कैसा रहा है प्रियंका गोस्वामी का जिमनास्ट से ओलंपिक रेसवॉकर बनने तक का सफर 

दुर्घटना से रेसवॉकिंग के दौरान गिरने के बाद 25 वर्षीय टोक्यो 2020 में अपने पहले ओलंपिक में भाग लेंगी। 

लेखक दिनेश चंद शर्मा
फोटो क्रेडिट Twitter/SAI Media

भारत से 20 किमी से अधिक दूरी की सबसे तेज महिला रेसवॉकर के रूप में प्रियंका गोस्वामी (Priyanka Goswami)23 जुलाई से शुरू होने वाले टोक्यो 2020 में पहली बार ओलंपिक में भाग लेंगी। हालांकि, 25 वर्षीय के लिए ओलंपिक के लिए लंबी सड़क स्कूल में कुछ नया करने के लिए अपना हाथ आजमाने के निर्णय के साथ शुरू हुई थी।

उत्तर प्रदेश के मेरठ में जिमनास्टिक कोच राजीव जिंदल (Rajeev Jindal) ने पहली बार उन्हें ग्यारहवीं कक्षा के दौरान स्कूल की प्रार्थना सभा में देखा था।

गोस्वामी ने Olympics.com को बताया था, "उन्होंने पूछा कि क्या किसी को जिमनास्टिक में दिलचस्पी है। मैं हमेशा नई चीजों को अजमाने की कोशिश करने और पाठ्येतर गतिविधियों में भाग लेने के लिए उत्साहित रहती थी। इसलिए, बिना यह जाने कि जिम्नास्टिक क्या है, मैंने अपना हाथ उठा दिया।”

हालांकि, खेल के लिए यह बिल्कुल नया था। उसने जल्द ही इसमें महारथ हासिल कर ली। कुछ ही महीनों में उसे राज्य की राजधानी लखनऊ के स्पोर्ट्स हॉस्टल में जगह मिल गई। लेकिन, गोस्वामी याद है कि वहां का अनुभव ज्यादा मजेदार नहीं था।

उन्होंने कहा, "मैं बीम से डरती थी। मैं इसे आगे जारी रखने के लिए ज्यादा उत्सुक नहीं थी। इसलिए, मैंने करीब पांच-छह महीने बाद स्पोर्ट्स हॉस्टल छोड़ दिया और घर लौट आई।”

उनके पिता मदनपाल गोस्वामी मेरठ में बस कंडक्टर थे और उनकी दुनिया में खेल करियर की पहली पसंद नहीं था। उन्हें मेरठ के कैलाश प्रकाश स्पोर्ट्स स्टेडियम में लौटने और जिंदल के सामने जाने से डर लगता था, जिन्होंने उसे जिमनास्टिक की मूल बातें सिखाई थीं।

वह कहती हैं, "मैं हमेशा एथलेटिक्स में अपना हाथ आजमाना चाहती थी। जब मैं 11वीं कक्षा में थी और मानसिक रूप से थोड़ा मजबूत थी। किसी तरह स्टेडियम में लौटने की हिम्मत जुटाई। लेकिन, मैं कोच (जिंदल) से छिप जाती थी।”

गोस्वामी ने एथलेटिक्स में ट्रैक इवेंट के साथ शुरुआत की थी, लेकिन उन्होंने जिला स्तर की चैंपियनशिप में इवेंट में शामिल होने के बाद रेसवॉकिंग में अपना स्थान पाया। क्योंकि, केवल तीन अन्य लड़कियां ही इस इवेंट में भाग ले रही थीं। उनका मानना ​​​​है कि जिमनास्टिक ने उन्हें एथलेटिक आधार और रेसवॉकिंग के लिए आवश्यक लचीलापन दिया था।

गोस्वामी ने उस इवेंट में कांस्य पदक जीता था और तब से वह इस खेल से जुड़े हुए हैं। उसने केरल में 2015 के राष्ट्रीय खेलों में सीनियर स्तर पर पदार्पण करते हुए एक और कांस्य पदक जीता।

उन्होंने कहा, "पिछले 10 सालों से रेसवॉकिंग कर रही हूं। लेकिन, यह तब तक कोई मायने नहीं रखता, जब तक आप सीनियर चैंपियनशिप में प्रतिस्पर्धा करना शुरू नहीं करते हैं। क्या आप जानते हैं कि यह कितनी जरूरी है।"

पिछले साल रांची में राष्ट्रीय रेसवॉकिंग चैंपियनशिप में गोस्वामी ओलंपिक क्वालीफाइंग समय से 34 सेकेंड से चूक गई थीं। लेकिन, महामारी के कारण आये व्यवधान को दूर करते हुए उन्होंने इस साल फरवरी में प्रतियोगिता में वापसी की और राष्ट्रीय रिकॉर्ड के साथ क्वालीफाइंग समय तक पहुंच गईं।

प्रियंका ने 1:28:45 का समय निकालते हुए भावना जाट (Bhawna Jat) द्वारा 1:29:54 समय के साथ बनाये राष्ट्रीय रिकॉर्ड को तोड़ा, जो एक मिनट, 10 सेकेंड ज्यादा था। उन्होंने महिलाओं की 20 किमी रेसवॉकिंग स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता।

टोक्यो 2020 की तैयारी के लिए 25 वर्षीय सप्ताह में करीब 250 किमी चलती हैं।

उन्होंने कहा, “इसके अलावा हम जिम सेशन में जाते हैं। प्रमुख रूप से हल्के वजन के साथ व्यायाम करते हैं। हमें मांसपेशियां को बड़ा नहीं बनाना हैं, बल्कि ताकत पर काम करना है। रिकवरी के लिए साप्ताहिक सम्पूर्ण कसरत और तैराकी करते हैं।”

वह राष्ट्रीय रिकॉर्ड से 90 सेकेंड से अधिक बचाने और ओलंपिक के लिए 1:27 के समय को पाने की उम्मीद कर रही हैं

टोक्यो 2020 में कब एक्शन में नजर आएंगी प्रियंका गोस्वामी?

प्रियंका गोस्वामी शुक्रवार 6 अगस्त को महिलाओं की 20 किमी रेसवॉक में मुकाबला करेंगी।।