पढ़िए दंगल बहनों की कहानी, जिन्होंने भारतीय महिला कुश्ती को एक नई ऊंचाई दी

गीता और बबीता फोगाट बहनों ने महिला कुश्ती को भारत की मुख्यधारा में लाया, जबकि उनकी चचेरी बहन विनेश ने अपनी खुद की विरासत को आगे बरकरार रखा।

लेखक सतीश त्रिपाठी
फोटो क्रेडिट Facebook/Babita Phogat

भारत में कुश्ती का एक समृद्ध इतिहास रहा है। पिछली शताब्दी के शुरुआत में गामा पहलवान के दिनों से लेकर केडी जाधव और सुशील कुमार जैसे दिग्गजों का दबदबा रहा। वहीं, शुरुआती दिनों में भारत में कुश्ती काफी हद तक पुरुषों तक ही सीमित थी। महिला कुश्ती के लिए पहली बार यह गौरव का पल 2006 विश्व चैंपियनशिप में देखने को मिला, जब 59 किग्रा में अलका तोमर ने कांस्य पदक हासिल किया।

बता दें कि 39 साल में यह देश का पहला वर्ल्ड चैंपियनशिप मेडल था। हालांकि, देश में इसकी ज्यादा चर्चा देखने को नहीं मिली। लेकिन आगे चलकर महिला कुश्ती के प्रति फोगाट बहनों ने सबका नज़रिया बदल दिया।

फोगाट बहनों में गीता, बबीता, रितु और संगीता शामिल हैं। वे कोच महावीर सिंह फोगाट की बेटियां हैं। प्रियंका और विनेश फोगाट उनकी चचेरी बहन हैं, लेकिन महावीर ने उनके पिता राजपाल की मृत्यु के बाद उनका बचपन से ही उनका पालन-पोषण किया।

गीता और बबीता फोगाट ने ऐसे शुरू किया अपना सफर

फोगाट बहनों में गीता और बबीता की कहानी बॉलीवुड फिल्म दंगल में अमर हो गई, जहां सुपरस्टार आमिर खान ने उनके पिता महावीर सिंह फोगाट की भूमिका निभाई। जबकि 2016 की फिल्म के बाद उन्होंने काफी लोकप्रियता हासिल की। हालांकि कुश्ती की दुनिया में उनके कारनामों ने लोगों को बहुत पहले ही ध्यान आकर्षित कर दिया था। गीता फोगाट अपने परिवार में सबसे बड़ी हैं, उन्होंने साल 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स में इतिहास रचा जब उन्होंने महिलाओं के 55 किग्रा भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। इसी के साथ यह कॉमनवेल्थ गेम्स में किसी महिला भारतीय पहलवान द्वारा पहला स्वर्ण पदक था।

छोटी बहन बबीता फोगाट ने 51 किग्रा में रजत पदक जीता। यह दोनों बहनों की कड़ी मेहनत और उनके समर्पण के लिए एक इनाम था। जहां समाज में महिलाओं की निंदनीय अपेक्षाओं के खिलाफ लड़ने से लेकर उनके पिता, एक पूर्व पहलवान और अब एक प्रसिद्ध कोच द्वारा तैयार किए गए सख्त ट्रेनिंग से मिला।

गीता फोगाट राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान थीं।
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दो साल बाद, गीता फोगाट लंदन 2012 में 55 किग्रा वर्ग में प्रतिस्पर्धा करते हुए समर ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने वाली भारत की पहली महिला पहलवान बनीं। वह राउंड ऑफ 16 में तीन बार की ओलंपिक पदक विजेता टोन्या वर्बीक से हार गईं और फिर उन्हें कांस्य पदक के लिए रेपेचेज राउंड में हार का सामना करना पड़ा।

हालांकि, कुछ महीनों के बाद गीता फोगाट ने अपना पहला वर्ल्ड चैंपियनशिप मेडल 55 किग्रा में हासिल किया, जहां उन्होंने कांस्य पदक जीता। वहीं, बबीता फोगाट ने 51 किग्रा वर्ग में कांस्य पदक जीता। बता दें कि यही वो दो पदक थे, जो भारत ने 2012 की महिला विश्व चैंपियनशिप में जीते थे। गीता फोगाट के लिगामेंट में चोट के कारण उन्हें साल 2014 में सर्जरी की आवश्यकता पड़ी, जिससे वह एक साल से अधिक समय तक एक्शन में नहीं दिखीं। 

