‘पेशेवर बनने से पहले मुझे ओलंपिक गोल्ड चाहिए’- लवलीना बोरगोहेन 

टोक्यो 2020 कांस्य पदक विजेता ने यह भी खुलासा किया कि वह महान मुक्केबाज फ्लॉयड मेवेदर जूनियर की प्रशंसक हैं।

लेखक दिनेश चंद शर्मा
फोटो क्रेडिट 2018 Hindustan Times

जब लवलीना बोरगोहेन (Lovlina Borgohain) कांस्य पदक प्राप्त करने के लिए टोक्यो में पोडियम पर चढ़ीं, तो उनके चेहरे पर केवल हल्की सी मुस्कान थी। कांस्य जीतने से ज्यादा, ऐसा लग रहा था कि उन्होंने गोल्ड खो दिया है। मैच के बाद, उन्हें यह स्वीकार करने में कोई हिचक नहीं थी कि वह वहां सर्वश्रेष्ठ बनने के लिए गई थी और जब तक वह ओलंपिक पोडियम पर शीर्ष स्थान पर कब्जा नहीं कर लेती, तब तक वह नहीं रुकेंगी।

लेकिन वह बेशकीमती पदक नहीं जीत पाई, क्योंकि उनकी सेमीफाइनल प्रतिद्वंद्वी बुसेनाज सुमेनिली (Busenaz Sumenili) उस दिन उन पर भारी पड़ी और एक बेहतर मुक्केबाज साबित हुईं। उसने अपने दमदार हुक और बॉडी शॉट्स के साथ उसे पछाड़ दिया। लेकिन, बोरगोहेन को लगता है कि अगर वह बेहतर तैयारी करती, तो वह स्वर्ण पदक विजेता को पछाड़ सकती थी।

उन्होंने Olympics.com को बताया, "मुझे लगता है कि मैं अपने प्रशिक्षण की कमी के कारण वह मुकाबला हार गई। कोविड और चोटों के कारण मैं ज्यादा प्रशिक्षण नहीं ले सकी। आप हमेशा ओलंपिक के लिए अलग तरह से तैयारी करते हैं, लेकिन मुझे लगता है कि मैं ऐसा नहीं कर सकी। अगर, मैं निरंतर प्रशिक्षण लेती, तो उसे हरा देती।" 

उन्होंने थोड़ा रुकने के बाद आगे कहा, "टोक्यो में मेरे दिमाग में गोल्ड के अलावा कुछ नहीं था।" 

बॉक्सर ने बहुत पहले से ही पेरिस 2024 पर अपनी निगाहें लगा ली हैं। क्योंकि, वह अपने अगले प्रयास में गोल्ड से कम किसी भी चीज़ के साथ समझौता करने को तैयार नहीं हैं। तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और विश्व चैंपियनशिप स्थगित होने के कारण उन्हें अपनी कमजोरियों पर काम करने के लिए और समय मिल गया है।

उन्होंने खुलासा किया, "मैं अपनी ताकत पर काम करने के लिए समय का उपयोग कर रही हूं। मैंने पहले भी कहा था कि मुझे अपनी ताकत में सुधार करने की जरूरत है। इसलिए पिछले चार महीनों से मैं स्ट्रेंथ ट्रेनिंग ले रही हूं। अब मैं काफी बेहतर महसूस कर रही हूं। इसलिए, मैंने इस ब्रेक को बहुत सकारात्मक रूप से लिया है।" 

दिलचस्प बात ये है कि पेरिस में स्वर्ण जीतने के बाद बोरगोहेन ने अपने भविष्य की योजना पहले ही तय कर ली है।

उन्होंने अपनी भविष्य की योजना का खुलासा करते हुए कहा, "मुझे पेशेवर मुक्केबाजी बहुत पसंद है। मैंने सोचा था कि अगर मैं टोक्यो में स्वर्ण पदक जीती, तो मैं पेशेवर मुक्केबाजी में शिफ्ट हो जाऊंगी। लेकिन, मैं कांस्य पदक पर ही ठहर गई। इसलिए, पेरिस में मेरा लक्ष्य गोल्ड है। उसके बाद, मैं पेशेवर मुक्केबाजी में जा सकती हूं।"

