सुहास यतिराज ने तोड़ा मिथक, कहा- ‘पढ़ाई और खेल दोनों में उत्कृष्टता हासिल की जा सकती है’  

टोक्यो पैरालंपिक रजत पदक विजेता भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी हैं... 

लेखक दिनेश चंद शर्मा
फोटो क्रेडिट 2021 Getty Images

सुहास यतिराज (Suhas Yathiraj) 'खेल आपको खुद पर जीतने में मदद करता है' के सिद्धांत पर जीते हैं और टोक्यो पैरालंपिक की बैडमिंटन स्पर्धा में रजत पदक जीतकर अपने शब्दों का सही साबित कर दिया। उनकी उपलब्धि ने भारत में एक सामान्य पुरानी सोच कि पढ़ाई के साथ-साथ खेल में बराबर की उत्कृष्टता हासिल नहीं की जा सकती, को तोड़ने में भी मदद की है। 

यतिराज भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में एक अधिकारी हैं, जिन्होंने पहले ही प्रयास में देश की सबसे मुश्किल परीक्षाओं में से एक में सफलता प्राप्त की। अभ्यर्थी अक्सर सिविल सेवा परीक्षाओं में उत्कृष्टता की खोज में कई साल लगा देते हैं और कई बार इसमें भाग लेते हैं। 

यतिराज ने 2004 में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, सुरथकल, कर्नाटक से कंप्यूटर इंजीनियरिंग में स्नातक की उपाधि प्राप्त की। यतिराज ने 2006 में सिविल सेवा परीक्षा पास की और फिर 2007 में एक IAS अधिकारी के रूप में अपना करियर शुरू किया। 

2015-16 में ही वह एक पेशेवर पैरा-बैडमिंटन खिलाड़ी बन गए और तब से गौतम बुद्ध नगर के जिला मजिस्ट्रेट के रूप में अपने कर्त्तव्य और एक खिलाड़ी के रूप में अपने प्रशिक्षण को बखूबी अंजाम दिया। 

यतिराज के टखने में खराबी है, उन्होंने बैडमिंटन में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए कई चुनौतियों का सामना किया। उनके नाम कई अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियां दर्ज हैं। 2016 एशियाई पैरा बैडमिंटन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर वह वैश्विक स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने और पदक जीतने वाले पहले भारतीय प्रशासनिक अधिकारी बने। यह सफर उन्हें पैरालंपिक में ले गया है, जहां उन्हें फ्रांस के लुकास मजूर (Lucas Mazur) के खिलाफ SL4 श्रेणी के पुरुष एकल के फाइनल में हार का सामना करना पड़ा था।

भारत को रजत पदक दिलाने वाले सुहास यतिराज (बाएं)।
फोटो क्रेडिट 2021 Getty Images

यतिराज ने Olympics.com को बताया, "मुझे लगता है कि इस (टोक्यो पैरालंपिक) पदक का जश्न पूरे देश ने मनाया। नई दिल्ली हवाई अड्डे पर हमारा जबरदस्त स्वागत हुआ। 

"मुझे लगता है कि यह मिथक टूट गया है कि पढ़ाई और खेल को एक साथ जारी नहीं रखा जा सकता है। कई लोग हैरान हैं कि एक व्यक्ति पढ़ाई और खेल दोनों में अच्छा हो सकता है।" 

उन्होंने कहा, "माता-पिता भी चाहते हैं कि उनके बच्चे पढ़ाई और खेल में अच्छे हों। वे पढ़ाई को अधिक स्थायी विकल्प के रूप में देखते हैं। मुझे लगता है कि बहुत से युवा कम से कम दोनों को जारी रखने के लिए आत्मविश्वास प्राप्त कर सकते हैं।" 

पैरालंपिक पदक की उपलब्धि को लेकर घर में जश्न मनाना, उन्हें यह भी विश्वास दिलाता है कि टोक्यो ओलंपिक और पैरालंपिक भारत के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण थे, क्योंकि इसने एक खेल संस्कृति को विकसित करने में मदद की। 

यतिराज ने कहा, "हर कोई जो समर्थन, स्नेह जता रहा है, वह बहुत अच्छा है। एक समय था, जब देश में मशहूर हस्तियां फिल्मी सितारे और क्रिकेटर हुआ करते थे।" 

उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि अब टोक्यो ओलंपिक और पैरालंपिक भारत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण क्षण रहा है, क्योंकि ओलंपियन और पैरालपियनों को, जो प्रशंसा और पहचान मिल रही है। यह निश्चित रूप से दिल को छू लेने वाला है।" 

बैडमिंटन उनके लिए एक आध्यात्मिक अनुभव बना हुआ है। हालांकि, वह खेल के प्रति अपने दृष्टिकोण में बेहद व्यवस्थित हैं और इसके महत्वपूर्ण विवरणों पर काम करना पसंद करते हैं। 

यतिराज ने समझाया, "बैडमिंटन मेरे लिए ध्यान है। मैं बेहद व्यवस्थित हूं। मैं अपने आक्रमण कौशल, रक्षा कौशल, अपनी पहुंच विकसित करता हूं। मैं कमजोर हिस्से पर बारीकी से काम करता हूं और यह भी कि मैं मैच में कैसे सामना करूंगा। मैं अपने दिमाग में मैचों की कल्पना करता हूं। मेरे पास ऐसे तरीके हैं, जो मुझे खेलते समय आराम देते हैं।"  

इसके अलावा, वो सोशल मीडिया पर सक्रिय नहीं हैं और अपनी पेशेवर भूमिका के कारण कुछ हद तक इससे दूर रहते हैं। क्योंकि, वह मानते हैं कि यह उनके जीवन में गुणों को नहीं बढ़ाता है। 

यतिराज ने कहा, "मैं एक अलग-थलग रहने वाला व्यक्ति नहीं हूं। प्रशासनिक नौकरी में होने के कारण मैंने जानबूझकर खुद को सोशल मीडिया से दूर रखा है। क्योंकि, मुझे इसके माध्यम से कोई मूल्यवर्धन नहीं दिखता है। मेरा हमेशा से मानना है कि हमें प्रसिद्धि, पैसा या किसी भी और चीज के लिए पीछे नहीं हटना चाहिए।”  

38 वर्षीय यतिराज का मानना है कि टोक्यो पैरालंपिक में रजत पदक जीतना, उन्हें 2024 पेरिस पैरालंपिक में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करेगा।

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