स्प्रिंट क्वीन पीटी उषा के कोच और मेंटॉर ओम नांबियार का 89 साल की उम्र में निधन

भारत के पहले द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेताओं में से एक हैं ओम नांबियार, 1980 और 90 के दशक के दौरान उन्होंने पीटी उषा के खेल को निखारा था।

लेखक अभिषेक गिरी
फोटो क्रेडिट PT Usha/ Twitter

भारत की स्प्रिंट क्वीन पीटी उषा (PT Usha) के खेल को निखारने वाले और कोचिंग का श्रेय पाने वाले भारतीय एथलेटिक्स कोच ओम नांबियार (OM Nambiar) का गुरुवार को 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया।

पूर्व ओलंपियन और कई बार की एशियाई चैंपियन स्प्रिंटर पीटी उषा ने अपने गुरु के निधन पर शोक व्यक्त किया है और कहा कि, “मेरे गुरु, मेरे कोच, मेरे मार्गदर्शक का निधन एक शून्य छोड़ने वाला है जिसे कभी भरा नहीं जा सकता। जीवन में उनके अमूल्य योगदान को व्यक्त करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं है। इस खबर से मैं काफी व्यथित हूं, ओम नांबियार सर हम आपको याद करेंगे।"

ओम नांबियार का जन्म 1932 में केरल के कन्नूर में पय्योली के पास एक छोटे से गाँव में हुआ था, संयोग से पीटी उषा का ये पैतृक स्थान भी था। आपको बता दे ओथायोथु माधवन नांबियार अपने कॉलेज के दिनों से ही ट्रैक और फील्ड एथलीट थे।

ओम नांबियार 1955 में भारतीय वायु सेना में शामिल हुए थे, वायु सेना को अपनी सेवा देने के साथ-साथ उन्होंने अपने एथलेटिक्स करियर को भी जारी रखा।

इस दौरान राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में सफलताओं के बावजूद उनका एथेलेटिक्स करियर ज्यादा प्रभावशाली नहीं रहा, भारत की तरफ से प्रतिनिधित्व करने का सपना उनका एक अधूरा सपना बनकर रह गया।

लेकिन, एक कोच के रूप में ओम नांबियार ने उस सपने को पूरी तरह से जीया और बहुत कुछ हासिल किया।

ओम नांबियार ने पटियाला में प्रसिद्ध राष्ट्रीय खेल संस्थान (एनआईएस) से अपनी कोचिंग की डिग्री हासिल की और (सेना, नौसेना, वायु सेना) के एथलीटों को प्रशिक्षण देकर अपने करियर की शुरुआत की।

केरल स्पोर्ट्स काउंसिल की तरफ से एक कोच के रूप में सेवा करने का उन्हें शानदार मौका मिला, और 1970 में वह अपने मूल राज्य में वापस आ गए।

इस दौरान एक दिन 1976 में कन्नूर डिवीजन के लिए सेलेक्शन ट्रायल के बाद पुरस्कार समारोह में भाग लेने के दौरान उन्होंने पीटी उषा को पहली बार देखा।

इस मुलाकात के बाद पीटी ऊषा को सही मार्गदर्शन देने वाला कोच मिल गया, इसके बाद पीटी उषा ट्रैक पर उड़ान भरना शुरू कर दिया, और वो अपने दौर की प्रमुख एशियाई स्प्रिंटर्स में से एक बन गई। उनकी कामयाबी के पीछे कोच ओम नांबियार का अहम रोल था।

पीटी उषा ने साल 1984 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक में 400 मीटर बाधा दौड़ में हिस्सा लिया था, जहां वह एक सेकेंड के 1/100 वें स्थान पर कांस्य पदक से चूक गई। इस दौड़ के बाद पीटी ऊषा भारतीय एथलेटिक्स की क्वीन बन गई, और इतिहास की कहानियों में उनका नाम प्रसिद्ध हो गया।

1985 में ओम नांबियार को सम्मान के तौर पर द्रोणाचार्य पुरस्कार (खेल कोचों के लिए भारत की सर्वोच्च मान्यता) के तीन श्रेणियों में से एक के रूप में नामित किया गया था। बता दें कि उन्हें अक्सर भारत के पहले द्रोणाचार्य के रूप में याद किया जाता है।

ओम नांबियार ने पीटी उषा के शानदार करियर के दौरान उनका मार्गदर्शन किया और देश की कई अन्य होनहार प्रतिभाओं को भी निखारने में अहम योगदान दिया।

2021 में ओम नांबियार को भारत के चौथे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म श्री से सम्मानित किया गया था।

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