ओलंपिक ज्योति का भार: पिछले पांच ओलंपिक खेलों की मशाल के बारे में जानकारी हासिल करें

खेलों के शुरू होने से पहले ओलंपिक मशाल जलाई जाती है और समापन के साथ ही ओलंपिक ज्योति को बुझा दिया जाता है। 2004 से लेकर 2020 तक की ओलंपिक मशाल के भार के बारे में जानिए। 

लेखक शिखा राजपूत
फोटो क्रेडिट 2021 Getty Images

ओलंपिक में खेल और खिलाड़ियों के साथ-साथ ओलंपिक मशाल भी काफी चर्चा में रहती है। ओलंपिक मशाल के प्रज्ज्वलन के साथ ही ओलंपिक के यादगार सफर का आगाज हो जाता है। प्राचीन समय से शुरू हुई इस प्रथा में अभी तक कोई बदलाव नहीं हुआ है। हालांकि, ओलंपिक के हर संस्करण में मशाल में काफी बदलाव देखने को मिलते हैं लेकिन इसके बावजूद इसकी मूल भावना में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

हर ओलंपिक के पहले ग्रीस से मशाल रिले शुरू होती है। यह कई रास्तों से गुजरते हुए मेजबान देश पहुंचती है। इसी मशाल से ओलंपिक के उद्घाटन समारोह में ओलंपिक कॉल्ड्रोन (बड़ी मशाल) जलाने की परंपरा निभाई जाती है। यह पूरे ओलंपिक के दौरान जलती रहती है।

आइए ओलंपिक मशाल के भार के साथ ही इससे जुड़ी दिलचस्प बातों के बारे में जानें।

ओलंपिक खेलों में मशाल क्यों जलाई जाती है?

ग्रीस के लोगों की मान्यताओं के अनुसार, वह आग को पवित्रता का प्रतीक मानते थे और अपने मंदिरों में हमेशा आग जलाए रखते थे। इसी वजह से ग्रीस में देवी हेरा और बाकी देवताओं के मंदिरों में हमेशा आग जलती रहती थी। ओलंपिक में भी ये प्रथा इसी विश्वास की वजह से शुरू हुई।

ओलंपिक मशाल का इतिहास

ओलंपिक खेलों की शुरुआत प्राचीन समय में 1896 में यूनान के एथेंस से हुई थी। लेकिन तब ओलंपिक मशाल नहीं जलाई जाती थी। ओलंपिक में मशाल जलाने की प्रथा का शुभारंभ साल 1928 में एम्सटर्डम से शुरू हुआ। वहीं, साल 1936 में जर्मनी के बर्लिन से पहली बार मशाल रिले की शुरुआत हुई। आज भी ग्रीस के ओलंपिया में हेरा के मंदिर के खंडहरों के सामने ओलंपिक मशाल जलाई जाती है। यह मशाल प्राचीन खेलों और आधुनिक खेलों की निरंतरता पर जोर देती है।

पिछले पांच ओलंपिक खेलों में इस्तेमाल की गई मशाल का भार

टोक्यो 2020

टोक्यो 2020 खेल का आयोजन कोरोना महामारी के कारण एक साल देरी से हुआ था। 23 जुलाई 2021 से शुरू हुए खेलों का समापन 8 अगस्त 2021 को हुआ। टोक्यो 2020 की ओलंपिक मशाल को

टोकुजिन योशियोका द्वारा डिजाइन किया गया था। यह डिजाइन चेरी ब्लॉसम से प्रेरित रही, जो कि जापानी संस्कृति का एक बड़ा हिस्सा है। "फूलों की पंखुड़ियों" की तरह ही मशाल के चारों ओर 5 पंखुड़ी के आकार के स्तंभ हैं। पांच अलग-अलग ज्योति मशाल के केंद्र में एक साथ आती हैं, जो काफी शानदार प्रतीत होती हैं।

ओलंपिक मशाल के वजन और पकड़ का विशेष रूप से ध्यान रखा गया, जिससे किसी भी उम्र या लिंग के खिलाड़ियों के लिए इसे पकड़ना आसान हो। इस मशाल की लंबाई 710 मिमी (लगभग 28 इंच) और वजन 1 किलो (लगभग 2.2 एलबीएस) था।

यह मशाल प्रेरणा देती है कि "उम्मीद की रोशनी हमारे मार्ग को आसान करेगी।"

इस मशाल के निर्माण में 30 प्रतिशत रिसाइकल एल्यूमीनियम का इस्तेमाल किया गया है, जिसे 2011 में फुकुशिमा में आए भूकंप और सुनामी के बाद उपयोग किए अस्थायी आवास से लिया गया था।

रियो 2016

2016 में ब्राजील के रियो शहर में ओलंपिक का आयोजन किया गया था। इन खेलों का आयोजन 5 से 21 अगस्त 2016 तक किया गया था। इन खेलों में 12000 मशाल धावक शामिल थे। इस ओलंपिक मशाल का डिजाइन बहुत दिलचस्प था, जिसे चेल्स और हयाशी द्वारा डिजाइन किया गया था।

