टोक्यो ओलंपिक में दूसरी बार हिस्सा लेने वाली रिफ्यूजी ओलंपिक टीम तैराक युसरा मर्दिनी का परिचय

रियो 2016 में अपनी बटरफ्लाई हीट से जीतने के बाद, IOC रिफ्यूजी एथलीट स्कॉलरशिप-धारक युसरा मर्दिनी 2021 में टोक्यो 2020 में संभावित दूसरे ओलंपिक खेलों में उसी तरह का प्रदर्शन दोहराना चाहती है।

लेखक लक्ष्य शर्मा
फोटो क्रेडिट Getty Images

युसरा मर्दिनी उन 10 एथलीटों में से एक थीं, जिन्होंने रियो 2016 में पहली रिफ्यूजी ओलंपिक टीम का हिस्सा बनी थी।

 सीरिया में जन्मी, जर्मनी की तैराक अपनी 100 मीटर बटरफ्लाई हीट जीतने के बाद वैश्विक सुर्खियों में छा गई थी। हालांकि उनका समय सेमीफाइनल के लिए क्वालीफाई करने के लिए पर्याप्त रफ्तार तेज नहीं था, लेकिन इस प्रदर्शन की बदौलत वह दुनिया की नजरों में जरूर आ गई।

आईओसी रिफ्यूजी एथलीट छात्रवृत्ति-धारक के रूप में, मर्दिनी 2021 में ओलंपिक खेलों टोक्यो 2020 में दूसरा मौके को लक्ष्य बनाकर चल रही है।

रियो के बाद से, मर्दिनी ने 2017 और 2019 विश्व चैंपियनशिप में भी भाग लिया है। वहीं इस साल की शुरुआत में अप्रैल में जर्मन नेशनल ट्रायल्स में 1:00.88 का एक नया 100 मीटर फ्रीस्टाइल व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया।

उन्होंने अपनी कहानी के बारे में 2018 में एक किताब भी जारी की और अब इस पर एक फिल्म बनने वाली है (हालांकि कोविड -19 महामारी से इसके काम में बाधा पड़ी है।

देश भर में फैले सीरियाई गृहयुद्ध से पहले, मर्दिनी एक होनहार युवा तैराक थीं, जिन्होंने 14 वर्ष की आयु में 2012 में विश्व तैराकी चैंपियनशिप (25 मीटर) में अपने देश का प्रतिनिधित्व किया था।

हालांकि, उन्होंने 2015 में अपने गृह देश से भागने का फैसला किया, पहले ग्रीस जाने से पहले वह नाव से तुर्की भाग गई थी।

रास्ते में वह डूबने लगी, मर्दिनी और उसकी बहन ने टूटी हुई नाव को खुले पानी में धकेल दिया। आखिरकार, मर्दिनी और उनकी बहन बर्लिन तक पहुंचे, जहां उन्होंने शरणार्थियों के रूप में अपने जीवन को फिर से शुुरू किया। इसके बाद मर्दिनी ने पूल में प्रशिक्षण फिर से शुरू किया।

रियो 2016 में उद्घाटन समारोह में मार्च करते हुए मर्दिनी ने कहा: "पूरा स्टेडियम खड़ा हो गया। यह अविश्वसनीय था। "सच कहूं तो मैं अपने जीवन में किसी भी चीज़ के लिए इस पल का सौदा नहीं करूँगी।"

मर्दिनी को अप्रैल 2017 में रिफ्यूजी सद्भावना राजदूत के लिए संयुक्त राष्ट्र का सबसे कम उम्र का उच्चायुक्त नियुक्त किया गया था।

"मैं हमेशा लोगों से कहती हूं कि [रिफ्यूजी] सामान्य हैं; हम सामान्य लोग ही हैं।

"हम ऐसे देश से नहीं आते हैं जो गरीब है। यह सच नहीं है।"

अब हैम्बर्ग में जर्मन राष्ट्रीय टीम के साथ प्रशिक्षण करते हुए यह प्रेरणादायक महिला अपना प्रभाव डालने के लिए तैयार है। शायद टोक्यो में दूसरी रिफ्यूजी ओलंपिक टीम के हिस्से के रूप में।

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