सबसे लंबा ओलंपिक कुश्ती मैच: जब स्टॉकहोम 1912 खेलों में आधे दिन तक पहलवानों के बीच चला घमासान

आधुनिक समय की कुश्ती के विपरीत, उन दिनों मुकाबलों की समय सीमा निर्धारित नहीं होती थी।

लेखक मनोज तिवारी

कुश्ती आधुनिक ओलंपिक खेलों में सबसे जल्दी समाप्त होने वाला खेल है। लाइटनिंग-फास्ट टेकडाउन, मजबूत ग्रेपल होल्ड और हरक्यूलियन जैसे टॉस से केवल छह मिनट में परिणाम मिल जाता है।

कुश्ती के लिए ओलंपिक नियम आज दो राउंड की फाइट के लिए होते हैं, जिनमें से प्रत्येक राउंड अधिकतम तीन मिनट तक चलता है। जिसमें बीच में 30 सेकंड का ब्रेक होता है। दोनों राउंड के अंत में सबसे अधिक अंक प्राप्त करने वाले पहलवान को विजेता घोषित किया जाता है। प्रतिद्वंद्वी को पिन करना या पूर्व निर्धारित अंक के अधिक अंतर होने से मैच पहले समाप्त हो सकता है।

हालांकि खेल को सुरक्षित और अधिक मनोरंजक बनाने के लिए कई वर्षों तक इसके नियमों में संशोधन किया जाता रहा है, फिर जाकर मौजूदा नियम अस्तित्व में आया है।

साल 1896 के ओलंपिक की शुरुआत में और आज की कुश्ती में मुख्य अंतर ये था कि उस दौर में घड़ी का अविष्कार नहीं हुआ था। इसलिए खेल की कोई समय सीमा नहीं होती थी।

मुकाबला जीतने का एकमात्र तरीका प्रतिद्वंद्वी को पिन यानी चारों खाने चित्त करना होता था। जिसकी वजह से कई बार काफी देर तक कुश्ती का मुकाबला चलता रहता था, क्योंकि कोई भी पहलवान जीत या हार नहीं रहा होता था। शायद यही वजह रही कि साल 1912 में हुआ ओलंपिक कुश्ती के इतिहास की सबसे लंबी फाइट का गवाह बना। 

सबसे लंबा ओलंपिक कुश्ती मैच

ओलंपिक इतिहास में सबसे लंबा कुश्ती मैच स्टॉकहोम में 1912 के ओलंपिक में मिडिलवेट डिवीजन में एस्टोनिया के मार्टिन क्लेन और फिनलैंड के अल्फ्रेड असिकैनेन के बीच लड़ा गया था। यह मुकाबला 11 घंटे 40 मिनट तक चला।

ये मुकाबला ग्रीको-रोमन शैली में आयोजित किया गया था, जो लोकप्रिय फ्रीस्टाइल कुश्ती के विपरीत निचले शरीर को विरोधियों पर हमला करने या पकड़ने की अनुमति नहीं देता है। ग्रैपलर केवल मूव्स करने के लिए अपनी अपर बॉडी का इस्तेमाल कर सकते हैं।

वास्तव में, स्टॉकहोम खेलों में केवल ग्रीको-रोमन कुश्ती शामिल थी।

दिलचस्प बात यह है कि मार्टिन क्लेन जो मूल रूप से एस्टोनिया के थे, उन्होंने 1912 के ओलंपिक में रूसी साम्राज्य का प्रतिनिधित्व किया था। दूसरी ओर अल्फ्रेड असिकैनेन ने नॉर्डिक राष्ट्र के बाद से फिनिश जर्सी पहन रखी थी। रूसी साम्राज्य का हिस्सा होने के बावजूद, ग्रैंड डची का फिनलैंड अपने आप में स्वायत्त देश था।

ओलंपिक 1912 में 14 देशों के कुल 38 पहलवानों ने हिस्सा लिया था, जिसमें 1911 के विश्व चैंपियन अल्फ्रेड असिकैनेन भी शामिल थे, जो स्टॉकहोम खेलों में स्वर्ण पदक के प्रबल दावेदार थे।

फिन ने जोरदार शुरुआत करते हुए अपने पहले तीन विरोधियों को चारों खाने चित्त किया और अपने लगातार सात मुकाबले जीते। जिसमें पांचवां मुकाबला उनका स्वर्ण पदक विजेता क्लेस जॉनसन से हुआ और उसमें भी उन्होंने जीत हासिल की।

फिनलैंड के प्रतिद्वंद्वी की तरह माइक क्लेन भी पूरी प्रतियोगिता में अपराजित रहे, रिकॉर्ड तोड़ने वाले मैच से पहले उन्होंने भी सात पहलवानों को मात दी।

सात राउंड के बाद, तीन पहलवान क्लेन, असिकैनेन और जॉनसन खिताब जीतने के प्रबल दावेदार थे।

पदक दौर का पहला मैच माइक क्लेन और अल्फ्रेड असिकैनेन के बीच आयोजित किया गया था, जिसमें जो जीतता वह स्वर्ण पदक मुकाबले में जगह बना पाता।

स्टॉकहोम ओलंपिक स्टेडियम में प्रचंड स्वीडिश गर्मी पड़ रही थी, मैच 11 घंटे और 40 मिनट तक चला। इसके बाद मार्टिन क्लेन ने अल्फ्रेड असिकैनेन को हराकर फाइनल में प्रवेश किया। इसका मतलब स्वर्ण पदक के प्रबल दावेदार असिकैनेन को कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा।

हार के बावजूद असिकैनेन ओलंपिक इतिहास के सबसे लंबे कुश्ती मैच का हिस्सा रहे। मार्टिन क्लेन और अल्फ्रेड असिकैनेन दोनों का ये मुकाबला ओलंपिक इतिहास का रिकॉर्ड सबसे लंबा मुकाबला बन गया। यही नहीं इन दोनों ने रिकॉर्ड बुक में अपना नाम हमेशा के लिए दर्ज करवा लिया।

क्या रोमांचक मुकाबला था, मार्टिन क्लेन लगभग आधे दिन तक लड़ने के चलते अंत में फाइनल नहीं खेल पाए, लेकिन वह जो मुकाबला जीत चुके थे, उनके जीवन का वह सबसे बड़ा और यादगार मुकाबला था। इस प्रकार स्वीडन के क्लेस जॉनसन को वॉकओवर मिला और वह मिडिलवेट स्वर्ण पदक विजेता घोषित किए गए। इस तरह से क्लेन को रजत पदक से संतोष करना पड़ा।

वर्षों बाद क्लेन को 1920 में अपने दूसरे ओलंपिक में प्रतिस्पर्धा करने का अवसर मिला, लेकिन उन्होंने युवा पहलवानों को मौका देने का फैसला किया। लेकिन उन्होंने एस्टोनियाई कुश्ती दल को एंटवर्प 1920 में हुए ओलंपिक में कोचिंग देने का फैसला किया।

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