‘मैंने कभी आलोचना को गंभीरता से नहीं लिया’- कृष्णा नागर  

टोक्यो पैरालंपिक के स्वर्ण पदक विजेता ने अपनी आलोचना और हालही में पाई सफलता पर खुल कर बात की। 

लेखक दिनेश चंद शर्मा
फोटो क्रेडिट Kiyoshi Ota/ Getty Images

कृष्णा नागर (Krishna Nagar) टोक्यो पैरालंपिक में भारत के सितारों में से एक थे, जिन्होंने बैडमिंटन में स्वर्ण पदक के साथ भारतीय प्रशंसकों का दिल और दिमाग जीत लिया। टोक्यो पैरालंपिक में पुरुषों की SH6 वर्ग में जीत नागर के लिए अपने छोटे कद की दुर्बलता के कारण अपने प्रारंभिक वर्षों में झेली बहुत सारी नकारात्मकता को करारा जवाब था। 

हालांकि, नागर ने ज्यादातर मौकों पर अपने खिलाफ हुई आलोचनाओं को हल्के में लिया, लेकिन वो स्वीकार करते हैं कि वह मुश्किल समय था। लेकिन, वो सकारात्मक रहे और टोक्यो में खुद को साबित करने के मौके का भरपूर फायदा उठाया। 

नागर ने Olympics.com को बताया, "जब मेरे पास (अपने करियर में दिखाने के लिए) कुछ नहीं था, तब लोग मेरी आलोचना करते थे। मुझसे कहते थे कि 'मैं कुछ नहीं कर सकता' और इसमें मेरे सहपाठी भी शामिल थे।" 

उन्होंने कहा, "लेकिन मुझे कभी बुरा नहीं लगा कि लोग मेरी लंबाई का मजाक उड़ा रहे थे। क्योंकि, मैं इसका जवाब उसी समय दे सकता था। मैंने इन बातों को हल्के में लिया। मुझे केवल तभी बुरा लगा, जब लोगों ने मुझसे कहा कि आप अपने करियर में कुछ अच्छा नहीं कर सकते।"  

उन्होंने टोक्यो पैरालंपिक में अपनी सफलता के साथ इसका सही जवाब दे दिया। इसके कारण आलोचकों ने उनका खुली बाहों से स्वागत किया। लेकिन, वो स्वीकार करते हैं कि भारतीय पैरा-बैडमिंटन के मुख्य कोच गौरव खन्ना (Gaurav Khanna) के मार्गदर्शन के बिना यह उपलब्धि हासिल करना संभव नहीं होता।

नागर ने कहा, "मुझे लगता है कि पैरालंपिक में स्वर्ण पदक मेरे लिए एक बड़ी उपलब्धि है। क्योंकि, पिछले कुछ सालों की सारी मेहनत रंग लाई है। पैरा-बैडमिंटन को पैरालंपिक कार्यक्रम में शामिल किए जाने के बाद से ही हमने किसी भी तरह से सफलता हासिल करने के लिए बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया था। यह न केवल मेरे लिए, बल्कि मेरे कोच गौरव खन्ना के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि थी।"  

सकारात्मक दृष्टिकोण ने भी नागर को मानसिक बाधा को पार करने और प्रतियोगिताओं में अपना पहला स्वर्ण पदक हासिल करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने इससे पहले 2019 विश्व चैंपियनशिप और 2018 एशियाई पैरा खेलों में कांस्य पदक जीता था।

राजस्थान के पैरा-बैडमिंटन खिलाड़ी ने कहा, "मैं अपनी ताकत के हिसाब से खेलना पसंद करता हूं। भले ही मेरा प्रतिद्वंद्वी मजबूत हो और अच्छा खेलता हो, लेकिन हम सकारात्मक रवैया रख कर चुनौतियों से पार पा सकते हैं। यह हर समय अपना सर्वश्रेष्ठ देने जैसा है। हमने पहले पैरालंपिक के लिए प्रशिक्षण के दौरान सकारात्मकता पर कड़ी मेहनत की थी।"  

उन्होंने आगे बताया, "मेरी सबसे बड़ी ताकत मेरी बौनेपन के बावजूद मेरा कोर्ट कवरेज है। मेरी गति और जंप प्रहार के साथ नेट के आसपास तेज रहने और शॉट को पकड़ने का विचार मेरे खेल में मदद करता है।"  

नागर, अब 2024 में पेरिस पैरालंपिक के लिए अपनी लय बनाए रखने के लिए 'शून्य' से अपना प्रशिक्षण फिर से शुरू करने से पहले अपनी सफलता का पूरा जश्न मनाना चाहते हैं।

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