ओलंपिक का संक्षेप में पुनरावलोकन: जानिए, टोक्यो 2020 में भारत की पहली बार की उपलब्धियां 

एथलेटिक्स से लेकर तलवारबाजी तक भारत ने टोक्यो 2020 ओलंपिक में नए कीर्तिमान गढ़े हैं।  

लेखक दिनेश चंद शर्मा
फोटो क्रेडिट 2021 Getty Images

नीरज चोपड़ा (Neeraj Chopra) ने भारतीय ओलंपिक दल के लिए अंतिम दिन स्वर्ण पदक जीतकर भारत के लिए टोक्यो 2020 का समापन बड़ी उपलब्धि के साथ किया।

23 वर्षीय के प्रदर्शन ने देश के लिए एक सफल खेलों का निष्कर्ष प्रस्तुत किया। टोक्यो 2020 भारत का सबसे सफल ओलंपिक साबित हुआ, क्योंकि इसमें देश ने सात पदक जीते हैं।

एथलेटिक्स से लेकर तलवारबाजी और घुड़सवारी में भारत ने टोक्यो 2020 ओलंपिक में नए कीर्तिमान गढ़े हैं।आइए, जानें टोक्यो में भारत द्वारा पहली बार हासिल की गई कुछ महत्वपूर्ण उपलब्धियों के बारे में:

नीरज चोपड़ा (Neeraj Chopra) : पहला एथलेटिक्स पदक (स्वर्ण)

चोपड़ा ने ओलंपिक में देशवासियों का 'सबसे लंबा इंतजार' खत्म कर दिया। आखिरकार, उन्होंने स्वतंत्र भारत को ट्रैक और फील्ड में अपना पहला पदक दिलाया।

वह क्वालीफिकेशन के दिन से ही सबसे आगे थे और उन्होंने फाइनल में अपने दूसरे प्रयास में ही विजयी थ्रो दर्ज किया। 23 वर्षीय ने 87.58 मीटर जेवलिन थ्रो करके स्वर्ण पदक हासिल किया।

ट्रैक दिग्गज पीटी उषा (PT Usha) ने Olympics.com को बताया, "ओलंपिक में भारत का सबसे लंबा इंतजार खत्म हो गया है। यह एक बड़ी उपलब्धि है। हम सभी ने एथलेटिक्स में ओलंपिक पदक के लिए इतना लंबा इंतजार किया है। ओलंपिक एथलेटिक्स में पदक जीतना सबसे कठिन काम है। नीरज ने अविश्वसनीय काम किया है।"

महिला हॉकी टीम (Womens hockey team): पहली बार ओलंपिक सेमीफाइनल

भारतीय महिला हॉकी टीम ने अपनी पुरानी छवि को मिटाते हुए ओलंपिक में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया।

ओलंपिक खेलों में अपनी तीसरी उपस्थिति में भारत ने कुछ अविश्वसनीय, निडर प्रदर्शनों के साथ सेमीफाइनल में जगह बनाई। क्वार्टर फ़ाइनल में ऑस्ट्रेलिया पर 1-0 से उनकी धैर्यपूर्ण और संयमित जीत ने भारतीय महिला हॉकी टीम को बहुत ऊंचाई पर पहुंचाया है।

उन्होंने कांस्य पदक के मुकाबले में गत चैंपियन ग्रेट ब्रिटेन का सामना किया और 3-4 से हारने के बाद पोडियम पर स्थान पाने से चूक गए।

पीवी सिंधु (PV Sindhu): दो ओलंपिक में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला

हमेशा विश्वसनीय पीवी सिंधु ने अपने खाते में एक और प्रतिष्ठित पदक जोड़ लिया, जब उन्होंने टोक्यो 2020 की महिला एकल बैडमिंटन स्पर्धा में कांस्य पदक जीता था।

इस प्रकार, सिंधु दो अलग-अलग संस्करणों में ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। उन्होंने रियो 2016 ओलंपिक में रजत पदक जीता था।