बहुत कम लोग जानते हैं कि वह महान मुक्केबाज फ्लॉयड मेवेदर (Floyd Mayweather) की अनुयायी हैं और उनका अनुकरण करने की कोशिश करती हैं।

उन्होंने कहा, "उनके पास फाइट की कोई निश्चित शैली नहीं है। वह हर मुकाबले में एक अलग मुक्केबाज होते हैं और प्रत्येक मुक्केबाज के लिए एक अलग गेम प्लान लागू करते हैं। मुझे भी अलग-अलग शैलियों में लड़ना पसंद है। मैं विभिन्न शैलियों को देखती हूं और उन्हें अपने खेल में शामिल करना चाहती हूं। मैं उनसे सीखने की कोशिश करती हूं। लेकिन, साथ ही मुझे यह ध्यान रखना होगा कि मैं उन्हें आंख बंद करके कॉपी नहीं कर सकती। क्योंकि, उनकी बनावट अलग तरह की है। इसके अलावा, एक बॉक्सर की कुछ खासियत भी होनी चाहिए। आप अच्छी चीजें सीखें, लेकिन अपने व्यक्तित्व की खासियत को बनाए रखना भी जरूरी है।"  

ट्रायल में शामिल होने में कोई समस्या नहीं

बोरगोहेन को विश्व चैम्पियनशिप में भारत के प्रतिनिधि के रूप में बिना किसी ट्रायल के चुने जाने का मामला बहुत सुर्खियों में रहा, जब राष्ट्रीय चैंपियन अरुंधति चौधरी (Arundhati Chowdhury) ने बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (BFI) के फैसले को चुनौती देने के लिए अदालत का रुख किया। हालांकि, प्रतियोगिता को मई, 2022 तक स्थगित करने के साथ, महासंघ ने अदालत को अवगत कराया कि प्रतियोगिता के लिए नए सिरे से ट्रायल किए जाएंगे और सभी को एक उचित मौका मिलेगा।

काफी दिनों तक ओलंपिक पदक विजेता ने इस मामले पर चुप्पी साधे रखी, लेकिन आखिरकार उन्होंने अपने मन की बात कह ही दी।

उन्होंने कहा, "मुझे ट्रायल में शामिल होने में कोई समस्या नहीं है। मैंने हमेशा अपने महासंघ के निर्णय को स्वीकार किया है। ट्रायल न करने का निर्णय महासंघ का था और मैंने इसे स्वीकार कर लिया था। अब यदि महासंघ ट्रायल करना चाहता है, तो मुझे कोई समस्या नहीं है। मैं एक फाइटर हूं और सिर्फ रिंग में लड़ने में विश्वास करती हूं।"

इसमें कोई संदेह नहीं है कि 2022 में उनकी लड़ने की प्रवृत्ति को परीक्षा होगी, जब वह तीन प्रमुख टूर्नामेंटों- एशियाई खेलों, राष्ट्रमंडल खेलों और विश्व चैंपियनशिप में भाग लेंगी। वह एक बार फिर से सर्वश्रेष्ठ के खिलाफ मुकाबला करेंगी और अगर वह इसमें सफल हो जाती है, तो यह सही दिशा में एक कदम होगा।

उन्होंने कहा, "जब भी आप किसी प्रतियोगिता में भाग लेते हैं, तो आप गोल्ड जीतना चाहते हैं। मेरा अंतिम लक्ष्य पेरिस में गोल्ड जीतना है। इसलिए, अगले साल बड़े टूर्नामेंट मुझे पेरिस 2024 के लिए अपनी तैयारियों को परखने के लिए एक मंच प्रदान करेंगे। मैं सर्वश्रेष्ठ के खिलाफ लडूंगी और यह मुझे खुद को परखने का मौका देगा। आप इन प्रतियोगिताओं में कुछ अलग चीजें भी आजमा सकते हैं। लेकिन, ओलिंपिक में आपको जीतना होता है और आप सिर्फ जीत के फॉर्मूले पर टिके रहते हैं।"

2022 निश्चित रूप से एक झलक पेश करेगा कि क्या लवलीना 2.0 में खुद को विश्व विजेता के रूप में स्थापित करने की क्षमता है।

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