हॉकी सितारों को जानें: टोक्यो 2020 ओलंपिक कांस्य पदक विजेता भारतीय पुरुष हॉकी टीम में कौन—कौन हैं शामिल? 

जानिए, 5 अगस्त को टोक्यो में इतिहास रचने वाले 18 खिलाड़ियों के बारे में।

लेखक दिनेश चंद शर्मा

कोच ग्राहम रीड (Graham Reid) को उस समय कुछ ऐसे सवालों का सामना करना पड़ा, जब उन्होंने 16 सदस्यीय टीम में 10 नए खिलाड़ियों को शामिल किया, जिन्हें ओलंपिक में खेलने का कोई पूर्व अनुभव नहीं था। ऑस्ट्रेलियाई ने तर्क दिया कि उन्होंने टीम चयन के पीछे बहुत सोचा था और सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को चुना।

टोक्यो 2020 के लिए कोविड-19 के चलते मिली छूट के कारण दो खिलाड़ियों को 16-सदस्यीय टीम में 'वैकल्पिक एथलीटों' के रूप में शामिल गया था।भारतीय टीम ने टोक्यो 2020 में जर्मनी को 5-4 से हराकर, 41 साल बाद ओलंपिक में पदक जीतकर रीड के निणर्य को सही ठहराया। जूनियर खिलाड़ी दिलप्रीत सिंह, शमशेर सिंह ने अपनी क्षमता साबित की और कप्तान मनप्रीत सिंह और गोलकीपर पीआर श्रीजेश जैसे वरिष्ठ खिलाड़ियों का सपोर्ट किया।

आइए, एक नजर डालते हैं उन 18 खिलाड़ियों पर, जिन्होंने 41 साल बाद भारत को पोडियम पर पहुंचने में मदद की।

मनप्रीत सिंह (Manpreet Singh)

दिग्गजों में से एक मनप्रीत का तीसरा ओलंपिक खेल था। 2019 में वह FIH मेन्स हॉकी प्लेयर ऑफ द ईयर चुने जाने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बने। वो पद्मी श्री परगट सिंह को अपना आदर्श मानते हैं, जो उन्हीं के गांव (जालंधर) के रहने वाले हैं। 2011 में उन्होंने भारतीय जूनियर टीम में पदार्पण किया और एक साल के भीतर, उन्हें 2012 के लंदन ओलंपिक की यात्रा करने वाली टीम का हिस्सा बनने के लिए पदोन्नत किया गया। ओलंपिक कांस्य के अलावा, उन्होंने एशियाई खेलों का स्वर्ण, एशिया कप स्वर्ण और दो एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी पदक जीते हैं।

पी.आर श्रीजेश (P.R Sreejesh)

मनप्रीत के साथ वह टीम में सबसे वरिष्ठ और अनुभवी खिलाड़ियों में से एक हैं। यह उनका तीसरा ओलंपिक था, उन्होंने लंदन 2012 में अपनी पहली ओलंपिक उपस्थिति दर्ज की थी। कोच्चि के गोलकीपर ने 2006 में भारत के लिए पदार्पण किया था और तब से गोलपोस्ट के बीच एक दीवार हैं। टोक्यो 2020 में उन्होंने बेहतरीन प्रदर्शन किया। पूरे टूर्नामेंट में कई महत्वपूर्ण बचाव किए। मनप्रीत की तरह उन्होंने एशियाई खेलों का स्वर्ण पदक और कुछ एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी जीत में टीम के साथ अहम भूमिका निभाई हैं।

हरमनप्रीत सिंह (Harmanpreet Singh)

मजबूत डिफेंडर और भारत के करिश्माई ड्रैग-फ्लिकर जूनियर विश्व कप चैंपियन हैं। रियो 2016 में भाग लेने के बाद, यह उनका दूसरा ओलंपिक था। उनका ठोस बचाव और पेनल्टी कार्नर से उनके गोल टोक्यो में भारत के लिए वरदान साबित हुए थे। वह जालंधर में सुरजीत हॉकी अकादमी से प्रशिक्षित हुए हैं और उनका फारवर्ड बनने का सपना था। उन्होंने 2017 में एशिया कप जीता और 2018 में एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी का स्वर्ण पदक भी जीता।

रुपिंदर पाल सिंह (Rupinder Pal Singh)

रूपिंदर को टोक्यो की 16 सदस्यीय टीम में शामिल करने को लेकर काफी चर्चा हो रही थी, क्योंकि पिछले साल उनका प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा था। लेकिन, डिफेंडर ने ट्रेसर बुलेट जैसी ड्रैग फ्लिक्स के साथ अपनी योग्यता साबित की, जो अक्सर गोल करती थी। 2018 में उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया था, लेकिन 2019 में उन्होंने अपने रक्षात्मक कौशल और फिटनेस में सुधार करते हुए वापसी की। रियो 2016 के बाद यह उनका दूसरा ओलंपिक था। उनके नाम 216 मैच और 115 गोल हैं।