इस प्रकार, सिंधु दो अलग-अलग संस्करणों में ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। उन्होंने रियो 2016 ओलंपिक में रजत पदक जीता था।

टोक्यो में सिंधु को सेमीफाइनल में ताई त्ज़ु-यिंग (Tai Tzu-Ying) से दिल तोड़ देने वाली हार का सामना करना पड़ा और एक दिन बाद कांस्य पदक के मुकाबले में उन्होंने चीन की ही बिंगजियाओ (He Bingjiao) को 21-13, 21-15 से हराया।

भवानी देवी (Bhavani Devi): ओलंपिक में पहुंचने वाली पहली भारतीय फ़ेंसर

भारत ने इस बार सबसे अप्रत्याशित खेलों में से एक में भाग लिया था। क्योंकि, फेंसर भवानी देवी ने तलवारबाजी प्रतियोगिता के लिए क्वालीफाई किया था।

ओलंपिक में स्थान पाने वाली पहली भारतीय फ़ेंसर भवानी ने पहले दौर में ट्यूनीशिया की नादिया बेन अज़ीज़ी को (Nadia Ben Azizi) 15-3 से हराकर देश को गौरवान्वित किया और प्रमुख यूरोपीय खेल में भारत के लिए पहली जीत दर्ज की।

27 वर्षीय की सपनों भरी उड़ान राउंड ऑफ 32 में समाप्त हो गई। क्योंकि, उन्हें फ्रांस की मैनॉन ब्रुनेट (Manon Brunet) के खिलाफ 7-15 से हार का सामना करना पड़ा।

नेत्रा कुमानन (Nethra Kumanan): ओलंपिक में पहली भारतीय महिला नाविक

नेत्रा कुमानन ओलंपिक में जगह बनाने वाली पहली भारतीय महिला नाविक बनीं। उन्होंने टोक्यो 2020 के लिए महिला लेजर रेडियल वर्ग में क्वालीफाई किया।

उन्हें 10 रेस वाली ओपनिंग सीरीज़ में 44 प्रतिभागियों में 35वां स्थान हासिल हुआ था। चेन्नई की 23 वर्षीया ने तीसरी रेस में 15वां स्थान हासिल कर अपना सर्वश्रेष्ठ परिणाम दर्ज किया।

फवाद मिर्ज़ा (Fouaad Mirza): घुड़सवारी के फ़ाइनल में पहुंचने वाले पहले भारतीय

फवाद मिर्जा ओलंपिक में घुड़सवारी के फाइनल में पहुंचने वाले पहले भारतीय बने।

टोक्यो 2020 में ओलंपिक में पदार्पण करते हुए मिर्जा ने व्यक्तिगत स्पर्धा में जम्पिंग फाइनल के लिए क्वालीफाई किया। राइडिंग सिग्नूर मेडिकॉट घोड़े के साथ मिर्जा फाइनल में 59.60 पेनल्टी अंक के साथ 23वें स्थान पर रहे।

दीपिका कुमारी (Deepika Kumari): क्वार्टर फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय तीरंदाज

दुनिया में नंबर 1 दीपिका कुमारी ने भारतीय तीरंदाजी का स्तर ऊपर उठा दिया है। क्योंकि, वह किसी व्यक्तिगत स्पर्धा के अंतिम आठ में पहुंचने वाली देश की पहली खिलाड़ी बनीं।

राउंड ऑफ 16 में कुमारी ने ROC की पूर्व विश्व चैंपियन केन्सिया पेरोवा (Ksenia Perova) को वन-एरो शूट-ऑफ में हराया। हालांकि, भारतीय क्वार्टर फाइनल में दक्षिण कोरिया की पिछली बार की स्वर्ण पदक विजेता आन सान (An San) से 0-6 से हार गईं।

अदिति अशोक

अदिति अशोक (Aditi Ashok): गोल्फ में चौथे स्थान पर रहने वाली पहली भारतीय

अदिति अशोक भारत के टोक्यो 2020 का सबसे बड़ा अचंभा साबित हुईं। क्योंकि, उन्होंने नामचीन गोल्फरों से भरे महिला गोल्फ मैदान में अंत तक पदक के लिए संघर्ष किया।