इसके बाद उन्हें अपने करियर में कई इंजरी का सामना करना पड़ा। जिसके कारण गीता फोगाट नियमित रूप से प्रतिस्पर्धा करने में असमर्थ रहीं। लेकिन बबीता फोगाट ने अपने करियर में लगातार ऊंचाईयां छूती रहीं। उन्होंने साल 2014 कॉमनवेल्थ गेम्स में 55 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद साल 2018 संस्करण में 53 किग्रा में रजत पदक हासिल किया। वहीं, साल 2019 में उन्होंने राजनीति में शामिल होने का फैसला किया, लेकिन एक पेशेवर पहलवान बनी रहीं।

गीता और बबीता की दो छोटी बहनें रितु और संगीता ने भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व किया है। रितु फोगाट एक पूर्व पहलवान हैं, जिन्होंने 2016 कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में स्वर्ण और 2017 एशियाई चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता था। हालांकि, उन्होंने तब से मिक्स्ड मार्शल आर्ट (एमएमए) पर ध्यान केंद्रित किया।

बबीता फोगाट ने 2014 में अपना पहला राष्ट्रमंडल खेलों का स्वर्ण पदक जीता था।
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वहीं, सबसे छोटी बहन संगीता फोगाट एक पहलवान हैं, जिन्होंने कुछ इवेंट में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। उन्होंने टोक्यो 2020 के कांस्य पदक विजेता बजरंग पूनिया से शादी की है। बता दें कि भारतीय महिला कुश्ती के ध्वजवाहक का पद फोगाट परिवार में रहा है।

विनेश फोगाट ने संभाली कमान

विनेश फोगाट ने भी खेल की दुनिया में अपना एक अलग नाम कमाया। वह गीता और बबीता फोगाट की चचेरी बहन हैं, उनके पिता महावीर और विनेश के पिता राजपाल भाई-भाई हैं। विनेश फोगाट को बहुत कम उम्र से महावीर सिंह फोगाट द्वारा प्रशिक्षित किया गया था।

विनेश फोगाट ने पहले 2013 वर्ल्ड यूथ चैंपियनशिप में 51 किग्रा में रजत पदक हासिल किया, और फिर 2013 एशियाई चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता। वह 2014 कॉमनवेल्थ गेम्स में अपना शानदार प्रदर्शन किया, जहां उन्होंने 48 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीता और फिर कुछ महीने बाद ही एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीता।

विनेश फोगाट ने 2016 रियो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया और उन्हें पदक की प्रबल दावेदार के रूप में देखा जा रहा था, लेकिन घुटने की चोट ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। भारतीय पहलवान ने कड़ी मेहनत की और 2015 से एशियाई चैंपियनशिप के प्रत्येक संस्करण में पदक जीता। साथ ही 2018 में कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियाई खेलों दोनों में स्वर्ण पदक जीता है।

विनेश फोगाट भारत के शीर्ष पहलवानों में से एक हैं।
फोटो क्रेडिट 2021 Getty Images

साल 2019 में विनेश फोगाट ने अपना पहला विश्व चैंपियनशिप पदक जीता। उन्होंने 53 किग्रा में कांस्य हासिल किया और टोक्यो 2020 के लिए क्वालीफाई किया। इसके साथ ही वह दुनिया की नंबर 1 पायदान पर पहुंच गईं और टोक्यो ओलंपिक में शीर्ष वरीयता प्राप्त थी, लेकिन क्वार्टर फाइनल में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

वहीं, विनेश फोगाट ने तब टोक्यो में खुद को अच्छी शारीरिक या मानसिक स्थिति में नहीं होने की बात स्वीकार की और भारत लौटने पर कोहनी की सर्जरी करवाई। विनेश की छोटी बहन प्रियंका फोगाट भी एक पहलवान हैं, जिन्होंने 2016 एशियाई चैंपियनशिप में रजत पदक जीता था। आपको बता दें कि भारतीय महिला कुश्ती का भविष्य सुरक्षित हाथों में है और यह सब एक दशक पहले फोगाट बहनों के साथ शुरू हुआ था।

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