Nadeem Iqbal: फौजी, शीतकालीन ओलंपिक खिलाड़ी और एक प्रेरणा स्त्रोत

भारत के लिए सोची 2014 खेलों में क्रॉस कंट्री स्कीइंग प्रतियोगिता में भाग लेने वाले Iqbal की कहानी और सफलता Arif Khan जैसे खिलाड़ियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण रही है। 

फोटो क्रेडिट 2014 Getty Images

शीतकालीन खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर करने के लिए किसी भी खिलाड़ी को अनेक कठिनाइयों अथवा संघर्षों का सामना करना होता है। अगर आप ओलंपिक इतिहास उठा कर देखेंगे तो भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिकतम खिलाड़ी मध्यम वर्ग या समाज के कम मज़बूत भाग से आते हैं। शीतकालीन ओलंपिक खेलों में भारत के लिए आज तक कुल मिला के 15 खिलाड़ियों ने भाग लिया है और 140 करोड़ की आबादी वाले देश में ऐसा करना कितनी बड़ी बात है यह संख्या से पता चलता है। 

ओलंपिक शीतकालीन खेलों में भाग लेने वाले कई भारतीय खिलाड़ियों का संबंध सेना से रहा है और Nadeem Iqbal उनमे से एक हैं। सोची 2014 में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले यह क्रॉस कंट्री स्कीयर शीतकालीन खेल जगत में ज़्यादा लोकप्रिय तो नहीं हैं लेकिन जो उन्होंने अपने छोटे खेल जीवन में किया वह न केवल अद्भुत बल्कि यादगार भी है।

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फोटो क्रेडिट 2014 Getty Images

जम्मू और कश्मीर में बचपन, सेना से लगाव

भारत के सबसे उत्तरी क्षेत्र जम्मू और कश्मीर के राजौरी जिले में स्थित एक गाँव में जन्मे Nadeem एक बहुत ही मध्यम वर्ग परिवार से आते हैं। जब वह बहुत छोटे थे तो उनके पिता का देहांत हो गया और उनका पालन पोषण उनकी माता ने किया। पढ़ाई के साथ बचपन से ही Nadeem Iqbal को सेना के प्रति एक रूचि और काफी लगाव था जो आगे चल के उनके लिए बहुत लाभदायक साबित हुआ।

शारीरिक स्वास्थ्य और उनकी शक्ति के कारण Nadeem ने भारतीय सेना में भर्ती होने का निर्णय लिया और 2003 में वह ऐसा करने में सफल हुए। जहां एक तरफ सेना में होने का सपना उनके लिए पूरा हुआ, उन्हें अंदाजा नहीं था कि आने वाले दशक में जीवन कितना बदल जायेगा।

इस बात में कोई दो राय नहीं हैं कि जम्मू, कश्मीर अथवा हिमाचल प्रदेश में रहने वाले लोगों के लिए शीतकालीन खेलों में भाग लेना और रूचि दिखाना अन्य क्षेत्रों की तुलना में आसान है।

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क्रॉस कंट्री स्कीइंग और खेल जीवन

भारतीय सेना के हाई ऑल्टीट्यूड वारफेयर स्कूल में भर्ती होने से Nadeem Iqbal को बर्फ में रहने अथवा क्रिया करने का प्रशिक्षण मिला। इस स्कूल में स्कीइंग का प्रशिक्षण दिया जाता है और यह Nadeem के लिए कारगर साबित हुआ। उन्होंने स्कीइंग करना शुरू किया और साल 2009 से 2013 तक राष्ट्रिय चैंपियनशिप जीत अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।

राष्ट्रिय स्तर प्रतियोगिताओं को जीतने के बाद Nadeem Iqbal के लिए अनिवार्य था कि वह अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्द्धाओं की ओर रुख करें। उन्होंने साल 2011 में शीतकालीन एशियाई खेलों में भाग लिया और अगले दो वर्षों में कई अन्य प्रतियोगिताओं में खेलते हुए अपने अनुभव अथवा कौशल को सुधारा।

सेना में होने के कारण उन्हें कठिन परिस्थितियों का सामना करना अच्छे से आता था और जैसे अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का स्तर बढ़ता गया, उन्होंने अपना प्रदर्शन बेहतर किया।

ओलंपिक सपना और सोची 2014 का सफर

साल 2014 के सोची ओलंपिक खेलों में अपना स्थान पक्का करना Nadeem Iqbal के लिए बहुत बड़ी बात होती लेकिन उन्हें यह भी पता था कि ऐसा करना पूर्णता संभव है। एफआईएस द्वारा आयोजित प्रतियोगिताओं में उन्होंने शानदार प्रदर्शन दिखाया और अनेक दौड़ों में भाग लेने से उनका खेल सुधरता गया।

सोची ओलंपिक खेलों में Nadeem Iqbal ने अपना स्थान पक्का किया और वह Jammu से भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले पहले खिलाड़ी बने। भारत के लिए सोची खेलों में भाग लेने वाले वह तीन खिलाड़ियों में से एक थे।

क्रॉस कंट्री स्कीइंग की 15 किमी क्लासिक फ्रीस्टाइल प्रतियोगिता में भाग लेते हुए उन्होंने 85वां स्थान प्राप्त किया और उनका कुल समय 55 मिनट 12.5 सेकंड था। कई विशेषज्ञों अथवा दर्शकों के दृष्टिकोण से यह प्रदर्शन ज़रूर निराशाजनक रहा लेकिन Nadeem के लिए ओलंपिक मंच पर पहुंचना बहुत बड़ी बात थी।

सोची 2014 शीतकालीन खेलों में भाग लेने के बाद उनका सफर वहीं नहीं समाप्त हुआ क्योंकि वह एक बार फिर ओलंपिक मंच पर लौटे। उन्होंने 2018 प्योंगचांग खेलों में भाग लेने वाले युवा स्कीयर Jagadish Rawat के कोच कि भूमिका निभाई। अगर Rawat से पूछें तो Iqbal का योगदान उनके ओलंपिक करियर में बहुत बड़ा रहा।

Nadeem Iqbal इस समय सेना में हैं और वह देश की सेवा कर रहे हैं लेकिन उनके अंदर का खिलाड़ी अभी भी जीवित है। उनका योगदान और भारत के ओलंपिक इतिहास में स्थान सदैव रहेगा।

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