सुरेंद्र कुमार (Surender Kumar)

भरोसेमंद डिफेंडर ने 2011 में अंतरराष्ट्रीय टीम में पदार्पण किया। वह डिफेंस में प्रभावशाली प्रदर्शन के लिए दिल्ली वेवराइडर्स के साथ खेलते हुए अग्रणीय खिलाड़ी रहे। वह ओडिशा में एक निर्धन परिवार से आते हैं और यहां तक ​​कि उनकी पहली हॉकी स्टिक भी उनके पड़ोसी की ओर से उपहार में दी गई थी। वह 2017 एशिया कप जीतने वाली टीम का हिस्सा थे।

बीरेंद्र लाकड़ा (Birendra Lakra)

लाकड़ा एक और सीनियर खिलाड़ी हैं, जिनके नाम पर 200 से अधिक मैच हैं। घुटने की चोट ने उन्हें रियो 2016 में भाग नहीं लेने दिया, लेकिन उन्होंने अपने दूसरे ओलंपिक में भाग लेने के लिए टोक्यो की यात्रा करने का फैसला किया। वह आमतौर पर पेनल्टी कार्नर का बचाव करते हुए सबसे पहले दौड़ने वालों में से एक होते हैं। उनके पास एशियाई खेलों में एक स्वर्ण, राष्ट्रमंडल खेलों में एक रजत और विश्व लीग में दो कांस्य पदक हैं।

सिमरनजीत सिंह (Simranjeet Singh)

हमलावर मिडफील्डर शुरुआती 16 सदस्यीय टीम का हिस्सा नहीं थे, जिसकी घोषणा ग्राहम रीड ने की थी। वह तीन रिजर्व में से एक के रूप में टोक्यो गए। सिमरनजीत और वरुण कुमार को तब 'वैकल्पिक एथलीट' के रूप में टीम में शामिल किया गया था। कांस्य पदक मैच में उन्होंने जर्मनी के खिलाफ दो महत्वपूर्ण गोल किए और अपनी क्षमता साबित की। वह 2016 जूनियर विश्व कप जीतने वाली टीम का हिस्सा थे।

अमित रोहिदास (Amit Rohidas)

डिफेंडर ने भले ही ओलंपिक में पदार्पण नहीं किया हो, लेकिन वह एक अनुभवी खिलाड़ी हैं, जो 2013 में सुल्तान अजलान शाह कप के बाद से मैदान में हैं। वह ओडिशा के सौनामुरा गांव के रहने वाले हैं, जो एक ऐसी जगह जिसे हॉकी के दिग्गज दिलीप तिर्की (Dileep Tirkey) के उभरने के बाद पहली बार प्रमुखता मिली थी। उनकी पसंदीदा जीत का क्षण ढाका, 2017 में एशिया कप जीत है।

हार्दिक सिंह (Hardik Singh)

मिडफील्डर 2018 में मस्कट में एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी जीतने वाली टीम का हिस्सा थे। यह उनका पहला बड़ा टूर्नामेंट था। वह पूर्व ड्रैग-फ्लिकर जुगराज सिंह के रिश्तेदार हैं। दरअसल उनके पिता वरिंदरप्रीत सिंह भी इंटरनेशनल हॉकी खिलाड़ी थे। उन्होंने भारत के लिए 39 मैच खेले हैं और उनके नाम एक गोल भी है। कड़ी मेहनत और खेल के प्रति जुनून के कारण कोबे ब्रायंट उनके आदर्श हैं। हराने के लिए उनका पसंदीदा प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान है।

विवेक सागर प्रसाद (Vivek Sagar Prasad)

वह जनवरी, 2018 में जापान के खिलाफ 17 साल, 10 महीने और 22 दिनों में भारत के लिए डेब्यू करने वाले दूसरे सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बन गए। उसके बाद से उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने 2019 FIH राइजिंग स्टार ऑफ़ द ईयर अवार्ड जीता और इतिहास में अपना नाम FIH पुरस्कार जीतने वाले पहले भारतीय के रूप में दर्ज किया। इसके अलावा, उन्हें 2019 FIH सीरीज़ फ़ाइनल में टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ युवा खिलाड़ी भी चुना गया था।

नीलकांत शर्मा (Nilakanta Sharma)

नीलकांत शर्मा मिडफील्डर हैं और मणिपुर के रहने वाले हैं। देश के एक फुटबॉल हॉटस्पॉट से संबंधित होने के बावजूद, उन्होंने हॉकी को चुना और 2017 में भारत के यूरोप दौरे के दौरान बेल्जियम के खिलाफ राष्ट्रीय टीम के लिए पदार्पण किया। वह 2018 में एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी का स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम का हिस्सा थे।

सुमित (Sumit)