अपने दूसरे ओलंपिक में प्रतिस्पर्धा करते हुए दुनिया में 200वें नंबर की अशोक ने लीडरबोर्ड पर नंबर 2 पर रहते हुए अंतिम दिन में प्रवेश किया। उनके आगे केवल शीर्ष क्रम की नेली कोर्डा (Nelly Korda) थीं। लेकिन, अंतिम राउंड के बाद भारतीय खिलाड़ी एक स्ट्रोक से पदक हासिल करने से चूककर चौथे स्थान पर खिसक गईं। यह किसी भी भारतीय गोल्फर ने ओलंपिक में सबसे ज्यादा दूरी तय की है।

मनिका बत्रा (Manika Batra) और शरत कमल (Sharath Kamal): तीसरे राउंड में पहुंचने वाले पहले भारतीय पैडलर

अपने लगातार दूसरे ओलंपिक में भाग लेने वाली मनिका बत्रा ओलंपिक खेलों में टेबल टेनिस के तीसरे राउंड में पहुंचने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनीं।

नई दिल्ली के 26 वर्षीय ने दूसरे राउंड में यूक्रेन की मार्गरीटा पेसोत्स्का (Margaryta Pesotska) के खिलाफ 0-2 से पिछड़ने के बाद 4-11, 4-11, 11-7, 12-10, 8-11, 11-5, 11-7 से जीत हासिल की। भारतीय टेबल टेनिस के लिए नए मानदंड निर्धारित किए।

तीसरे राउंड में ऑस्ट्रिया की सोफिया पोल्कानोवा (Sofia Polcanova) ने भारतीय को 27 मिनट में 11-8, 11-2, 11-5, 11-7 से मात दी।

भारत के प्रमुख पुरुष खिलाड़ी शरत कमल ने भी पुरुष एकल में तीसरे राउंड में पहुंचकर मनिका बत्रा की उपलब्धि को दोहराया। पहली बार कोई भारतीय पुरुष पैडलर इस स्तर पर पहुंचा। वह इस स्तर पर चीन के गत स्वर्ण पदक विजेता मा लॉन्ग (Ma Long) से मात खा गए।

मीराबाई चानू (Mirabai Chanu): भारोत्तोलन में पहला रजत पदक

मीराबाई चानू ने टोक्यो 2020 में भारत के लिए पहली पदक जीत के साथ शुरुआत की। उन्होंने महिलाओं के 49 किग्रा वर्ग में कुल 202 किग्रा की लिफ्ट के साथ रजत पदक जीतकर वेटलिफ्टिंग में देश को पहला पदक दिलाया।

उनका प्रदर्शन एक यादगार रजत पदक को पक्का करने के लिए पर्याप्त था और ओलंपिक में एक भारतीय वेटलिफ्टर का यह सबसे अच्छा परिणाम था।

कर्णम मल्लेश्वरी (Karnam Malleswari) ने सिडनी 2000 ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था, लेकिन मीराबाई चानू से पहले किसी भी भारतीय भारोत्तोलक ने रजत पदक नहीं जीता।

अर्जुन लाल जाट (Arjun Lal Jat) और अरविंद सिंह (Arvind Singh): सेमीफाइनल में पहुंचने वाले पहले भारतीय रोवर

अर्जुन लाल जाट और अरविंद सिंह टोक्यो 2020 में पुरुषों के लाइटवेट डबल स्कल्स सेमीफाइनल में प्रवेश कर ओलंपिक में इस स्पर्धा के सेमीफाइनल में पहुंचने वाले पहले भारतीय रोवर बन गए।

भारतीय जोड़ी ने रेपेचेज राउंड में 6:51.36 के समय के साथ तीसरा स्थान हासिल किया और सेमीफाइनल में जगह बनाई। हालांकि, वे फाइनल में नहीं पहुंच सके। लेकिन, अंत में 11वां स्थान हासिल किया, जो एक विश्वसनीय उपलब्धि थी।