यह मशाल त्रिकोणीय आकार की थी, जो 69 सेमी लंबी थी और इसका वजन 1.5 किलो था। इसका डिजाइन कई खंडों से मिलकर बना था, जो मशाल के जलाने पर खुलता था। इसमें पांच खंड थे, जो अलग-अलग रंग और विशेषता को दर्शाते थे। शीर्ष भाग सूर्य का प्रतिनिधित्व करता था। हरा रंग मेजबान शहर के आसपास की प्रकृति, एक्वामरीन नीला मेजबान देश और शहर के आसपास के पानी का प्रतिनिधित्व करता था। नीला कोपाकबाना और इपेनेमा के मैदानों का प्रतिनिधित्व करता था। यह मशाल ब्राजील के लोगों की गर्मजोशी से प्रेरित थी। मशाल का त्रिकोणीय आकार उत्कृष्टता, दोस्ती और सम्मान के तीन ओलंपिक मूल्यों को दर्शाती थी।

यह मशाल “मुश्किल समय में आशा की किरण” के संदेश से प्रेरित थी।" इस मशाल के निर्माण में रिसाइकल एल्युमिनियम और रेसिन का इस्तेमाल किया गया था।

लंदन 2012

27 जुलाई से 12 अगस्त 2012 तक आयोजित हुए खेलों की मेजबानी लंदन ने तीसरी बार की थी। इस मशाल रिले में 8000 मशाल धावकों ने मशाल को अपनी मंजिल तक पहुंचने में मदद की थी।

इस मशाल को एडवर्ड बार्बर और जे ओस्गेर्बी ने डिजाइन किया था। यह सुनहरे रंग की मशाल 8,000 सर्कल से ढकी हुई थी, जो 8,000 मशाल धावकों का प्रतिनिधित्व करते थे। इसका आवरण एल्युमिनियम का था।

ये मशाल त्रिकोणीय आकार की थी, जो तीन बार लंदन में हुए खेलों (1908, 1948 और 2012) की मेजबानी करने के साथ-साथ सम्मान, उत्कृष्टता और दोस्ती के ओलंपिक मूल्यों का प्रतिनिधित्व करती थी।

यह अब तक की सबसे हल्की मशाल थी, जिसका भार 800 ग्राम था।

इसकी लंबाई 800मिमी थी और इसे आसानी से कोई भी पकड़ सकता था। यह मशाल एल्यूमीनियम मिश्र धातु से बनी थी, जो आमतौर पर कार और हवाई जहाज के डिजाइन में उपयोग किया जाता है। यह अत्यधिक उच्च और निम्न तापमान का सामना करने में सक्षम थी।

यह मशाल प्रेरित करती कि ये “चमकने का पल” है।

इस मशाल ने लंदन के डिजाइन संग्रहालय के एक समारोह में डिजाइन ऑफ द ईयर पुरस्कार का खिताब हासिल किया था।

बीजिंग 2008

बीजिंग 2008 का आयोजन 8 अगस्त से 24 अगस्त 2008 तक किया गया था। 2008 ओलंपिक की मशाल को बीजिंग की पब्लिक कंपनी लेनोवो समूह की एक टीम ने डिजाइन किया था। इस मशाल रिले में 2100 मशाल धावकों ने हिस्सा लिया था।

मशाल की डिजाइन लाल रंग की घुमावदार पारंपरिक चीनी स्क्रॉल के आकार से प्रेरित थी। इसे घुमावदार ग्राफिक्स के साथ बनाया गया था, जिसे फीनिक्स खेलों के एक प्रमुख देवता और 'लकी क्लाउड' कहा जाता है। इसे एल्युमिनियम से बनाया गया। यह 72 सेंटीमीटर लम्बी है और इसका वजन 985 ग्राम है।

लाल, चीन का पारंपरिक रंग है। यह यिन और यांग को दर्शाता है। मशाल का शीर्ष नदियों, झीलों, झरनों, चार समुद्रों और चीन के महासागर का प्रतिनिधित्व करता है। मशाल के नीचे का हिस्सा चीन के लोगों, जानवरों, जंगलों, पहाड़ों, रेगिस्तानों, इमारतों, शहरों, कस्बों और गांवों का, बादल मेजबान देश के जातीय अल्पसंख्यकों का प्रतिनिधित्व करता है।

यह मशाल “एक दुनिया, एक सपना” संदेश देती है।

एथेंस 2004

13 से 29 अगस्त तक आयोजित किए गए एथेंस 2004 खेलों में कई इतिहास रचे गए। यह ओलंपिक काफी खास था। क्योंकि कई सालों बाद एक फिर ओलंपिक खेलों की घर वापसी हुई थी।

अपने देश में ओलंपिक खेलों की वापसी के लिए "ग्लोबल" मशाल रिले का आयोजन किया गया था। इस रिले में 11,000 धावकों ने इसके संदेश को लोगों तक पहुंचाया।

इस मशाल को एंड्रियास वरोट्सोस ने डिजाइन किया था, जो जैतून के पेड़ के पत्ते से प्रेरित थी। इसका एर्गोनोमिक घुमावदार डिजाइन मशाल की लौ को निरंतर जलते रहने के उद्देश्य से बनाया गया था।

मशाल का वजन 700 ग्राम था और यह 68 सेमी लंबी थी। इसका निर्माण एल्युमिनियम और लकड़ी (जैतून के पेड़) से किया गया था।

यह मशाल “शांति और आजादी की भावना” का संदेश देती है।

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