‘जसपाल राणा या पावेल स्मिरनोव की टोक्यो 2020 में उपस्थिति से मुझे मिलती मदद’-अभिषेक वर्मा 

वर्मा टोक्यो 2020 में पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल और मिश्रित 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धाओं के फाइनल के लिए क्वालीफाई करने में विफल रहे थे।

लेखक दिनेश चंद शर्मा

दुनिया के पूर्व नंबर 1 पिस्टल निशानेबाज अभिषेक वर्मा (Abhishek Verma) भले ही सफलता का स्वाद चखे बिना टोक्यो 2020 से स्वदेश लौट आए हों, लेकिन उन्होंने अपने करियर में एक बड़ा सबक सीखा।

वर्मा को प्रशिक्षण देने वाले कोच जसपाल राणा (Jaspal Rana) और पावेल स्मिरनोव (Pavel Smirnov) भारतीय शूटिंग दल के साथ टोक्यो 2020 की यात्रा नहीं कर सके। ऐसे में वर्मा को आत्मनिर्भर बनना था और यह उनके लिए एक चुनौती थी।

वकील से निशानेबाज बने वर्मा टोक्यो 2020 में पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल और मिक्स्ड 10 मीटर एयर पिस्टल (यशस्विनी सिंह देसवाल के साथ) के दोनों क्वालिफिकेशन इवेंट में 17वें स्थान पर रहे। लेकिन, उनका मानना है कि राणा या स्मिरनोव उनके शॉट्स के बाद मार्गदर्शन करने के लिए वहां मौजूद होते, तो प्रदर्शन बेहतर हो सकता था।

वर्मा ने Olympics.com को बताया, "2018 के बाद से मेरे पास निजी कोच हैं। लेकिन (भारतीय) टीम में आने के बाद टीम के कोच हमें प्रशिक्षण दे रहे थे। हमारे विदेशी कोच पावेल (स्मिरनोव) मुझे 2018 और 2019 में प्रशिक्षित करते थे। इसके बाद मैंने 2020 में जसपाल राणा के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण शुरू किया।"

"पावेल सर या जसपाल सर में से कोई हमेशा कैंपों में या प्रतियोगिताओं में मेरे साथ रहे हैं। क्रोएशिया में पावेल सर साथ थे और फिर जसपाल सर हमारे साथ शामिल हुए। लेकिन, उन्होंने टोक्यो 2020 के लिए हमारे साथ यात्रा नहीं की। यह मेरे लिए निराशाजनक था।

उन्होंने आगे बताया, "जिन दो कोचों के साथ मैंने प्रशिक्षण लिया है, अगर उनमें से एक भी हमारे साथ होता, तो मेरा प्रदर्शन और बेहतर हो सकता था। वे मुझे नियंत्रित और निर्देशित कर सकते थे। क्योंकि कई बार मैं उन गलतियों को नहीं जान पाया, जो मैं कर रहा था। हालांकि, मैं उन्हें नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा था। लेकिन, अगर इनमें से कोई कोच मेरी साथ खड़ा होता, तो वो उस वक्त ही मेरी गलती बता देते। शायद मैं उन पर निर्भर था।"

32 वर्षीय वर्मा ने भी बिना समय गंवाए और टोक्यो 2020 में अपने निराशाजनक प्रदर्शन के बाद अपने द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता कोच राणा से बात की। लेकिन, राणा के लिए भारत में क्वालीफिकेशन इवेंट के प्रसारण को देखे बिना उनके प्रदर्शन का विश्लेषण करना मुश्किल था।

वर्मा ने कहा, "मैंने मैच के बाद जसपाल सर से बात की। लेकिन, क्योंकि क्वालीफिकेशन मैच टेलीविजन पर प्रसारित नहीं होता है, इसलिए वह मेरे प्रदर्शन का विश्लेषण नहीं कर सके। और तब से मैंने किसी पर निर्भर नहीं रहने और अपना खुद का कोच बनने का फैसला किया है।"

उन्होंने कहा, "मैं अपनी समझ के अनुसार खुद को प्रशिक्षित करूंगा। मैं शिविर में कोचों से मदद ले सकता हूं, लेकिन मुख्य रूप से मैं खुद पर निर्भर रहूंगा।"

दो बार के विश्व कप स्वर्ण पदक विजेता भी टोक्यो 2020 में उनसे उम्मीद के दबाव से प्रभावित थे।

वर्मा ने कहा, "ओलंपिक और अन्य बड़े आयोजनों के बीच मुख्य अंतर यह है कि भीड़ या प्रायोजक अन्य आयोजनों को उतना महत्व नहीं देते हैं। लेकिन, जैसे ही हम चयनित होते हैं या आयोजन के लिए रवाना होने वाले होते हैं, हर कोई ओलंपिक का प्रचार करता है। वे इसे बहुत बड़ा बना देते हैं। इतना अधिक कि अगर हम इसके बारे सोचना न भी चाहे, तो हम जानते हैं कि पूरा देश हमें देख रहा है।"  

हालांकि, यह टोक्यो में उनकी पहली ओलंपिक उपस्थिति थी और उनका मानना है कि वह एक निशानेबाज के रूप में परिपक्व हो गए हैं। वर्मा को उम्मीद है कि अगली बार जब उन्हें ओलंपिक में जाने का मौका मिलेगा, तो बेहतर निर्णय लेने से इससे उन्हें मदद मिलेगी।

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