लवलीना बोरगोहेन के ओलंपिक पोडियम तक के सफर के बारे में जानिए

विजेंदर सिंह और मैरी कॉम के बाद, लवलीना बोरगोहेन ओलंपिक खेलों में पदक जीतने वाली तीसरी भारतीय मुक्केबाज हैं।

लेखक सतीश त्रिपाठी
फोटो क्रेडिट AFP

भारतीय मुक्केबाजी में जब भी बात महिलाओं की होती है तो सबसे पहले मैरी कॉम का नाम आता है, लेकिन लवलीना बोरगोहेन ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए एक अलग पहचान बनाई है।

असम के गोलाघाट जिले के बरोमुखिया के एक छोटे से गांव से आने वाली लवलीना बोरगोहेन ने मैरी कॉम के नक्शेकदम पर चलते हुए लगातार सफलता की सीढ़ी चढ़ी हैं।

विजेंदर सिंह (बीजिंग 2008 में कांस्य) और मैरी कॉम (लंदन 2012 में कांस्य) के बाद ओलंपिक में पदक जीतने वाली लवलीन बोरगोहेन तीसरी भारतीय मुक्केबाज हैं। उन्होंने टोक्यो 2020 में महिलाओं के 69 किग्रा वर्ग में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचा था।

हालांकि, टोक्यो ग्रीष्मकालीन खेलों में गोलाघाट की सड़कों से लेकर पोडियम तक का सफर तय करने वाली लवलीना का सफर काफी लंबा रहा है।  

कोच पदुम बोरो ने लवलीना बोरगोहेन की प्रतिभा को पहचाना

मुक्केबाजी की दुनिया में नाम बनाने से पहले, लवलीना बोरगोहेन ने अपनी दो बड़ी बहनों के साथ मय थाई नामक किक-बॉक्सिंग की ट्रेनिंग ली। 

जबकि उनके भाई-बहनों ने आगे भी मय थाई जारी रखा। वहीं, साल 2012 में भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) द्वारा आयोजित एक बॉक्सिंग ट्रायल में कोच पदुम बोरो की नजर लवलीना की बॉक्सिंग पर पड़ी।

पदुम बोरो ने Olympics.com के साथ बात करते हुए कहा, “मैंने उनके कुछ टेस्ट किए जैसे बैग को पंच मारना, तेज मुक्का मारना और इसमें उन्होंने अपना बेहतरीन प्रदर्शन दिखाया। मुझे लगा कि उसे बॉक्सर बनाया जा सकता है।”

पदुम बोरो का लवलीना को लेकर नजरिया बिल्कुल सही था, क्योंकि लवलीना बोरगोहेन जल्द ही अपनी मुक्केबाजी से एक अलग छाप छोड़ी। उन्होंने 2012 में जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में जीत दर्ज की और सर्बिया में 2013 के नेशंस महिला जूनियर कप में एक रजत पदक हासिल किया। 

इसके बाद लवलीना को सीनियर सर्किट में भी सफलता मिली। लवलीना ने 2017 में एशियाई चैंपियनशिप में कांस्य पदक और उसी वर्ष प्रेसीडेंट कप में शानदार प्रदर्शन करते हुए सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। 

लवलीना के पर्पल पैच ने 2018 और 2019 में विश्व चैंपियनशिप में एक के बाद एक कांस्य पदक जीते। हालांकि इसके बाद पूरी दुनिया में COVID-19 महामारी ने पांव पसार लिया।

इस महामारी ने भले ही पूरी दुनिया में स्थिरता ला दी हो, लेकिन लवलीना के इरादे हमेशा बुलंद रहे और उन्होंने टोक्यो ओलंपिक में जाने के लिए लगातार कड़ी मेहनत जारी रखी।

लवलीना बोरगोहेन का ओलंपिक पदक: डेब्यू के साथ ही जाता कांस्य पदक

लवलीना बोरगोहेन ने डीएनए के साथ बातचीत में बताया, "ओलंपिक में जाना मेरे माता-पिता का सपना रहा है और मैं इसके लिए काम कर रही हूं।"

