वागत मिला वो शानदार था। मेरे राज्य के मुख्यमंत्री हवाई अड्डे पर हमें लेने आए, वहां भारी भीड़ हमारे स्वागत के लिए मौजूद थी। गांव में मेरे लिए एक जुलूस निकाला गया। यह पदक की अहमियत को बढ़ा देता है और यह आपको और भी खास अहसास कराता है। ये मेरे जीवन के कुछ बेहतरीन पल हैं।" 

अंतिल ने पिछले महीने टोक्यो पैरालंपिक में 68.55 मीटर के थ्रो के साथ F64 इवेंट में तीन बार विश्व रिकॉर्ड तोड़ा और स्वर्ण पदक अपने नाम किया। भले ही अंतिल विश्व चैम्पियनशिप पदक विजेता हैं, लेकिन किसी ने भी टोक्यो में उनके रिकॉर्ड-ब्रेकिंग प्रदर्शन की उम्मीद नहीं की थी। 

वे मानते हैं, "जब आप ओलंपिक या पैरालंपिक जैसी प्रतियोगिताओं की बात करते हैं, तो चीजें बहुत अनिश्चित होती हैं। उस दिन क्या होगा, इसका कोई पूर्वानुमान नहीं लगा सकता। मैं पैरालंपिक की दौड़ में बहुत अच्छा कर रहा था, इसलिए मुझे पता था कि मैं स्वर्ण पदक का दावेदार हूं। लेकिन, मुझे यकीन नहीं था। मैं एक पदक जीतने के लिए बहुत आश्वस्त था, लेकिन यह स्वर्ण पदक होगा, इसका अंदाजा नहीं था।” 

पोडियम के शीर्ष पर पहुंचने की अंतिल की रफ्तार तेज रही है। 

भारतीय कुश्ती के उद्गम स्थल सोनीपत में जन्मे अंतिल का इस खेल से लगाव स्वाभाविक था। चार बहन-भाइयों में सबसे छोटे और अकेले लड़के अंतिल कुश्ती में अपना करियर बनाने और स्पोर्ट्स कोटा के जरिए भारतीय सेना में जगह बनाने की उम्मीद कर रहे थे। लेकिन, 2015 में उनकी मोटरसाइकिल के तेज रफ्तार ट्रक से टकरा जाने के बाद उनके सपने चकनाचूर हो गए और उनका बायां पैर काटना पड़ा।

अंतिल ने कहा, "मैं दिसंबर 2017 में पैरा स्पोर्ट में शामिल हुआ। मुझे पता है कि चार साल एक नया खेल सीखने और उसमें स्वर्ण पदक जीतने के लिए ज्यादा समय नहीं है। लेकिन, इन चार सालों में मैंने कड़ी मेहनत की है। संघर्ष और दर्द झेला तथा त्याग किया है। मैंने कहीं भी जाना बंद कर दिया था। मैं चार साल तक केवल खेल पर केंद्रित रहा। जब मैं पैरालंपिक के लिए गया था, तब मुझे पता था कि मैं अपना सर्वश्रेष्ठ दूंगा, लेकिन मुझे नहीं लगता कि मैं इससे और अधिक मेहनत कर सकता था।” 

हालांकि, उन्होंने अनिच्छा से जेवलिन थ्रो को अपनाया, लेकिन खेल ने उनके जीवन में सकारात्मकता और उद्देश्य पैदा करने में मदद की। 

अंतिल ने याद करते हुए कहा, “मेरे गांव में एक पैरा एथलीट है, राजकुमार हुड्डा। उन्होंने मुझे पैरा स्पोर्ट के बारे में बताया। उन्होंने मुझे बताया कि मेरे पास अच्छा प्रदर्शन करने के लिए लंबाई (6’2) और अच्छा शरीर है। पहले मुझे इसमें कोई दिलचस्पी नहीं थी।”  

“दुर्घटना के बाद मैंने कोई खेल नहीं खेला था और बहुत अनफिट हो गया था। जेवलिन ने मेरी जिंदगी बदल दी। मैं खुश था कि मैं खेल में कुछ कर सका। मैं शारीरिक रूप से बेहतर, अधिक सकारात्मक, खुश महसूस करने लगा। 

“एक पहलवान अनुशासन का जीवन जीता है। क्योंकि मैं कुश्ती में था, मुझे पता था कि किसी खेल में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए क्या करना पड़ता है। मेरे पास ताकत और ऊपरी शरीर की स्ट्रेंथ भी थी। यही वह बेस है, जिसके साथ मैंने शुरुआत की थी। जब मैं पैरा स्पोर्ट में शामिल हुआ, तो मैं पूरी तरह से अपनी तकनीक पर ध्यान केंद्रित कर सका।” 

अगर, कुश्ती ने उन्हें खेल में एक मजबूत नींव प्रदान की थी, तो अंतिल का ध्यान और कार्य नैतिकता ने उन्हें दूसरों से अलग बना दिया। एक उज्ज्वल संभावना, अंतिल को सरकार और कॉर्पोरेट प्रायोजकों से वित्त और संसाधनों के मामले में सहयोग मिला। उन्होंने मुख्य रूप से चलने और अन्य दैनिक गतिविधियों के लिए बनाए गए कृत्रिम अंग पर शुरुआत की थी, लेकिन उनके खेल की शारीरिक जरूरतों ने इसे बहुत बार तोड़ दिया। 

अंतिल ने कहा, "मैं 2019 में TOPS में शामिल हो गया, इसलिए मैं उन्नत प्रोस्थेटिक्स प्राप्त कर सकता था। प्रतियोगिता में हम जिस कृत्रिम अंग का उपयोग करते हैं, उसमें कोई लचकदार क्रिया नहीं होनी चाहिए। हमें एक स्थिर ब्लॉक की आवश्यकता होती है, जिस पर उतरना और फेंकना है। लचकदार क्रिया ताकत को कमजोर कर देती है। यह एक बहुत ही अनुकूलित पैर है। मुझे इसे तलाशने में भी काफी समय लगा। मुझे सहयोग करने वाली गोस्पोर्ट्स फाउंडेशन ने मुझे सभी शोधों में मदद की और मेरे खेल की आवश्यकताओं के अनुसार एक कृत्रिम अंक को खरीदने में मदद की।” 

प्रोस्थेटिक्स उसे लैंडिंग में मदद करते हैं और उसे थ्रो के लिए स्थिरता देते हैं, लेकिन वे अभी भी दर्द देते हैं। 

उन्होंने कहा, "हमें अल्सर हो जाता है, अब भी बहुत बार खरोंच आती है। मुझे लगता है कि दर्द को हराना मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि रही है।" 

हालांकि, अंतिल ने इस चुनौती को स्वीकार कर लिया है। 

भले ही उन्हें वर्तमान में देश के सभी कोनों से बुलाया और सम्मानित किया जा रहा है, लेकिन उन्हें अगले साल विश्व चैंपियनशिप और एशियाई खेलों के लिए तैयार होने के लिए अक्टूबर के शुरू में प्रशिक्षण पर वापस आने की उम्मीद है। पहले ही 68.66 मीटर थ्रो करने के बाद, वह आगे बढ़ना चाहते हैं। उन्होंने कहा, "मेरा अगला लक्ष्य 75 मीटर है।"

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