नीरज चोपड़ा का टोक्यो ओलंपिक में गोल्ड मेडल वैश्विक स्तर पर भारतीय एथलीट्स को एक नया आयाम देगा: सेबेस्टियन कोय

नीरज चोपड़ा फिलहाल 2022 के वर्ल्ड चैंपियनशिप, एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए सैन डिएगो में ट्रेनिंग कर रहे हैं।

लेखक रौशन कुमार वर्मा
फोटो क्रेडिट Getty Images

वर्ल्ड एथलेटिक्स के अध्यक्ष सेबेस्टियन कोय के अनुसार, इस साल की शुरुआत में टोक्यो ओलंपिक में जेवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा के स्वर्ण पदक से न सिर्फ भारतीय एथलेटिक्स को आगे बढ़ने में मदद मिलेगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारतीय दर्शक भी अधिक सक्रिय और उत्साहित होंगे।

टोक्यो 2020 में 87.58 मीटर के लंबे थ्रो की मदद से नीरज चोपड़ा ने न सिर्फ अपने लिए गोल्ड जीता बल्कि भारत को भी पहली बार ओलंपिक में ट्रैक एंड फील्ड में पदक दिलाया। नीरज चोपड़ा ने गोल्ड मेडल के लिए जोहानस वेटर और जूलियन वेबर जैसे बड़े एथलीटों को पीछे छोड़ा। 

“सेबेस्टियन कोय ने हाल ही में मीडिया से बातचीत में कहा कि नीरज चोपड़ा ने विश्व के बड़े मंच पर जो किया है वो सिर्फ भारत के लिए नहीं बल्कि पूरे एशिया और दुनिया भर के लिए बड़ी उपलब्धि है” 

1980 और 1984 में 1500 मीटर में दोहरा ओलंपिक गोल्ड मेडल जीतने वाले कोय ने आगे कहा कि मैं यह भी अच्छी तरह जानता हूं कि दुनिया भर के हमारे सभी बड़े शहरी आबादी वाले क्षेत्रों में भारतीय समुदाय के लोग हैं जिससे उनका ये प्रयास दूर तक पहुंचा।

“कोय ने कहा कि यह सही मायनों में अमेरिका, ग्रेट ब्रिटेन और यूरोप और अफ्रीका के बड़े हिस्से में भारतीय समुदायों को भी हमारे खेल का हिस्सा बनने में मदद कर सकता है।”

वर्ल्ड एथलेटिक्स के अध्यक्ष ने आगे बात करते हुए कहा कि ये बहुत महत्वपूर्ण  है क्योंकि कई वर्षों में ये पहली बार है जब भारत के लोग ट्रैक एंड फील्ड के बारे में बात कर रहे थे।J

“कोय ने मीडिया से बातचीत में आगे कहा कि चोपड़ा भारतीय एथलेटिक्स के एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी हैं। एक एथलीट का प्रदर्शन तब तक बड़ा नहीं होता जब तक कि उनके पीछे एक मजबूत संघ न होता, चाहे वह प्रदर्शन कितना भी महत्वपूर्ण क्यों न हो, जो कि अब आपके पास है।”

भारत ने कभी भी ओलंपिक में एथलेटिक्स में कोई पदक नहीं जीता था। रोम 1960 और 1984 लॉस एंजेल्स में मिल्खा सिंह और पीटी उषा अपने इवेंट्स में चौथे नंबर पर रहते हुए काफी करीब आए थे लेकिन पदक नहीं जीत सके थे।

 मिल्खा सिंह 400 मीटर दौड़ में मेडल से महज 0.1 सेकंड पीछे रह गए थे जबकि पीटी उषा 400 मीटर बाधा दौड़ में मेडल जीतने से सिर्फ 0.01 सेकंड पीछे रही थीं।

बीजिंग 2008 में राइफल शूटर अभिनव बिंद्रा के गोल्ड मेडल जीतने के बाद, नीरज चोपड़ा अपने प्रयासों से ओलंपिक में व्यक्तिगत गोल्ड मेडल जीतने वाले दूसरे भारतीय बने।

 “कोय ने कहा कि पहला गोल्ड मेडल जीतना भारतीय एथलेटिक्स के लिए अहम पल रहा। यह इसलिए भी एक महत्वपूर्ण पल रहा क्योंकि पहली बार भारत में लोग ट्रैक एंड फील्ड के बारे में बात कर रहे थे।

ट्विटर की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक 2021 में बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधु के बाद नीरज चोपड़ा दूसरे सबसे अधिक ट्वीट किए जाने वाले भारतीय ओलंपिक एथलीट हैं।

 “कोय ने कहा कि यह एक बेहतरीन मौका है जब इस परफॉर्मेंस का इस्तेमाल करके एथलेटिक्स अपने फुटप्रिंट्स को विस्तार दे सकता है” ।

नीरज चोपड़ा फिलहाल अमेरिका के सैन डिएगो में कोच डॉ. क्लॉस बार्टोनिट्ज़ के साथ ट्रेनिंग ले रहे हैं। भारतीय जेवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा अगले साल अमेरिका के ओरेगन में वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप, इंग्लैंड के बर्मिंघम में कॉमनवेल्थ गेम्स और चीन के हांग्जो में एशियाई खेलों में भाग लेंगे।

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