अपने दूसरे ओलंपिक पर है IOC रिफ्यूजी एथलीट स्कॉलरशिप-होल्डर पाउलो अमोटुन लोकोरो की नज़र

दक्षिण सूडान में जन्मे धावक आईओसी और विश्व एथलेटिक्स रिफ्यूजी टीमों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं, और रियो 2016 के मुकाबले के पांच साल बाद टोक्यो ओलंपिक में उन्हें बेहतरीन प्रदर्शन की उम्मीद है।

लेखक सतीश त्रिपाठी

पाउलो अमोटुन लोकोरो को रियो 2016 खेलों में रिफ्यूजी ओलंपिक टीम (Refugee Olympic Team) (EOR, फ्रांसीसी नाम के आधार पर) का हिस्सा रह चुके हैं। जिससे उन्हें एक बार ओलंपिक का अनुभव है।

IOC रिफ्यूजी एथलीट स्कॉलरशिप-धारक (IOC Refugee Athlete Scholarship), एक ट्रैक और मैराथन एथलीट हैं जो मूल रूप से दक्षिण सूडान के रहने वाले हैं। लेकिन अब वो केन्या में रह रहे हैं और अपने दूसरे ओलंपिक में प्रदर्शन करते नजर आएंगे।

फिलहाल केन्या में कोरोना महामारी के कारण टेगला लोरूप पीस फाउंडेशन पर ट्रेनिंग सेंटर को बंद कर दिया गया है। जिसकी वजह से 2021 में टोक्यो 2020 खेलों से पहले उनकी ट्रेनिंग योजना बाधित हो गई है।

पिछले साल वर्ल्ड एथलेटिक्स से बात करते हुए उन्होंने कहा, "सब कुछ ओलंपिक की तैयारी के बारे में है, लेकिन अब स्थगित कर दिया गया है। यह एक तरह से अच्छा है क्योंकि इससे आपको और बेहतर होने के लिए और अधिक समय मिला है। अब मुझे अगले साल की तैयारी करने की कोशिश करनी चाहिए। मुझे उम्मीद है कि मैं टोक्यो में हिस्सा ले सकता हूं।"

आपको बता दें कि लोकोरो का जन्म साल 1992 में हुआ, और एक बच्चे के रूप में अपने परिवार के मवेशी फार्म पर काम किया। उन्होंने साल 2006 में सूडानी गृहयुद्ध के दौरान अपनी मां के पास केन्या आ गए, जहां उनकी मां दो साल पहले उत्तर-पश्चिम केन्या में काकुमा रिफ्यूजी कैंप में आ गई थी।

वहीं, वो स्कूल जाने लगे और कैंप के खेलों में हिस्सा लेने लगे, जहां साल 2015 में लोरूप फाउंडेशन की उन पर नजर पड़ी।

इसके बाद उनका रियो 2016 में सेलेक्शन हुआ, और लोकोरो ने 1500 मीटर ट्रैक एथलेटिक्स स्पर्धा में हिस्सा लिया, जहां वो 14 धावकों में से 11 वें स्थान पर रहे।

उस मुकाबले के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर कभी नहीं देखा, और 2017 वर्ल्ड रिले, 2017 एशियन इंडोर गेम्स, 2018 वर्ल्ड हाफ मैराथन चैंपियनशिप, 2018 अफ्रीकी चैंपियनशिप में वर्ल्ड एथलेटिक्स एथलीट रिफ्यूजी टीम में हिस्सा लिया। जहां वो 1500 मीटर फाइनल और 2019 वर्ल्ड चैंपियनशिप में अपनी जगह बनाने में कामयाब हुए।

इस महामारी के दौरान, लोकोरो नैरोबी से काकुमा वापस आ गए।

उन्होंने वर्ल्ड एथलेटिक्स से बात करते हुए आगे कहा, "यहां कोई ट्रैक नहीं है, लेकिन यहां खुला मैदान है।"

"यहां कोई जगह नहीं है जहां हम जा सकते हैं। हमारे लिए सब कुछ रुक गया है। लेकिन हमें अपनी ट्रेनिंग जारी रखने की जरूरत है, और साथ ही हमें अपनी फिटनेस बनाए रखने की जरूरत है।

"ताकि हम तैयार रहें, और मौका मिलने पर हम अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकें।"

फिलहाल उम्मीद है कि हम टोक्यो में लोकोरो को EOR के हिस्से के रूप में देखेंगे।

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