लवलीना ने अपने और माता-पिता के सपनों की दिशा में पहला कदम तब बढ़ाया, जब उन्होंने मार्च 2020 में जॉर्डन के अम्मान में एशियाई मुक्केबाजी ओलंपिक क्वालीफायर में शीर्ष चार में जगह बनाई। इसके साथ ही उन्होंने टोक्यो 2020 के लिए अपना स्थान भी हासिल कर लिया। 

लवलीना बोरगोहेन क्वालीफायर के क्वार्टर में उज्बेकिस्तान की मफतुनाखोन मेलिएवा को हराकर टोक्यो ओलंपिक में भाग लेने वाले नौ भारतीय मुक्केबाजों में से एक बन गईं।

जबकि उन नौ मुक्केबाजों में से सिर्फ लवलीना बोरगोहेन ने टोक्यो 2020 में पदक हासिल किया।

टोक्यो ओलंपिक में लवलीना बोरगोहेन शुरुआती राउंड में नादिन एपेट्ज के खिलाफ मैट पर दिखीं।
फोटो क्रेडिट 2021 Ueslei Marcelino - Pool

लवलीना ने अपने टोक्यो ओलंपिक अभियान की शुरुआत राउंड ऑफ-16 में जर्मनी की विश्व चैंपियनशिप पदक विजेता नादिन एपेट्ज पर 3-2 के स्प्लिट डिसीजन से जीत दर्ज करने के साथ की। 

क्वार्टर-फाइनल में लवलीना मैट पर पूर्व विश्व चैंपियन चीनी ताइपे की चेन निएन-चिन के खिलाफ थीं। यह प्रतिद्वंद्वी बॉक्सर भारतीय मुक्केबाज को अपने पिछले तीन प्रयासों में हराने में विफल रही थी।

भारतीय मुक्केबाज ने सेमीफाइनल में जगह बनाने के लिए अपनी ऊंचाई और जैब्स का भरपूर इस्तेमाल किया और 4-1 से यह मुकाबला अपने नाम कर लिया। 

हालांकि लवलीना बोरगोहेन सेमीफाइनल में विश्व चैंपियन और अंतिम स्वर्ण पदक विजेता बुसेनाज सुरमेनेली से हार गईं। इस तरह शीर्ष चार में पहुंचने से भारतीय खिलाड़ी का सपना अधूरा रह गया, लेकिन लवलीना को पदक मिलना सुनिश्चित था, क्योंकि मुक्केबाजी में दो कांस्य पदक दिए जाते हैं।

पदक जीतने के साथ ही लवलीना बोरगोहेन को दुनिया के कुछ महानतम मुक्केबाजों में शामिल किया जाने लगा, जिन्होंने ओलंपिक पदक के साथ-साथ विश्व चैंपियनशिप पदक भी जीता है।

लेकिन प्रोफेशनल मुक्केबाजी में जाने से पहले लवलीना पेरिस 2024 ओलंपिक में अपने पदक का रंग बदलने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं।

लवलीना ने कहा, "मेरा आखिरी लक्ष्य पेरिस में स्वर्ण पदक जीतना है... मुझे पेशेवर मुक्केबाजी बहुत पसंद है। मैंने सोचा था कि अगर मैं टोक्यो में गोल्ड जीतती हूं तो प्रोफेशनल बॉक्सिंग में शिफ्ट हो जाऊंगी। लेकिन मैं कांस्य पदक ही हासिल कर सकी। तो मेरा अगला लक्ष्य पेरिस में स्वर्ण पदक जीतना है। उसके बाद, मैं पेशेवर मुक्केबाजी में शामिल हो सकती हूं।"

टोक्यो 2020 ओलंपिक में लवलीना बोरगोहेन

टोक्यो 2020 ओलंपिक में लवलीना बोरगोहेन
राउंड प्रतिद्वंद्वी परिणाम
राउंड ऑफ 16 नादिन एपेट्ज 3-2 से जीती
क्वार्टर-फाइनल चेन निएन-चिन 4-1 से जीती
सेमी-फाइनल बुसेनाज सुरमेनेली 5-0 से हारी

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