फॉरवर्ड, भारत के पूर्व फारवर्ड धनराज पिल्लई के बहुत बड़े प्रशंसक हैं। सुमित वाराणसी, उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। उन्होंने 2017 में 27वें सुल्तान अजलान शाह कप में भारतीय टीम के लिए पदार्पण किया। 2016 में हॉकी जूनियर विश्व कप में स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम में प्रभावशाली प्रदर्शन के बाद उन्हें राष्ट्रीय टीम में बुलाया गया।  

शमशेर सिंह (Shamsher Singh)

युवा फॉरवर्ड ने टोक्यो ओलंपिक के लिए टेस्ट इवेंट, 2019 मेंस रेडी स्टेडी टोक्यो हॉकी टूर्नामेंट में भारतीय टीम में पदार्पण किया। उन्हें जालंधर में सुरजीत हॉकी अकादमी में प्रशिक्षित किया गया था और उन्होंने सरकारी नौकरी के लिए हॉकी को एक मार्ग के रूप में लिया। हालांकि, उन्होंने उत्कृष्ट प्रदर्शन करना जारी रखा और जल्द ही खुद को भारत जूनियर टीम में शामिल हुए।

मनदीप सिंह (Mandeep Singh)

सिंह हॉकी के एक और दिग्गज खिलाड़ी हैं, जिनके नाम पर 150 से अधिक मैच हैं। उन्होंने आखिरकार फरवरी, 2013 में अपनी पहली अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति के सात साल बाद टोक्यो 2020 में ओलंपिक में पदार्पण किया, जहां भारत ने फिजी को 16-0 से हराया। उन्होंने एशियाई खेलों, चैंपियंस ट्रॉफी, विश्व लीग जैसी लगभग सभी प्रमुख हॉकी प्रतियोगिताओं में पदक जीता है और टोक्यो में एक पोडियम फिनिश ने उनकी ट्रॉफी कैबिनेट को पूरा किया है। उन्होंने 83 गोल किए हैं और सरदार सिंह को अपना आदर्श मानते हैं।

दिलप्रीत सिंह (Dilpreet Singh)

दिलप्रीत सिंह भारत के सबसे बेहतर युवा फॉरवर्ड में से एक हैं, जिन्होंने अपने पिता बलविंदर सिंह को सेना के लिए खेलते हुए देखकर हॉकी को पसंद किया। वह सुरजीत सिंह अकादमी के कैडेट हैं और उन्होंने 2018 में भारत के न्यूजीलैंड दौरे में पदार्पण किया। वह आकाशदीप सिंह से प्रेरित हैं और उनका पसंदीदा जीत का क्षण 2018 में एशियाई खेलों का पदक है।

गुरजंत सिंह (Gurjant Singh)

2016 में जूनियर विश्व कप में अपने शानदार प्रदर्शन के बाद गुरजंत सिंह को देश के सबसे शक्तिशाली फॉरवर्ड में से एक माना जाता था। हालांकि, लगातार चोटों ने उन्हें अपनी क्षमता को और विकसित करने से रोक दिया। इस कारण उन्होंने चार सालों में केवल 45 मैच खेले हैं। नीदरलैंड के खिलाफ FIH प्रो लीग के शुरुआती मुकाबले में उन्होंने केवल 13 सेकंड में भारत के लिए सबसे तेज अंतरराष्ट्रीय गोल किया।

ललित कुमार उपाध्याय (Lalit Kumar Upadhyay)

ललित एक और अनुभवी खिलाड़ी हैं, जिन्होंने टोक्यो 2020 में ओलंपिक में पदार्पण किया। फारवर्ड, रोजर फेडरर और धनराज पिल्लई के प्रशंसक हैं और अपने खेल में उनकी कड़ी मेहनत और महत्वाकांक्षी प्रकृति को शामिल करने की कोशिश करते हैं। उन्होंने 2008 में मलेशिया में आठ देशों के टूर्नामेंट में अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में पदार्पण किया। उन्होंने दो बार एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी, एक बार एशिया कप और एशियाई खेलों और विश्व लीग में कांस्य पदक जीते हैं।

वरुण कुमार (Varun Kumar)

पंजाब के रहने वाले वरुण कुमार को वैकल्पिक एथलीट के रूप में टोक्यो 2020 टीम में बाद में शामिल किया गया था। वह जालंधर के पास मीठापुर गांव के रहने वाले हैं और उन्होंने सुरजीत सिंह अकादमी में हॉकी के गुर सीखे। डिफेंडर साधारण पृष्ठभूमि से आते हैं और उनके पिता एक ऑटो-रिक्शा चालक थे। वह 2015 में जूनियर विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा थे और 2017 में सीनियर टीम में पदार्पण किया। वह भारतीय टीम के मौजूदा कप्तान मनप्रीत सिंह को आदर्श मानते हैं।