Sjoerd Marijne ने बदल दी भारतीय महिला हॉकी टीम की तस्वीर, जानिए इनके बारे में हर बात

भारतीय महिला हॉकी टीम के मुख्य कोच Sjoerd Marijne ने भारतीय टीम को बुलंदी तक पहुंचाने का काम किया है। कोच की कोशिशों का ही नतीजा है कि टीम ने टोक्यो ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन किया।

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भारतीय महिला हॉकी के लिए टोक्यो ओलंपिक मील का पत्थर साबित हुआ है।

1980 में मॉस्को में हुए पहले ग्रीष्मकालीन खेलों में चौथे स्थान पर रहने के बाद से ही भारतीय महिला हॉकी टीम को विश्व स्तर के इतिहास में काफी पीछे छोड़ दिया गया था।

जबकि टीम को एशियाई और राष्ट्रमंडल खेलों में समय-समय पर सफलता मिली है, भारतीय खिलाड़ियों को ओलंपिक और एफआईएच हॉकी वर्ल्ड लीग जैसे वैश्विक इवेंट्स में काफी संघर्ष करना पड़ता है।

36 साल के इंतजार के बाद 2016 में टीम ने पहले ग्रीष्मकालीन खेलों में एंट्री की, ऐसा लग रहा था कि टीम ने रियो 2016 में पदक के लिए सारी तैयारी कर ली है, लेकिन वह भी एक असफलता में बदल गई। हालांकि, यह अभियान छोटा था क्योंकि भारत ग्रुप स्टेज में आगे बढ़ने में विफल रहा।

लेकिन टोक्यो में भारतीय खिलाड़ियों ने दमदार शुरूआत की, ना केवल ग्रुप स्टेज से आगे निकले बल्कि ऑस्ट्रेलिया टीम को मात देकर एक ऐतिहासिक सेमीफाइनल मैच में पहुंच बनाई और दुनिया की नंबर दो टीम अर्जेंटीना का सामना करने को तैयार हुईं।

कहने की जरूरत नहीं है कि टीम ने अपने रियो अभियान के बाद से अपने खेल को मजबूत किया है, जिसमें भारतीय महिला राष्ट्रीय हॉकी टीम के मुख्य कोच Sjoerd Marijne ने एक बड़ी भूमिका निभाई है।

कौन हैं Sjoerd Marijne?

डच प्रांत नॉर्थ ब्रेबेंट में स्थित हर्टोजेनबोश शहर में 20 अप्रैल, 1974 को जन्मे, Sjoerd Marijne ने कम उम्र से हॉकी के साथ खेलना शुरू कर दिया था और अपने स्थानीय क्लब एचसी डेन बॉश का प्रतिनिधित्व किया।

डेन बॉश हॉफडक्लास क्लब अग्रणी क्लबों में से एक हैं, नीदरलैंड के राष्ट्रीय क्लब हॉकी लीग में से एक। उन्होंने दस साल तक हॉकी खेली और इस दौरान Marijne ने 1998 और 2001 में दो बार राष्ट्रीय चैंपियनशिप जीती। वह डेन बॉश टीम का भी हिस्सा थे, जिसने 1999 में यूरो हॉकी क्लब चैंपियंस कप जीता था।

अपने खेल करियर को समाप्त करने के बाद Sjoerd Marijne ने कोचिंग ली। उन्होंने टीएमएचसी टिलबर्ग, एम्स्टर्डम एच एंड बीसी सहित कई डच क्लबों को कोचिंग दी। इनमें से एक टीम जिसे उन्होंने दो बार राष्ट्रीय चैंपियनशिप में फाइनल में पहुंचाया। Marijne का डेन बॉश के साथ एक लंबा कार्यकाल भी था।

2013 में डच कोच अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुंच गए

नीदरलैंड की जूनियर टीमों के साथ तरह-तरह के कार्यक्रमों के जरिए Sjoerd Marijne ने अंडर-21 महिला टीम को जूनियर विश्व कप खिताब के लिए मार्गदर्शन करने में मदद की, बता दे कि इनकी कोचिंग में पुरुषों की अंडर -21 टीम जूनियर विश्व कप में तीसरे स्थान पर रही थी।

