टोक्यो 2020 में नीरज चोपड़ा का स्वर्ण पदक भारतीयों को कड़ी मेहनत करने के लिए प्रेरित करेगा- जोहान्स वेट्टर   

2017 विश्व चैंपियनशिप के स्वर्ण पदक विजेता ने बताया कि टोक्यो 2020 में चोपड़ा की सफलता भारत में एथलेटिक्स को कैसे आगे बढ़ा सकती है। 

लेखक दिनेश चंद शर्मा
फोटो क्रेडिट Getty Images

नीरज चोपड़ा (Neeraj Chopra) ने टोक्यो 2020 में अपने ऐतिहासिक स्वर्ण पदक के साथ भारत में 1.4 बिलियन लोगों की उम्मीदों को पूरा किया। 121 वर्षों में पहली बार कोई भारतीय एथलीट ओलंपिक में ट्रैक और फील्ड पोडियम पर खड़ा हुआ था।

इस प्रेरणादायक क्षण के बाद देश में बहुत से बच्चों को क्रिकेट के बल्ले की जगह जेवलिन उठाते देखा। इतिहास में 97.76 मीटर के दूसरे सबसे दूर थ्रो का रिकॉर्ड रखने वाले जर्मन ओलंपियन जोहान्स वेट्टर (Johannes Vetter)का मानना है कि यह उपलब्धि देश के लिए और यहां तक कि जेवलिन दुनिया के लिए भी सही दिशा में एक कदम है।

वेट्टर ने News9live.com को बताया, "नीरज ट्रैक और फील्ड में भारत से ओलंपिक में पहले पदक विजेता थे। भारत दुनिया का दूसरा सबसे अधिक आबादी वाला देश है। बेशक, उनका स्वर्ण जीतना हमारे खेल के लिए सबसे अच्छा विज्ञापन था।"

"हमें (उनकी जीत से) बहुत फायदा हुआ है। हो सकता है कि उनके पदक ने भारत में कुछ लोगों की मदद की, जो गरीबी जैसे सामाजिक मुद्दों से जूझ रहे हैं। आशा के साथ आगे बढ़ेंगे और कड़ी मेहनत करेंगे। इसलिए, उनका पदक भारतीय समाज के साथ जेवलिन खेल के लिए भी अच्छा था।"

टोक्यो 2020 में अपने स्वर्ण पदक के साथ नीरज चोपड़ा।
फोटो क्रेडिट 2021 Getty Images

हालांकि, चोपड़ा का 88.07 मीटर का राष्ट्रीय रिकॉर्ड है, जो अभी तक पुरुषों की जेवलिन थ्रो स्पर्धा में 90 मीटर के निशान को नहीं तोड़ पाए हैं। लेकिन, वेट्टर का मानना है कि टोक्यो 2020 स्वर्ण पदक विजेता यह उपलब्धि हासिल करने के करीब हैं। 

जर्मन ने कहा, "मैं यह नहीं कहूंगा कि 90 मीटर से अधिक थ्रो नीरज की पहुंच से बाहर है। वह 90 मीटर से अधिक थ्रो के बहुत करीब हैं। बस इसमें समय लगेगा। वह प्रतिभाशाली हैं, उनके पास एक अच्छी तकनीक है।"  

"आप किसी भी थ्रोअर की तुलना नहीं कर सकते, क्योंकि यह बहुत व्यक्तिगत है। मेरा आनुवंशिक बनावट मुझे मजबूत बाएं पैर के साथ मजबूत, लेकिन लचीला होने में मदद करता है, जो मुझे एक सख्त ब्लॉक प्राप्त करने में मदद करता है।" 

2017 विश्व चैंपियनशिप के स्वर्ण पदक विजेता ने चोपड़ा को अपने बाएं पैर पर काम करने की सलाह दी और साथ ही यह भी बताया कि वह जर्मन बायोमैकेनिक्स विशेषज्ञ क्लॉस बार्टोनिट्ज़ (Klaus Bartonietz) के कोच के रूप में सुरक्षित हाथों में हैं। 

वेट्टर ने कहा, "मुझे लगता है कि नीरज एक बेहतर ब्लॉक प्राप्त करने के लिए अपने ऊपरी शरीर में अधिक ताकत और दबाव हासिल करने के लिए अपने बाएं पैर पर काम कर सकते हैं। उनके पास एक अच्छे कोच हैं (जर्मन बायोमैकेनिक्स विशेषज्ञ डॉ क्लॉस बार्टोनिट्ज़) और वे इसे ठीक करने के लिए बहुत मेहनत करेंगे। इसमें समय लगेगा, वह युवा हैं। वह भविष्य में भी एक महान प्रतियोगी होंगे।"

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