एशियन गेम्स में कबड्डी का इतिहास: पुरुष और महिला टीमों का रहा वर्चस्व

भारतीय पुरुष टीम ने 1990 के बाद से एशियाई खेलों में आठ में से सात स्वर्ण पदक जीते हैं, जबकि भारतीय महिला टीम ने 2010 के बाद से तीन में से दो स्वर्ण पदक जीते हैं।

लेखक विवेक कुमार सिंह
फोटो क्रेडिट Getty Images

भारत में सबसे लोकप्रिय खेलों में से एक कबड्डी ने पिछले कुछ सालों से खेल प्रेमियों को कई रोमांचक पल दिए हैं। कबड्डी दर्शकों के लिए एक आकर्षक पैदा करने वाले शारीरिक शक्ति, चपलता और रणनीति का खेल है।

4000 साल पुराना इतिहास रखने वाले कबड्डी को बर्लिन 1936 ओलंपिक से पहले एक प्रदर्शनी खेल के रूप में प्रदर्शित किया गया था। इस खेल को जल्द ही एशिया में लोकप्रियता मिली और इसे 1951 और 1982 में एशियाई खेलों में एक प्रदर्शनी खेल के रूप में शामिल किया गया।

हालांकि, चीन के बीजिंग में 1990 के संस्करण के एशियन गेम्स के कार्यक्रम में शामिल किए जाने के बाद कबड्डी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नियमित रुप से देखा जाने लगा।

तब से ये खेल हर एशियन गेम्स का हिस्सा रहा है। एशियन गेम्स में कबड्डी सिर्फ पुरुषों का इवेंट हुआ करता था, बाद में साल 2010 से महिलाओं की स्पर्धा भी प्रतियोगिता भी शुरू की गई।

ये जानकार आपको आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि एशियाई खेलों में भारतीय कबड्डी टीम का दबदबा रहा है।

1990 के एशियाई खेलों में छह टीमों ने भाग लिया। भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान, चीन, जापान और नेपाल की टमों ने राउंड-रॉबिन प्रारूप में प्रतिस्पर्धा की, जहां प्रत्येक टीम एक बार दूसरे के साथ खेलना था। भारत टूर्नामेंट में अपराजित रहा और स्वर्ण पदक जीता।

2002 तक हर संस्करण में राउंड-रॉबिन प्रारूप को फॉलो किया गया और भारतीय मेंस टीम वे एशियन गेम्स में कभी भी एक मैच भी नहीं गंवाया और सभी स्वर्ण पदक जीते।

कतर के दोहा में आयोजित हुए एशियन गेम्स 2006 में राउंड-रॉबिन लीग के बाद एक नॉकआउट राउंड शुरू किया गया था। लीग स्टेज के बाद शीर्ष दो टीमों के बीत स्वर्ण पदक का मुकाबला हुआ और तीसरे और चौथे स्थान पर रहने वाली टीमें कांस्य पदक के लिए आपस में भिड़ीं।

हालांकि, इस प्रारुप से बी भारत के प्रदर्शन पर कोई फर्क नहीं पड़ा और भारत ने अपने सभी लीग मैच जीते और फाइनल में पाकिस्तान को हराकर पांचवां स्वर्ण पदक जीता।

एशियन गेम्स 2010 के बाद से पुरुष और महिला टीमों की कबड्डी प्रतियोगिताओं के लिए ग्रुप-स्टेज के बाद नॉकआउट प्रारूप का आयोजन किया जाने लगा।

भारतीय पुरुष और महिला टीमों ने 2010 और 2014 के संस्करणों में अजेय रहते हुए स्वर्ण पदक जीते। एशियन गेम्स 2010 के सेमीफाइनल में हारने वाले दोनों टीमों को कांस्य पदक से सम्मानित किया गया।

हालांकि, 2018 में ईरान ने भारत की स्वर्णिम यात्रा को रोका और पहली बार किसी दूसरी टीम ने स्वर्ण पदक जीता।

पुरुषों की इवेंट में भारतीय नेशनल कबड्डी टीम को ग्रुप स्टेज में दक्षिण कोरिया से 23-24 से हार का सामना करना पड़ा, जो भारतीय टीम की पहली हार थी। भारतीय टीम ग्रुप में दूसरे स्थान पर रहते हुए सेमीफाइनल के लिए क्वालीफाई किया, लेकिन जल्द ही उन्हें दूसरी हार का सामना करना पड़ा और मौजूदा चैंपियन ईरान से हारने के बाद कांस्य के साथ अपना सफर समाप्त किया।

हालांकि भारतीय महिला टीम की कहानी पुरुषों की तुलना में थोड़ी बेहतर थी। उन्होंने अपने सभी ग्रुप मैच जीते और सेमीफाइनल में जगह बना ली, जहां उन्होंने चीनी ताइपे को हराकर ईरान के साथ होने वाले फाइनल मुकाबले में अपनी जगह पक्की कर ली।

हालांकि, फाइनल में ईरान ने भारत को 27-24 से हराकर स्वर्ण पदक जीता और एशियन गेम्स में भारतीय महिला टीम को पहली हार का सामना करना पड़ा।

हांग्जो में होने वाले एशियन गेम्स 2022 में कबड्डी में फिर से भारत अपना दबदबा बनाना चाहेगा।

एशियन गेम्स मेंस कबड्डी चैंपियंस की सूची

संस्करण स्वर्ण पदक रजत पदक कांस्य पदक
1990 भारत बांग्लादेश पाकिस्तान
1994 भारत बांग्लादेश पाकिस्तान
1998 भारत पाकिस्तान बांग्लादेश
2002 भारत बांग्लादेश पाकिस्तान
2006 भारत पाकिस्तान बांग्लादेश
2010 भारत ईरान पाकिस्तान और जापान
2014 भारत ईरान दक्षिण कोरिया और पाकिस्तान
2018 ईरान दक्षिण कोरिया पाकिस्तान और भारत

एशियन गेम्स वूमेंस कबड्डी चैंपियंस की सूची

संस्करण स्वर्ण पदक रजत पदक कांस्य पदक
2010 भारत थाईलैंड बांग्लादेश और ईरान
2014 भारत ईरान थाईलैंड और बांग्लादेश
2018 ईरान भारत चाइनीज ताइपेई और थाईलैंड

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