Sjoerd Marijne को 2014 में नीदरलैंड की सीनियर महिला टीम का भार सौपा गया, और डचमैन ने 2015 में हॉकी वर्ल्ड लीग सेमीफाइनल स्वर्ण पदक के लिए टीम का मार्गदर्शन करके विश्व स्तर पर विश्वास कमा लिया।

Sjoerd Marijne को फरवरी 2017 में भारतीय महिला राष्ट्रीय टीम का कोच नियुक्त किया गया।

टोक्यो 2020 के लिए टीम बनाने का काम करने वाले Sjoerd Marijne ने भारत में अपने कोचिंग करियर की अच्छी शुरुआत की, जिससे भारतीय महिलाओं को 2017 में हॉकी वर्ल्ड लीग सेमीफाइनल के लिए क्वालीफाई करने में मदद मिली। हालांकि, सेमीफाइनल में भारत केवल आठवें स्थान सिमट गया।

इससे पहले कि वह अपनी जगह बना पाते, हॉकी इंडिया ने Sjoerd Marijne के हमवतन Roelant Oltmans  को हटा दिया और Sjoerd Marijne को भारतीय पुरुष सीनियर टीम के कोच के रूप में स्थानांतरित कर दिया गया।

Marijne ने टीम को एशिया कप 2017 का स्वर्ण जिताने की पूरी कोशिश की। हालांकि, 2018 राष्ट्रमंडल खेल अभियान में निराशा हाथ लगी और भारतीय पुरुष टीम चौथे स्थान पर रही। उसके बाद डचमैन को महिला टीम की कमान दोबारा सौंपी गई। वहीं Harendra Singh ने पुरुष टीम की कमान संभाली।

Marijne ने टीम की जीत के लक्ष्य के लिए खुद को समर्पित कर दिया और टोक्यो ओलंपिक के लिए महिला टीम को तैयार करना शुरू कर दिया।

उनके नेतृत्व में भारतीय महिलाओं ने 2018 महिला एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी और जकार्ता में एशियाई खेलों में रजत पदक जीते।

डचमैन के मार्गदर्शन में 2019 में भारतीय महिलाओं ने FIH ओलंपिक क्वालीफायर में यूएसए को 6-5 से हराकर टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया।

कोविड महामारी के दौरान टोक्यो 2020 को एक साल आगे बढ़ा दिया, इस दौरान भारतीय कोच ने अपनी टीम के लिए हर संभव प्रयास किए। शुरुआत में उन्होंने अपनी पत्नी और बेटियों के साथ रहने के लिए नीदरलैंड वापस जाने की योजना बना ली थी। लेकिन Sjoerd Marijne अपनी टीम का साथ देने के लिए हवाई अड्डे से लौटे, जो एक बायो बबल में बेंगलुरु में फंस गए थे। उन्हें डर था कि वह ओलंपिक के लिए टीम को बेहतर तरीके से तैयार करने के लिए भारत नहीं लौट पाएंगे।

बहुत कम लोगों ने टोक्यो ओलंपिक में भारतीय महिला टीम का समर्थन किया, Sjoerd Marijne की खिलाड़ियों ने टोक्यो में जोरदार प्रदर्शन से सबको गलत साबित कर दिया।

टोक्यो 2020 में अपने पहले तीन ग्रुप मैच हारने के बाद भारत ने अंतिम दो मैच जीतने के लिए पूरी जान लगा दी, जिसका नतीजा हम सभी ने टोक्यो ओलंपिक के दौरान देखा।

क्वार्टर फाइनल में तीन बार के ओलंपिक चैंपियन ऑस्ट्रेलिया को हार का स्वाद चखाया। ऐतिहासिक जीत के बाद बॉलीवुड स्टार शाहरुख खान ने Sjoerd Marijne से टोक्यो से गोल्ड मेडल वापिस लाने का अनुरोध किया, जिससे वह सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया।

शाहरुख खान ने फिल्म चक दे इंडिया​​! में भारतीय महिला हॉकी टीम के कोच की भूमिका निभाई थी।

अर्जेंटीना से 2-1 की हार ने भले ही भारत की उम्मीदों पर पानी फेर दिया हो, लेकिन Sjoerd Marijne एंड कंपनी के लिए कांस्य पदक जीतने की संभावना अभी भी खत्म नहीं हुई है।